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आपातकाल से भी बदतर हालात :अजय खरे 

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रीवा । उत्तर प्रदेश के बनारस में प्रशासन ने इधर फिर संविधान और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए राजघाट पर सत्याग्रहियों को गिरफ्तार कर लिया। सर्व सेवा संघ परिसर के सामने विगत 87 दिनों से शांतिपूर्ण सत्याग्रह चल रहा था। शुक्रवार 6 दिसंबर को प्रशासन ने प्रमुख सत्याग्रही राम धीरज, नंदलाल मास्टर, अशोक शरण और जोखन सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया। सत्याग्रह स्थल पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। प्रशासन की यह मनमानी संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है।

समता संपर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने वाराणसी के प्रशासनिक दमन चक्र का विरोध करते हुए निंदा की है। श्री खरें ने बताया कि सर्व सेवा संघ परिसर के सामने चल रहे 100 दिनी सत्याग्रह -न्याय के दीप जलाएं में शामिल सभी प्रमुख साथियों ने विचार- विमर्श कर सत्याग्रह को यथावत जारी रखने का निर्णय लिया है। शनिवार दिनांक 7 दिसंबर 2024 से अगले 19 दिसंबर 2024 तक शास्त्री घाट, कचहरी के निकट नियत समय सुबह 6:00 से शाम 6:00 तक प्रतिदिन सत्याग्रह जारी रहेगा। सभी साथियों से निवेदन है कि वे अपना बनारस आने के कार्यक्रम में कोई तब्दीली न करें।

श्री खरे ने बताया कि पिछले वर्ष 22 जुलाई 2023 को सर्व सेवा संघ के परिसर पर स्थानीय प्रशासन के कुचक्र के चलते नॉर्दर्न रेलवे ने कब्जा किया और बाद में 12 अगस्त 2023 को इसके अधिकांश भवनों को ध्वस्त कर दिया था। गांधीवादी ऐतिहासिक विरासत पर हुए हमले के विरोध में यह सत्याग्रह जारी है। जिसे पूरे देश के कोने-कोने से समर्थन मिल रहा है। श्री खरे ने कहा कि लगातार प्राथमिक दमन चक्र के चलते आपातकाल से भी बदतर हालात नज़र आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र में इस तरह की मनमानी यह बताती है कि केंद्र व राज्य सरकार की मिली भगत के चलते गांधीवादी संस्थाओं को नष्ट करने का गंदा खेल शुरू है।

[8/12, 14:39] +91 94180 15489: स्वराज सत्याग्रह यात्रा: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के दो वर्ष: हम इसे 100 में से 100 मार्क देते है: 

वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डबल इंजन के झांसे को नकारा और इनके विकास के झूठ को बेपर्दा किया और राज्य में कांग्रेस को भारी बहुमत से सरकार बनाने का मौका दिया और इससे पूरे भारत में भाजपा संघ के विरुद्ध माहौल बना।

कांग्रेस ने जरूर दस गारंटी दी जिसमें पुरानी पेंशन को लागू करना और महिलाओं को 1500 रुपए हर माह देना मुख्य था। रोजगार देना भी मुख्य वायदा था जिसमें सरकारी नौकरियों खाली पदों को भरना भी शामिल है। कांग्रेस ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में पुरानी पेंशन को मंजूरी दी और लागू भी किया। इससे भाजपा संघ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार हिल गई। फिर जो महिलाएं लगभग डेढ़ लाख बुढ़ापा विधवा अपंग पेंशन ले रही थीं उन्हें 11 सौ से बढ़ा कर 15 सौ तुरंत किया। और भी जरूरतमंद महिलाओं को भी 1500 रुपए देना शुरू किया है पर और भी बहुत महिलाएं इंतजार में हैं। पहले ही बजट में मनरेगा की दिहाड़ी 210 से 240 और अब 300 करने की घोषणा की है। गाए और भैंस के दूध को 45 रुपए और 55 रुपए प्रति किलो खरीद की कीमत तह की है ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मक्की 3 हजार रुपए और गेहूं को अच्छे दाम पर खरीद न्यूनतम घोषित मूल्य पर खरीद शुरू की है।

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद एक ईमानदार मुख्यमंत्री के रूप में खुद को साबित किया है जो भाजपा संघ को पहले वीरभद्र और अब इनके रूप में बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए नई योजना शुरू की है जिनकी परवरिश प्रदेश के बच्चे के रूप में हो रही है और अब एकल नारी और विधवाओं के बच्चे भी शामिल किए जा रहे हैं पूरे भारत में एक नई पहल है।

पीछे 2023 में हिमाचल प्रदेश में बाढ़ से बहुत बड़ा नुकसान हुआ जिसके लिए केंद्र को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए था लेकिन केंद्र में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी करारी हार की खुन्नस निकाली और हिमाचल प्रदेश को यहां के भाजपा नेतृत्व जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और हिमाचल प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल के इशारे पर भयंकर त्रासदी में केंद्र की तरफ से कोई राहत पैकेज नहीं दिया जाना देश के फेडरल स्ट्रक्चर का घोर अपमान है। प्रदेश के सीमित संसाधनों से हिमाचल प्रदेश की सरकार ने अपने बलबूते 4500 करोड़ की राहत पैकेज दे कर पीड़ित लोगों को राहत पहुंचाई उन्हें बसाने का काम किया। यहां तक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी बचत के 50 लाख के लगभग रुपए भी राहत कोष में दान दिए जोकि आज के राजनीतिक माहौल में असंभव है। भाजपा संघ तो देश प्रदेश को दोनों हाथ लूटने लगे हैं

इतना ही नहीं भाजपा संघ ने हिमाचल प्रदेश की सरकार को अस्थिर करने के लिए ऑपरेशन लोटस चला कर कांग्रेस के 6 विधायक खरीद कर पहले राज्यसभा सीट को जीता और फिर सरकार गिराने का दुस्साहस किया। 6 विधायक अपनी सदस्यता गंवा बैठे और फिर भाजपा में शामिल हो कर चुनाव भी उनमें से 4 हारे। साथ में 3 निर्दलीय विधायकों से भी सौदेबाजी की और इनमें से भी 2 उपचुनाव हारे।

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को इसलिए शत प्रतिशत मार्कस देने का निर्णय है क्योंकि उनके द्वारा पूरे देश में भाजपा संघ को सबक सिखाने और अपने सीमित साधनों से बढ़िया सरकार चलाने के प्रयास है। हिमाचल प्रदेश ही नहीं पूरा देश इनके प्रयास की सराहना करता है। भाजपा संघ के पतन का कारण हिमाचल प्रदेश ही बनेगा जनता अवश्य इन्हें सबक सिखाएगी।

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