क्रिसमस के पावन अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में हिन्दुत्ववादी संगठनों द्वारा ईसाई समुदाय के चर्चों पर हमले, प्रार्थनाओं में बाधा तथा श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) कड़े शब्दों में निंदा करती है।
यह घटनाएँ अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला हैं। संविधान द्वारा प्रदत्त पूजा करने, अपने धर्म का पालन करने और उसे प्रचारित करने के अधिकारों को खुलेआम कुचला जा रहा है, जो एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

क्रिसमस प्रेम, शांति और भाईचारे का पर्व है, लेकिन ऐसे अवसर पर नफरत और हिंसा फैलाकर देश के सामाजिक सौहार्द को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इन घटनाओं के कारण विश्व में एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में भारत की छवि धूमिल हो रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा के लिए भी गंभीर विषय है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का आरोप है कि जहाँ ऐसे सांप्रदायिक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहाँ कई भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य सरकारों द्वारा उन्हें मौन या प्रत्यक्ष संरक्षण दिया जा रहा है। यही संरक्षण इन तत्वों का मनोबल बढ़ा रहा है और अल्पसंख्यक समुदायों को असुरक्षित बना रहा है।
पार्टी मांग करती है कि चर्चों और ईसाई समुदाय पर हुए सभी हमलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कर दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और धार्मिक पर्वों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए जाएँ और नफरत फैलाने वाले संगठनों तथा उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त संवैधानिक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) सभी नागरिकों से शांति, भाईचारे और संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील करती है तथा पीड़ित ईसाई समुदाय के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करती है।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता , सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337