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तो क्या कांग्रेस का अध्यक्ष का चुनाव गांधी परिवार के लिए मुसीबत बन जाएगा?

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एस पी मित्तल,अजमेर

कांग्रेस और गांधी परिवार इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इस संकट के दौर में ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है। 17 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में गांधी परिवार के सलाहकार और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चाहते हैं कि चुनाव में सर्वसम्मति से हो। यानी राहुल गांधी के मुकाबले में कोई भी कांग्रेस अपना नामांकन न करे, गहलोत इस बात पे पूरे प्रयास कर रहे है कि राहुल गांधी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुन लिया जाए, लेकिन कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान और तीन बड़े नेताओं की बैठक दिल्ली में गुलाम नबी आजाद के घर पर होने से कांग्रेस और गांधी परिवार के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। शशि थरूर ने कहा कि अध्यक्ष का चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। इस बयान के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि शशि थरूर भी अध्यक्ष के लिए अपना नामांकन दाखिल करना चाहते हैं। 30 अगस्त को थरूर का ये बयान सामने तब आया, जब दिल्ली में कांग्रेस छोड़ चुके गुलाम नबी आजाद के घर पर कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चौहान, आनंद शर्मा और भूपेंद्र हुड्डा की एक बैठक हुई। चौहान महाराष्ट्र और आनंद शर्मा हिमाचल से आते हैं, जबकि हुड्डा हरियाणा में कांग्रेस के दमदार नेता है। यदि हुड्डा भी गांधी परिवार और कांग्रेस से नाराज है तो फिर हरियाणा में कांग्रेस को बड़ा झटका लगने वाला है। जानकार सूत्रों के अनुसार आजाद के घर हुई इस बैठक में कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर मंथन हुआ। बैठक में राहुल गांधी के मुकाबले में वरिष्ठ नेता का नामांकन दाखिल करवाने की रणनीति बनाई। यदि किसी वरिष्ठ नेता ने नामांकन दाखिल किया तो फिर राहुल गांधी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनने के प्रयासों पर पानी फिर जाएगा। राजस्थान के सीएम गहलोत तो बार बार कह रहे हैं कि राहुल गांधी को ही कांग्रेस का अध्यक्ष बनना चाहिए। राहुल गांधी जब बड़े नेताओं के आग्रह पर भी अध्यक्ष पद स्वीकार नहीं कर रहे हैं, तब किसी नेता के मुकाबले ही अपना नामांकन दाखिल कर कैसे चुनाव लड़ेंगे। ये सही है कि किसी भी नेता के मुकाबले में चुनाव में राहुल गांधी की स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन चुनाव घोषणा की वजह से कांग्रेस और गांधी परिवार के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। देखना होगा कि नई समस्या से गांधी परिवार के सलाहकार अशोक गहलोत कैसे मुकाबला करते हैं। अब जब अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए विधिवत घोषणा कर दी गई है तो फिर चुनाव करवाना भी अनिवार्य हो गया है। चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के असंतुष्ट नेता एकजुट होने लगे हैं। कांग्रेस में जो अंतर्कलह चल रही है उस को चुनाव की वजह से और हवा मिलेगी। 

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