अमित त्रिवेदी पत्रकार
इंदौर में दो बड़े राशन घोटालो का पर्दाफाश हो गया है, जिसमें यह तो साबित हो गया कि गरीबों का निवाला छिनने में भी यह सफेदपोश भेड़िये कोई कोताही नही बरतते है। लेकिन महू और फिर इंदौर। दोनो ही घोटालों में यह बात तो साफ हो गयी की घोटालेबाजो से बड़े गुनहगार विभाग में वर्षो से जमे अधिकारी है। जिनके भरपूर साथ के बिना इतने बड़े अपराध को अंजाम देना मुनासिब नही था। तो फिर मुख्यमंत्री, इंदौर कलेक्टर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी ऐसे अधिकारियों के भ्रष्टाचार की सीमेंट,सरिये और ईंट से बने बड़े बड़े आलीशान बंगलो को क्यो ध्वस्त नही करवाते है। आखिर होना तो ऐसा ही चाहिए कि शेर की खाल में छुपे इन भेड़िये यानी घूसखोर अधिकारियों को इतने बड़े घोटाले के संरक्षण देने और उजागर होने पर पक्का सबक मिले। केवल तीन राशन माफिया को टारगेट करने साथ ही इन्हें पनाह देने वाले,इन गुनहगारों को सरंक्षण देने वाले, मुख्य आरोपी अधिकारी की घेराबंदी की जानी चाहिए। अधिकारी का भी मकान ध्वस्त होना चाहिए। ऐसी ही मुहिम गुंडा अभियान में शुरू कर दी जाए । क्योंकि इस पूरे मामले में भी एक छुटभैए गुण्डे को लिस्टेड अपराधी बनाने में सफेद कॉलर का बड़ा योगदान होता है। लेकिन जब ऐसे छुटभैए को माईबाप मिलेगा ही नही तो वह बड़ा अपराधी नही बन सकता है। जैसे कि गुंडा मुहिम में देखा गया है कि गुंडे के पिता,दादाजी,माताजी पत्नी के नाम मकान होने के बावजूद भी अधिकारी उसे निस्तोनाबूत कर देते है। ऐसे हालातो में गुंडों को संरक्षण देने वाले सफेदपोशो को गुंडों,माफियाओ से फिर बड़ी सजा क्यों नही

