सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ‘विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक’ का कड़ा विरोध करती है और इसे संविधान, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद तथा कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विरुद्ध बताती है। पार्टी का कहना है कि यह विधेयक वास्तविक विकास का कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि केंद्रीकरण और एक राजनीतिक-वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
पार्टी के अनुसार, आकर्षक नारों और प्रतीकों के सहारे बेरोज़गारी, महंगाई, कृषि संकट तथा शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति जैसे मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की प्रमुख आपत्तियाँ इस प्रकार हैं—
- राज्यों की उपेक्षा: नीति निर्माण में राज्यों की बराबर भागीदारी नहीं; उन्हें केवल क्रियान्वयन एजेंसियों तक सीमित किया गया है।
- केंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया: कार्यक्रम, प्राथमिकताएँ और व्यय केंद्र द्वारा तय, स्थानीय आवश्यकताओं व क्षेत्रीय विविधता की अनदेखी।
- केंद्र की वित्तीय जिम्मेदारी में कटौती: केंद्र का अंश 90% से घटाकर 60% करना संघीय ढांचे पर सीधा हमला है और संसाधन-वंचित व विपक्ष-शासित राज्यों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन कठिन बनाता है।
- हिमालयी और अन्य राज्यों के बीच भेदभाव: ग्रामीण बेरोज़गार गरीबों के साथ समान व्यवहार नहीं।
- शर्तयुक्त अनुदान को दबाव के औज़ार के रूप में उपयोग: विशेषकर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा राज्यों पर राजनीतिक नियंत्रण थोपने की प्रवृत्ति।
- स्थानीय स्वशासन की उपेक्षा: पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका अस्पष्ट।
- कल्याणकारी राज्य से पीछे हटना: अधिकार-आधारित योजनाओं की जगह प्रतीकात्मक व घोषणात्मक प्रावधान।
- चरम बोआई-कटाई मौसम में 60 दिनों का “नो-वर्क” प्रावधान।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मांग करती है कि इस विधेयक को वर्तमान रूप में वापस लिया जाए, राज्यों के साथ सार्थक परामर्श किया जाए, केंद्र की 90% वित्तीय जिम्मेदारी बहाल की जाए, हिमालयी सहित सभी राज्यों को समान व्यवहार मिले और संघवाद, सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337

