शैलेश
न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित युवा मेयर ज़ोहरान ममदानी की जीत की चर्चाओं के बीच सिएटल की कहानी कुछ दब सी गयी है। सिएटल ने भी अपने अनुभवी डेमोक्रेट मेयर ब्रूस हैरेल को हरा दिया है, और अपने लिए ममदानी से भी कम विधायी और प्रशासनिक अनुभव वाली केटी विल्सन को मेयर के रूप में निर्वाचित किया है। जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने उनकी आलोचना करते हुए उन्हें ‘कम्युनिस्ट’ कहा था।
ममदानी की ही तरह, खुद को लोकतांत्रिक समाजवादी कहने वाली केटी विल्सन ने भी अपना चुनाव समाजवादी मांगों के साथ लड़ा। उनकी मांगों में अधिक किफायती आवास का निर्माण, बेघरों को आपातकालीन आवास सहायता प्रदान करना, सीमित प्रगतिशील करों की शुरुआत, सार्वभौमिक बाल देखभाल, सरकारी किराना स्टोर खोलने और शहर में सस्ते सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
वे ऊँची क़ीमतों से त्रस्त इस शहर को आम लोगों के जीवन निर्वाह के लायक बनाना चाहती हैं। विल्सन का मानना है कि “किफ़ायती, स्वस्थ भोजन तक पहुँच एक बुनियादी अधिकार है।”
आइए उनके महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दों पर एक नज़र डालते हैं:
-शहर में बेघरों की समस्या का समाधान
-चार वर्षों में आपातकालीन आवास और आश्रय की 4,000 नई इकाइयाँ।
-फेंटेनाइल/ओपिओइड संकट (इन सिंथेटिक दवाओं के ओवरडोज से होने वाली मौतों की समस्या) से निपटने वाले केंद्रों के लिए अनुबंध और पट्टे को अधिक कुशल बनाना।
-किफायती आवास और आवास आपूर्ति सुनिश्चित करना
-सामाजिक आवास का निर्माण करें, किफायती आवास के लिए 1 अरब डॉलर के बांड का लक्ष्य रखें।
-मकान मालिकों की कार्यप्रणाली में सुधार करें, निजी इक्विटी फर्मों द्वारा घर खरीदने की सीमा को सीमित करें।
-“ट्रम्प-प्रूफ” सिएटल (ट्रंप के प्रभाव से सिएटल को बचाना)
-आप्रवासियों और शरणार्थियों को लक्षित करने वाली संघीय नीतियों का विरोध करें।
-संघीय सरकार द्वारा कटौती की गई सेवाओं के वित्तपोषण के लिए अमीरों पर टैक्स लगाकर राजस्व जुटाना
-सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था का विस्तार और गति को बढ़ाना
-पैदल चलने वालों, बाइक सवारों और रोलर स्केटिंग वालों के लिए सड़क सुरक्षा बढ़ाएँ।
-सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित, आरामदेह और सस्ता करना।
-सार्वजनिक सुरक्षा का विस्तार
-नशीली दवाओं और विकारों की बहुतायत वाले इलाकों (हॉटस्पॉट) को लक्षित करने वाले कार्यक्रमों का विस्तार करना।
-संकट के समय पुलिस का इस्तेमाल न किया जाए, बल्कि इसके लिए वैकल्पिक सेवाओं का विस्तार किया जाए।
-कामकाजी परिवारों को सुविधाएं
-सिएटल के बीमारी और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के समय सवेतन अवकाश देने के क़ानून
-कामकाजी परिवारों के बच्चों के लिए सार्वजनिक स्कूल कार्यक्रमों में विविधता लाना और उन्हें मजबूत बनाना
-जलवायु कार्रवाई और पर्यावरणीय न्याय को बढ़ावा
-शहर में आवासों और वृक्षों की संख्या बढ़ाने के लिए भूमि उपयोग कोड को अद्यतन करना।
-हरियाली बढ़ाने के काम के लिए अलग से नौकरियां सृजित करना, शहर के स्वामित्व वाले सौर पैनल स्थापित करना तथा बसों के लिए अलग लेन बनाना।
आर्थिक विकास
-बिना इस्तेमाल के, खाली छोड़ दिये गये व्यावसायिक स्थानों को भरने के लिए रिक्तता कर या जुर्माने की व्यवस्था।
-फीफा विश्व कप 2026 का उपयोग सिएटल शहर के मुख्य भाग में स्थायी बुनियादी ढांचे और नीति उन्नयन के लिए किया जाएगा।
प्रगतिशील राजस्व
-कंपनियों द्वारा नौकरियों को सिएटल से बाहर शिफ्ट करने की योजनाओं पर रोक लगाना
-पहले 2.5 लाख डॉलर मूल्यांकित मूल्य की संपत्ति को कर से छूट दी जाएगी, जबकि अमूर्त संपत्ति पर राज्यव्यापी कर लागू किया जाएगा।
उन्होंने वादा किया है कि “मैं असाधारण नेताओं का एक ऐसा मंत्रिमंडल नियुक्त करूँगी, जिनके जीवंत अनुभव सिएटल के अश्वेतों, अन्य रंगों वाले समुदायों, मूल निवासियों, एशियाई और प्रशांत महासागर के द्वीपों के निवासियों, लैटिन/स्पेनी मूल के लोगों, के साथ-साथ महिलाओं, अप्रवासियों और शरणार्थियों, समलैंगिक एवं अन्य लैंगिक रुझानों वाले समुदायों, विकलांग लोगों, सभी धार्मिक परंपराओं के लोगों और हर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के निवासियों की विविधता को दर्शाते हों और उनका प्रतिनिधित्व करते हों।”
केटी विल्सन न्यूयॉर्क के बिंगहैमटन में पली-बढ़ीं, जहां उनके माता-पिता, दोनों ही राज्य विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्रोफेसर थे। केटी विल्सन के भीतर मानवीय करुणा से भरा हुआ और अन्याय का विरोध करने वाला एक विद्रोही व्यक्तित्व उनके बचपन से ही तैयार हो रहा था।
अपनी कक्षाओं में अव्वल आने के साथ-साथ, अपने विद्यालय में वे अनेक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन भी करती रहीं। उन्होंने अपने स्कूल की टोपी नीति का विरोध किया, 1999 में कोलंबाइन स्कूल में हुई गोलीबारी के बाद उनके अपने स्कूल में प्रस्तावित सुरक्षा उपायों का विरोध किया, शहर में हाथियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले सर्कस का विरोध किया।
वे मुफ़्त खाना बांटने वाले ‘फ़ूड, नॉट बॉम्ब्स’ नाम के एक वीगन (शाकाहारी) समूह की स्थानीय शाखा से जुड़ी थीं और उस समय विश्व व्यापार संगठन के खिलाफ अमरीका में चल रहे वैश्वीकरण-विरोधी प्रदर्शनों से अच्छी तरह वाकिफ़ थीं।
विद्रोही विल्सन ने इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक पूरा होने से छह सप्ताह पहले ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी। यह साल 2004 की बात है। विल्सन को उम्मीद थी कि ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय शिक्षा-जगत को लेकर उनके संदेह दूर कर देगा। लेकिन इसके बजाय ऑक्सफोर्ड की शिक्षा प्रणाली में भी उन्हें वही घिसा-पिटा कैरियरवाद और पार्टी संस्कृति दिखी, जिससे वे बचना चाहती थीं।
वे जानना चाहती थीं कि असली दुनिया क्या है, और वे बिना किसी सहारे के, इसमें कूद पड़ना चाहती थीं। वे अपने माता-पिता के नाम, पद और प्रतिष्ठा तथा अपनी स्नातक की डिग्री के सहारे अपनी जिंदग़ी का सफर नहीं पूरा करना चाहती थीं। इसीलिए वे उस पुल को जला देना चाहती थीं, ताकि वे अपने भरोसे इस दुनिया को जानने और इसे ठीक करने का रास्ता तलाश करने को मजबूर हों, और उन्होंने ऐसा ही किया भी।
उनका कहना है कि “हम यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि हम दुनिया को कैसे बदल सकते हैं?”
विल्सन और उनके पति, स्कॉट मायर्स, ऑक्सफ़ोर्ड छोड़ने के कुछ ही समय बाद सिएटल पहुँच गए। वहां उन्हें वाशिंगटन विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों तक आसान पहुँच मिल गई थी।
विल्सन के ऑक्सफोर्ड से बाहर निकलने के निर्णय ने उन्हें कई कम वेतन वाली नौकरियां करने को मजबूर किया। सिएटल में बिताए अगले एक दशक का उनका जीवन-वृत्त उस समय के एक किफायती शहर में रहने वाली एक युवा महिला का चित्र है। उन्होंने सात महीने लैब तकनीशियन के रूप में काम किया, दो महीने नावों पर काम किया, तीन महीने एक ठेकेदार के यहाँ काम किया, बैरे का काम किया, एक साल बेकरी में, और दो साल एक वकील के रूप में काम किया।
उनके पास अपनी कार तक नहीं है। वे आज भी, 600 वर्गफीट से भी छोटे, मात्र एक बेडरूम वाले अपने अपार्टमेंट में अपने पति और दो साल की बेटी के साथ रहती हैं। यह घर किताबों से भरा हुआ है और दीवारों से छत तक के किनारों पर वॉलपेपर लगे हैं। रात में, वह और उनके पति अपनी दो साल की बेटी को अपने बेडरूम में एक पालने में सुला देते हैं। जब वह सो जाती है, तो वे उसे लिविंग रूम में ले जाकर सुला देते हैं।
उनकी खूबी यह है कि वे किसी भी चीज को समझने, कहीं भी जाने और किसी के भी साथ घुलने-मिलने में सक्षम हैं। विल्सन के अनुसार, सिद्धांत और व्यवहार के बीच कोई अन्तर नहीं होना चाहिए।
वे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए बहुत सक्रिय रही हैं। 2011 में स्थापित गैर-लाभकारी संस्था, ‘ट्रांजिट राइडर्स यूनियन’ की वे सह-स्थापिका हैं। यह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वालों की यूनियन है।
इसने किंग काउंटी में कम आय वाले यात्रियों के लिए रियायती परिवहन पास के लिए कोशिश किया और इसमें सफल रही। ‘ट्रांजिट राइडर्स यूनियन’ के 400 से ज़्यादा सदस्य हैं, जिनका प्रबंधन वह स्वयं करती हैं, लेकिन फिर भी उनके पास केवल तीन कर्मचारी हैं और उनका बजट 2 हजार डॉलर से भी कम है।
अब वे लगभग 8 लाख निवासियों वाले सिएटल शहर का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें लगभग 14 हज़ार नगरपालिका कर्मचारी हैं और 8.9 अरब डॉलर का बजट है।
उनकी यूनियन ने उस समय सिएटल पब्लिक स्कूल के छात्रों के लिए मुफ्त ट्रांजिट पास का विस्तार करने के लिए सिएटल पर दबाव डालने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
केटी विल्सन टैक्स पॉलिसी की विशेषज्ञ हैं। उन्होंने शहर के जंपस्टार्ट टैक्स को तैयार करने में मदद किया था। यह बड़े व्यवसायों द्वारा किये जाने वाले वेतन भुगतान (पे रोल) पर आधारित टैक्स व्यवस्था थी, जिसका इस्तेमाल बेघरों के लिए घरों की व्यवस्था करने में किया जाना था।
इसके अलावा, उन्होंने प्रगतिशील आयकर प्रणाली तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई थी, जिसे सिएटल सिटी काउंसिल ने 2017 में मंज़ूरी दे दी थी। लेकिन धनी लोगों पर उच्च दर से कर लगाने के उस प्रयास को बाद में राज्य की एक अदालत ने खारिज कर दिया।
लेकिन इस फैसले से यह तो स्पष्ट हो ही गया कि सिएटल जैसे शहर कानूनी तौर पर 1% फ्लैट आयकर लगा सकते हैं, जो कि राज्य के कानून के तहत पहले स्पष्ट नहीं था।
इस साल की शुरुआत में जब विल्सन ने आवास निर्माण के लिए उच्च आय वालों पर एक नया कर, स्थानीय पूंजीगत लाभ पर कर, डिजिटल विज्ञापन कर और राज्यव्यापी संपत्ति कर लगाये जाने के लिए अभियान चलाया था, और तत्कालीन मेयर ब्रूस हैरेल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, तभी उन्होंने उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था।
उन्होंने मई 2020 में अमरीकी पुलिस द्वारा एक अश्वेत अमरीकी जॉर्ज फ्लॉएड की गर्दन को बूटों से दबाकर उसकी हत्या के विरोध में सिएटल के पुलिस बल में कटौती के लिए भी आंदोलन किया। जबकि मेयर ब्रूस हैरेल वहां पार्कों में स्थापित बेघर शिविरों को हटाने और नशीली दवाओं तथा अपराधों के नियंत्रण के नाम पर अतिरिक्त पुलिस बल की भर्ती करना चाहते थे।
ट्रंप के नये दौर में अमरीका में नस्लवादी राष्ट्रवाद का नया उभार खासकर के आप्रवासियों, अश्वेतों, मजदूरों और कम आय पर गुजारा करने वालों के लिए बेहद कठिन दौर है।
सिएटल के निवासियों को यह शहर जीवनयापन योग्य (अफोर्डेबल) नहीं लग रहा है। बाहर खाने-पीने की चीजों के मामले में सिएटल देश का दूसरा सबसे महंगा शहर है। पहले नंबर पर सैन फ्रांसिस्को है।
तो सवाल यह है कि न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में ज़ोहरान ममदानी की जीत के बाद सिएटल के मेयर के रूप में केटी विल्सन की यह जीत किस बात की ओर इशारा कर रही है?
कॉरपोरेट पूँजीवाद के गढ़ अमरीका में अचानक समाजवादी मांगों को इस तरह स्वीकृति क्यों मिलने लगी है? यह बात इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है कि इस समय ट्रंप के नेतृत्व वाला अमरीका आक्रामक कॉरपोरेट पूंजीवाद की बेरहम अमानवीयता का नमूना बनता जा रहा है।
ऐसे में अमरीकी जनता ने अपने दो बड़े और महत्वपूर्ण महानगरों का नेतृत्व स्वघोषित लोकतांत्रिक समाजवादियों के हाथों में कैसे सौंप दिया? क्या अमरीका का, और दुनिया का मिज़ाज बदलने लगा है?
इन बदलावों के आधार पर कोई खुशफहमी पालना तो ग़लत है, लेकिन यह बात जरूर है कि पूंजीवाद जहां अपार संपदा का संकेंद्रण करता है, वहीं बेपनाह ग़रीबी और वंचना भी पैदा करता है। पूंजी और श्रम के हितों के बीच का यह बुनियादी अंतर्विरोध पूंजीवादी व्यवस्था के खात्मे के बिना हल नहीं हो सकता।
अक्सर बड़े कॉरपोरेट देश इन संकटों को परिधि के अविकसित देशों की ओर खिसकाते रहते हैं, लेकिन इस संकट से वे स्वयं भी अछूते नहीं रह सकते। पूंजीवादी देशों में भी असंख्य बेघर, बेसहारा, बेरोजगार और अल्परोजगार लोगों की एक फौज तैयार होने लगती है, जिसकी चेतना का स्तर काफी ऊंचा होता है और जो अंततः एक दिन खुद पूंजीवाद की कब्र खोदने में सक्षम होती है।
अत्यधिक मुनाफे की लालच में पूंजीपति प्रगतिशील टैक्स प्रणाली तक का विरोध करता रहता है। जब पानी नाक से ऊपर जाने लगता है तो जनता समाजवादी सुधारों का समर्थन करना शुरू कर देती है। ये सुधार व्यवस्था में तैयार हो रहे एक बेहद विस्फोटक दबाव को कम करने वाले सेफ्टी वॉल्व का काम करते हैं। लेकिन ये उस दबाव की तरफ इशारा तो कर ही देते हैं।
इन समाजवादी सुधारों से असंख्य बेज़ार जिंदगियों के दुख-दर्द में थोड़ी मोहलत मिलती है। उनके हिस्से में थोड़ा सुकून आता है। ये सुधार भले व्यवस्था को न बदलें, लेकिन व्यवस्था की दुर्दांतता को कम करते हैं और उसे सहनीयता की सीमा में लाने की कोशिश करते हैं।
ज़ोहरान ममदानी और केटी विल्सन जैसे लोग अमरीकी कॉरपोरेट साम्राज्यवाद के गढ़ में बैठकर इन मागों के इर्द-गिर्द अधिसंख्य जनता को एकजुट कर ले रहे हैं, हाशिये पर फेंक दिये गये लोगों के रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, परिवहन, बच्चों की देखभाल जैसे मुद्दों को बहस के केंद्र में लाकर एक बड़ा काम कर रहे हैं।
हमारे देश में ब्राह्मण-कॉरपोरेट गठजोड़ के हाथों पूरे देश में पहचान आधारित सांप्रदायिक राजनीति ने आम लोगों के रोजमर्रा के संघर्षों और जिंदग़ी बचाने की जद्दोदहद के मुद्दों को हाशिये पर फेंक दिया है। ममदानी और विल्सन द्वारा समाजवादी मांगों को फिर से केंद्र में स्थापित कर देने की यह नज़ीर न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर की राजनीति पर दूरगामी असर डालने वाली है।

