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गांव की चौपाल से ग्राउंड जीरो को टटोलने में लगी स्मृति ईरानी

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अमेठी की दो दिवसीय दौरे के पहले दिन जेठ के महीने में तेज चलती हवाएं और 37 डिग्री तापमान के बीच गांव में बैठी अमेठी सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ग्राउंड जीरो का फीडबैक जानने की कोशिश में जुटी रही। सांसद आवाम से मुखातिब थीं तो आला हुक्मरान भी वहीं पर जमे हुए थे। स्मृति ने सब की समस्याएं सुनी और पड़ोस ही खड़े अफसरों को एक के बाद एक प्रार्थना पत्र बढ़ाती रही। बता दें कि उनका अमेठी दौरा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र वायनाड (केरल) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की योजनाओं के बारे में चर्चा शुरू करने के कुछ दिनों बाद आया है, जहां उन्होंने हाल ही में दौरा किया था।

सांसद बनने के बाद से ही स्मृति जनता के बीच हमेशा बने रहने की बेहतर कोशिश शुरू कर दी। सांसद बनने के बाद 35 माह के कार्यकाल में शायद ही कभी 2 महीने का अंतराल रहा होगा जब स्मृति ईरानी अमेठी न आई हों। अगर वह नहीं आई तो उनके प्रतिनिधि विजय गुप्ता यहां डटे रहे। वह जब भी आई लोगों से खूब मिली। कोविड काल के दौरान भी डिजिटल चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी और उनका निराकरण किया। सोमवार को एक बार फिर जब उनका दो दिवसीय कार्यक्रम तय हुआ तो उसमें पूरे दिन जनता से संवाद किया। जगदीशपुर के दिछौली गांव में तेज धूप में स्मृति ने जनता से बात की। यहां पर भाजपा का ही विधायक है।

इसके साथ ही संगठन सरकार और जिम्मेदार अफसर हर कोई उपलब्ध है। बावजूद बड़ी संख्या में लोग सांसद से अपनी पीड़ा सुनाने के लिए एकत्र हुए। मामले भी आवास, पेंशन, राशन कार्ड जैसी बातों से जुड़े थे। कमोबेश यही हाल दादरा की चौपाल में भी था। कोई प्रोटोकॉल न कोई बड़ी खाई। हर कोई अपने अंदाज में अपनी समस्या कह रहा था और तत्काल निवारण होने वाली समस्याओं को स्मृति अधिकारियों को जबकि थोड़ा समय लेने वाली समस्याओं को प्रतिनिधि विजय गुप्ता को सौंप रही थी। सोमवार को पूरे दिन यही क्रम चलता रहा। दादरा से निकलकर वह अमेठी विस के संग्रामपुर स्थित करनाईपुर गई। यहां भी सैकड़ों की संख्या में लोग उनका इंतजार कर रहे थे। समस्याएं सुनी अपनी बातें कहीं और विकास कार्यों का भरोसा दिलाया।  

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