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*स्मार्ट मीटर मध्य प्रदेश में बन सकता है सरकार का सिरदर्द*

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गुलाबगंज में विधवा महिला और पाच बच्चे, एक कमरे का कच्चे  घर में रहते है। सरकार के राशन पर निर्भर परिवार का बिजली बिल पहले सौ-डेढ़सौ एवरेज आता था। स्मार्ट मीटर लगने के बिल हजारों में आने लगा।

 विदिशा काग्रेस के प्रवक्ता अरण अवस्थी राजू कहते हैं कि यह सरकार की खुली लूट है। स्मार्ट मीटर ने लोगों की आर्थिक स्थिति पर कड़ा प्रहार किया है।लोग बिजली के बड़े हुए बील भरे या अपने यहां दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करें। बहुत कठिन स्थित में यहां पर सौ-दोसौ रुपए के मिल आ रहे थे. अब उनके यहां पर पांच-दस हजार के बील आने लग गए हैं।स्मार्ट मोटर लगने के बाद बिजली बिल की यह परेशानी सिर्फ विदिशा अकेले  की नहीं है, बल्कि प्रदेश में जहां-जहां बिजली के स्मार्ट मीटर लगे हैं यहां पर यह समस्या है। बिजली के बड़े हुए बिल आ रहे  है। हर दिन कही न कहीं इसके के विरोध  में धरने-प्रदर्शन किए जा रहे है।

 राजधानी भोपाल में भी इसका लगातार विरोध हो रहा है। यहां के रहवासी मीटरों को अव  अपने घर पर लगने नहीं दे रहे हैं।  सिवनी में स्मार्ट मीटर के विरोध को लेकर बंद हो चुका है। प्रदेश में जहां जहा स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, कहां विरोध हो रहा है। इसमें इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, सतना, रीवा जैसे मध्य प्रदेश के बड़े शहर शामिल हैं । विद्युत मंडल 

भी  शिफावतों पर ज्यादा काम नहीं कर रहे, नतीजे में चाहे जैसी शिकायतें हों ऑफ लाइन शिकायत, गा टोल फ्री नंबर 1912 किसी का कोई काम ही नहीं किया जारहा है। यानि मध्य प्रदेश का बिजली विभाग एक तरफा चल रहा है। शिकायते का निपटारा होने के पहलेही बिना पूर्व सूधना का चेतावनी के बिजली काट दी जाती है। मजबूरी में शिकायत का निपटाता हो या न हो उपभोक्ता को  हजारों का बिल भरने के लिए मजबूर होना पड़ता है ।मध्य प्रदेश में गैर राजनीतिक हरीके से  प्रदेश के अधिकांश शहरों में ऐसे विरोध शुरू हो गए हैं, 

 25 करोड पुराने मीटर बदलकर उनकी जगह   देश में अब तक साढ़े ग्यारह करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके है। कांग्रेस स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के आक्रोश को भुना सकती है, लेकिन कांग्रेस के नेता भी केवल बयान देने तक ही सीमित है अभी तक कांग्रेस ने इसको लेकर प्रदेश में कहीं भी आंदोलन की घोषणा नहीं की है ‌।

कुल मिलाकर जिस तरह से प्रदेश के हर शहर में जनता का विरोध स्मार्ट मीटर को लेकर हो रहा है, वह सरकार के लिए सर दर्द साबित हो सकता है।

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