*जहां पैदल चलने की जगह नहीं मिलती वहां खाली पड़ी थी सड़क*
इंदौर । शहर का क्लॉथ मार्केट, सीतलामाता बाजार, बर्तन बाजार और मुंबई बाजार न केवल व्यस्ततम व्यावसायिक केंद्र हैं, बल्कि यहां की रौनक और भीड़भाड़ शहर की पहचान है। आमतौर पर यहां इतनी चहल-पहल रहती है कि लोगों को पैदल चलने में भी मुश्किल होती है, लेकिन इन दिनों यह रौनक कम है। डीबी स्टार के रिपोर्टर ने रात 9 से 10 बजे तक इन बाजारों का जायजा लिया। इस समय आमतौर पर बाजारों में खरीदारों की भीड़ रहती है और पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, लेकिन यहां लोग सड़क पर गाड़ियां दौड़ा रहे थे। जहां कई सड़कें पैदल राहगीरों और छोटे विक्रेताओं से भरी रहती थीं, वहां दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में खाली बैठे दार आराकानी पर कजायारी दुकान के बाहर खड़े होकर आने-जाने वाले राहगीरों को बुला रहे थे। एक दुकान का कर्मचारी रिपोर्टर के पास आकर बोला ‘भैया क्या चाहिए आपको… आइए कोट पेंट दिखा देता हूं।’ ऐसी आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं। हर कर्मचारी ग्राहक अपनी दुकान में ले जाना चाह रहा था।
रिपोर्टर जैसे ही कुछ दूर पैदल चला तो चना-चबैना बेचने वाला भी हर आने-जाने वाले से पूछता नजर आया ‘भैया क्या बना दूं।’ सामान्यतः रात में छोटे स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के यहां भीड़ रहती है, लेकिन इस समय वह भीड़ नदारद थी।
बाजार में नजर आ रही दुकानदारों की गाड़ियां
सीतलामाता बाजार में दुकानदार और कर्मचारियों के दोपहिया वाहन सड़क किनारे खड़े रहते हैं, जिससे आम दिनों में ट्रैफिक की समस्या पैदा होती है, लेकिन भीड़भाड़ नहीं होने से खाली सड़क पर गाड़ियों की पार्किंग अखर नहीं रही थी।
लाइट बुझाकर चल रही थी दुकान बंद करने की तैयारी
बर्तन बाजार में रात 9.15 बजे ही ग्राहकी की रफ्तार थमने लगी थी। एक के बाद एक दुकानदार सामान समेटकर दुकान मंगल कर रहे थे। ज्यादातर दुकानदारों ने लाइट बुझा दी थी, जिससे बाजार धीरे-धीरे अंधेरे में डूबता नजर आ रहा था। कुछ दुकानदार कांसे की थालियां, स्टील के भगोने, तांबे के लोटे और एल्यूमीनियम के बर्तन दुकान में रख रहे थे। वहीं कुछ दुकानदार आखिरी
ग्राहक की उम्मीद बाहर खड़े थे, लेकिन जब कोई आता-जाता नहीं दिखा, तो वे भी शटर नीचे खींचने लगे। मुंबई बाजार में यही हाल देखने को मिला। यहां भी ज्यादा भीड़ नहीं थी।

