Site icon अग्नि आलोक

*‘लद्दाख मुद्दे पर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने माँगा गृहमंत्री अमित शाह का इस्तीफ़ा’*

Share
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) लद्दाख में हुई हालिया हिंसा और केंद्र सरकार की लगातार नाकामियों की कड़ी निंदा करती है और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराती है। उनके कार्यकाल में मणिपुर सहित देश के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक शासन और नागरिक अधिकारों में गंभीर चूक हुई है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) निम्नलिखित मामलों में गृह मंत्री अमित शाह, जो देश के लिए लगातार खतरनाक स्थिति पैदा कर रहे हैं. के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है:
 
·        अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को कमजोर करने के दौरान उन्होंने दुस्साहस की हद तक गैरजिम्मेदाराना और लापरवाही भरे बयान दिए। इसके तुरंत बाद गलवान में चीनी घुसपैठ हुई, जिसके लिए सरकार बिल्कुल तैयार नहीं थी। इसमें हमारे 20 सैनिकों की अमूल्य जान चली गई, जबकि हमारी और चीनी सेनाओं के बीच यह समझौता है कि वे एक-दूसरे पर गोली नहीं चलाएंगे।

·        उधर मणिपुर की स्थिति को ठीक से न संभाल पाने के कारण मैतेई और कुकी आबादी अलग-थलग पड़ गई है, जो संघर्ष शुरू होने के दो साल बाद भी साथ रहने की बात तो दूर रही, बातचीत करने को तैयार नहीं हैं ।

·        पहलगाम में गंभीर सुरक्षा चूक हुई, जिसके आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हुए। इसके बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ, जिसकी कीमत देश को भारी जनहानि और हज़ारों घरों के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी।
 
·        लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा और गोलीबारी, शांतिप्रिय लद्दाखी लोगों के जीवन के प्रति सरकार की घोर उपेक्षा को दर्शाती है। इससे पहले कभी भी सरकारों ने लद्दाख में अपने ही लोगों के खिलाफ क्रूर बल का प्रयोग नहीं किया था।
 
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का दृढ़ विश्वास है कि जवाबदेही के बिना लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। अतः उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए तथा यह देखते हुए कि मंत्रियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, कोई भी न्यायिक जांच, जिसकी हम मांग कर रहे हैं, तभी पर्याप्त रूप से विश्वसनीय होगी जब इसे नए केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा शुरू किया जाए।
 
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) यह भी मांग करती है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। लद्दाख को, जब वह पहले जम्मू और कश्मीर राज्य का हिस्सा था, निर्वाचित विधायी प्रतिनिधित्व प्राप्त था। अलग होने के बाद उसे यह खोना पड़ा। अगर जम्मू और कश्मीर (लद्दाख को छोड़कर) को राज्य का दर्जा बहाल किया जा रहा है, तो लद्दाख के साथ भी भेदभाव नहीं होना चाहिए और उसे भीपूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। यह दावा कि लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा पर्याप्त है, लोकतांत्रिक सिद्धांतों का अपमान करता है और उसको मनमाने केंद्रीय निर्णयों की दया के भरोसे छोड़ देता है।
 
राज्य के दर्जे के साथ-साथ, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए लद्दाख में भी पेसा अधिनियम, 1996 जैसा ही एक कानून लागू किया जाना चाहिए। अन्यथा, जैसा कि असम के कुछ हिस्सों में देखा गया है, छठी अनुसूची के तहत भी भूमि और संसाधन कॉर्पोरेट मित्रों को आवंटित किए जा सकते हैं।
 
पार्टी छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितों की उपेक्षा रोकने के लिए न्यूनतम 3-5 सांसदों का संसदीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी मांग करती है। इसके लिए संसद में एक संवैधानिक संशोधन पेश किया जाना चाहिए।
 
पार्टी आगाह करती है कि लद्दाख के साथ अन्याय, सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण और संघीय भावना के क्षरण में भारत के लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे हैं।
 
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (भारत)
मो: 9934443337
Exit mobile version