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प्रदेश के छह बीओटी टोल नाके के ठेके रद्द

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भोपाल। सरकार हो या फिर प्रशासन ठेकेदारों पर हमेशा से ही मेहरबानी दिखाने में पीछे नहीं रहती है। इस वजह से उनकी मनमानी के चलते आम आदमी को न केवल परेशान होना पड़ता है, बल्कि समय पर अच्छी सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं। ऐसा ही कुछ है स्टेट हाइवे की फोर-लेन सड़कों का। इन सड़कों के निर्माण के बाद ठेकेदारों द्वारा टोल की तो वसूली की जाती है, लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर कुछ भी नहीं किया जाता है। इसकी वजह से अधिकांश सड़कों पर लोगों को यात्रा के समय परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अब इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा सख्ती दिखाई गई तो मजबूरी में प्रदेश के आधा दर्जन टोल नाकों के ठेके रुद्द करने पड़ गए। इन टोल नाकों पर ठेकेदार टोल की वसूली तो कर रहे थे, लेकिन उसकी तय शर्तों की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए सड़कों का मेंटेनेंस नहीं कर रहे थे। यही नहीं इन ठेकेदारों द्वारा सरकार को दी जाने वाली प्रीमियम राशि का भी भुगतान नहीं किया जा रहा था।
इस वजह से उन पर 360 करोड़ रुपए की राशि बकाया हो चुकी है। दरअसल एक याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में पेश की गई थी, जिसकी सुनवाई करने के बाद 12 अक्टूबर 2020 को एमपीआरडीसी को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। खास बात यह है कि इस निर्देश पर अमल में भी चार माह का समय लगा दिया गया। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में बीओटी और एमओटी आधार पर फोर-लेन तथा टू-लेन सड़कों का ठेका लेने के बाद कई ठेकेदार सड़कों का मेंटेनेंस नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से कई सड़कें बेहद खराब हालत में पहुंच चुकी हैं, जिसकी वजह से ऐसी सड़कों पर आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं।
 पुराने ठेकेदार ही कर रहे वसूली
फिलहाल इन सभी टोल नाकों पर वसूली संबंधित ठेकेदारों द्वारा ही की जा रही है। इस मामले में एमपीआरडीसी का तर्क है कि वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है। इसकी वजह से ही पुराने ठेकेदारों द्वारा टोल की वसूली की जा रही है। नई प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई व्यवस्था के तहत इन टोल-नाकों पर टोल की वसूली की जाएगी।
इन टोल नाकों के ठेके किए गए रद्द
मार्ग का नाम किमी लेन बकाया प्रीमियम
भिंड-मोहना 50 टू 0.82
बीना-खिमलासा 40 टू 0.29
महू-घाटाबिल्लेद 27 फोर 222.00
सागर-दमोह 69 टू 3.56
दमोह-जबलपुर 102 टू 3.10
जोबट-जौरा 125 फोर 131.00
(राशि करोड़ में)

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