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स्मार्ट सिटी घोटाला: सरकार ने IAS आदित्य सिंह को हटाया

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भोपाल. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित स्मार्ट सिटी घोटाले में न्यूज़ 18 की खबर का बड़ा असर हुआ है. सरकार ने स्मार्ट सिटी के सीईओ आईएएस अफसर आदित्य सिंह को हटा दिया है. उन्हें मंत्रालय उप सचिव के तौर पर अटैच किया गया है. ईओडब्ल्यू (EOW) ने इस मामले में आदित्य सिंह को नोटिस भेजकर 10 दिनों में जमीन नीलामी प्रक्रिया से जुड़ी तमाम जानकारी मांगी थी. जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया तो तत्काल प्रभाव से आदित्य सिंह को हटाने का काम किया गया. यह सब इसलिए किया गया ताकि जांच प्रभावित न हो सके.

दरअसल, स्मार्ट सिटी एरिया में 100 एकड़ जमीन की करीब 1500 करोड़ में की नीलामी की जा रही है. नीलामी प्रक्रिया में गड़बड़ी और घोटाले की शिकायत EOW में की गई थी. ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच में जमीन नीलामी में गड़बड़ी के सबूत मिले हैं. टीटी नगर एरिया के प्लाट नंबर 79 (ए), 80 और 83 की बिक्री में गड़बड़ी की बात कही गई है. इनका बेसिक प्राइस 63. 80 करोड़, 70.75 करोड़ और 73.96 करोड़ रुपए रखा गया था. केवल दो टेंडर आने पर ही प्लाट को बेच दिया गया. जबकि कम से कम 3 टेंडर आने पर ही ऐसा किया जा सकता है. यह प्लॉट बेस प्राइस से केवल 8 से 9% अधिक पर बेचे गए. इस  गड़बड़ी, घोटाले की वजह से शासन को करीब 35 करोड़ का नुकसान होने का आरोप है.आदित्य सिंह के हटने के बाद निगम आयुक्त बीएस चौधरी  सीईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं

बिल्डर्स ने सभी शर्तों को पूरा किया था
दरअसल, न्यूज़ 18 ने खुलासा किया था कि हाल ही में भोपाल में स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी ने करोड़ों की जमीन नीलाम की है. नीलामी की शर्तों में हेराफेरी कर कई नामी बिल्डर को फायदा पहुंचाने का आरोप है. जांच के घेरे में 2 आईएएस अफसर भी आये हैं. यह शिकायत उन बिल्डरों की ओर से की गई है, जिन्हें शर्तें पूरी करने के बाद भी स्मार्ट सिटी में जमीन नहीं मिली. आरोप है कि नीलामी के पहले जमीन पर निर्माण की शर्तें कुछ और थी. लेकिन नीलामी के बाद जमीन आवंटित होते ही शर्तों को बदल दिया गया. यह आरोप भी है कि अधिकारियों ने बिल्डर्स से सांठ-गांठ कर जमीन हासिल कर ली है, जबकि अन्य बिल्डर्स ने सभी शर्तों को पूरा किया था.

स्मार्ट सिटी पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं
जमीन नीलामी से पहले भी स्मार्ट सिटी पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. स्मार्ट सिटी के​ लिए डाटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसमें  ऐसी कंपनी को टेंडर दिया था. जिसे इस काम का कोई अनुभव ही नहीं था. इस मामले में एक आईएएस अफसर और बेटे पर आरोप लगे थे. स्मार्ट सिटी के नाम पर भोपाल के पॉलीटेक्निक चौराहे से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड का टेंडर 31 करोड़ रुपए में हुआ था. 27 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था. स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन ने ठेकेदार को 32 करोड़ का भुगतान कर दिया, जबकि एग्रीमेंट में कान्ट्रेक्ट वेल्यू किसी भी स्थिति में नहीं बढ़ाने की शर्त थी.

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