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पीएम कौशल विकास योजना में दिखाए गए भ्रष्टाचार के कौशल

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 कैग ने किया स्किल इंडिया मिशन की एक योजना में बड़े भ्रष्टाचार का इशारा

लाखों-करोड़ों के विज्ञापन, सेलिब्रिटीज़ की भर-भर के अपील, प्रधानमंत्री मोदी का खुद लाल किले की प्राचीर से आह्वान. कभी रेडियो में कहानियों के बहाने तो कभी फिल्मों के कस्टमाइज्ड़ ट्रेलर दिखे. कभी दीक्षांत समारोह हुए तो कभी चुनावी रैलियों में इसके बहाने वोट की अपील हुई. यहां तक कि सरकार ने अलग से मंत्रालय ही बना दिया.

सीधे-सीधे कहें तो ‘स्किल इंडिया मिशन’ को कामयाब बनाने के लिए सरकार ने जी जान लगा रखी है लेकिन क्या सरकार की योजना कामयाब हो रही है? क्या भारत को कुशल और कौशल संपन्न बनाने का सपना सही मायनों में पूरा हो रहा है? 

सरकारी आंकड़ों को गवाह मानेंगे तो पीएमकेवीवाई कामयाब हो रही है लेकिन सरकारी आंकड़ों का हिसाब किताब रखने वाली संस्था नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक यानि कैग स्किल इंडिया मिशन की एक योजना में बड़े भ्रष्टाचार का भी इशारा कर रही है.

कैग की रिपोर्ट है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यह प्रधानमंत्री मोदी के ‘स्किल इंडिया’ के सपने को ‘स्कैम इंडिया’ में बदलने में लगी है. 

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी पीएमकेवीवाई में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इसके लिए सीएजी यानी कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट को आधार बनाया है। इसने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट ने इस योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और घोटाले का खुलासा किया है। यह योजना युवाओं को कौशल सिखाकर नौकरी दिलाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक़ इसमें देश के करदाताओं के पैसे का ग़लत इस्तेमाल हुआ है।

कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘पीएमकेवीवाई मोदी सरकार की योजना थी, जिसके बारे में सबने सुना है। 2015 से 2022 तक की सीएजी रिपोर्ट आई है, जिसमें भयंकर स्कैम का पर्दाफाश हुआ है। पहले यह नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन था, लेकिन मोदी सरकार ने इसका नाम बदलकर पीएमकेवीवाई कर दिया और रिपैकेज किया।’

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
गोपीनाथन ने आरोप लगाया कि पिछले 7 साल में 10 हजार करोड़ रुपए ऐसे लोगों को बांटे गए हैं, जिनके न फोन नंबर हैं और न कोई सही ईमेल एड्रेस। उन्होंने कहा कि पीएमकेवीवाई के तहत ट्रेनिंग पार्टनर्स को एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट के समय पैसा दिया जाता रहा है, लेकिन जब केरल की एक कंपनी में ऑडिट किया गया तो पता चला कि वहां लोगों का प्लेसमेंट ही नहीं हुआ है।
किन पर सवाल उठाए गए?
सरकार ने 7 साल में करीब 10 हजार करोड़ रुपये ट्रेनिंग पार्टनर्स को दिए।
पीएमकेवीआई 2.0 और 3.0 में कुल 95.90 लाख लाभार्थियों में से 94.53% यानी 90.66 लाख के बैंक खाते फर्जी या गलत निकले।
इनमें खाते ‘11111111111’, ‘000000’, ‘N/A’, ब्लैंक या दोहराए गए नंबर थे। कई जगह एक ही बैंक अकाउंट नंबर हजारों लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया।
‘abc@gmail.com’, ‘123@gmail.com’ जैसे ईमेल भी फर्जी थे या एक ही ईमेल 1 करोड़ लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया।
ट्रेनिंग की जाँच करने वालों की जानकारी 97% मामलों में नहीं थी। कई ट्रेनिंग सेंटर बंद पाए गए, लेकिन पैसे जारी हो गए।
कुल सर्टिफाइड युवाओं में सिर्फ 41% को नौकरी मिली।

‘इतने स्किल्ड कि 31 फरवरी को भी ट्रेनिंग’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘नीलिमा मूविंग पिक्चर्स नाम की कंपनी ने पीएमकेवीआई के तहत 33 हजार लोगों को ट्रेनिंग दी है, लेकिन ये कंपनी पिछले 5-6 साल से बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेनिंग के तहत एक ही तस्वीर को अलग-अलग जगहों का बताकर इस्तेमाल किया गया और ट्रेनिंग देने की बात कही गई। उन्होंने कहा, ‘जयपुर कल्चरल सोसाइटी नाम के ट्रेनिंग पार्टनर ने बताया है कि उन्होंने 31 फरवरी को ट्रेनिंग ऑर्गनाइज किया है।’ कन्नन ने तंज कसा कि ये लोग स्कैम करने में इतने स्किल्ड हो चुके हैं कि अब 31 फरवरी को भी ट्रेनिंग करवा रहे हैं।

कन्नन गोपीनाथन ने आगे कहा, ‘ट्रेनिंग, एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट, हर स्तर पर करप्शन हुआ है। यह टैक्स देने वाले नागरिकों और युवाओं के साथ धोखा है।’

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