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भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा अब छेड़ा जा रहा है अपनी -अपनी ढपली और अपना -अपना राग

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भोपाल। राजनीति के वियाबान में अपनी -अपनी मंजिल की तलाश कर रहे भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा अब अपनी -अपनी ढपली और अपना -अपना राग छेड़ा जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में डेढ़ दशक से अधिक समय से सरकार रहने के बाद अब इन नेताओं को राजधानी भोपाल और उसके आसपास के इलाकों के नए सिरे से नामकरण की याद आने लगी है। यह वे नेता है जो लंबे समय से सत्ता में भागीदार रहे हैं। अचानक इस तरह की मांगों में आयी तेजी की वजह से अब राजनैतिक निहितार्थ भी तलाशे जाने शुरू हो गए हैं। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से लेकर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा तक शामिल हैं।
अगर इस मामले की सूची देखें तो धीरे-धीरे वह लंबी होती जा रही है। यह बात अलग है कि इन नेताओं के द्वारा विभिन्न स्थानों के नाम परिवर्तन को लेकर उठाई जा रही मांगों पर सूबे के मुखिया की चुप्पी के अपने ही अलग मायने निकाले जा रहे हैं। इस तरह की मांग की शुरूआत शर्मा द्वारा की गई थी। उनके द्वारा भोपाल के ईदगाह हिल्स इलाके का नाम बदलकर नानक टेकड़ी करने की मांग की जा चुकी है। शर्मा का कहना है कि मैंने समाचार पत्र में पढ़ा कि 500 साल पहले ईदगाह टेकरी पर सिखों के पहले गुरु नानक देव जी आए थे।
इसलिए इसका नाम गुरु नानक टेकड़ी ही किया जाना चाहिए। शर्मा का कहना है कि अगर 500 साल पहले गुरु नानक देव वहां आए थे, तब वहां ईदगाह नहीं थी। उन्होंने कहा कि पिता का नाम है तो पिता का नाम ही बताएंगे ना, वल्दियत थोड़ी बदल दी जाती है। 500 साल पहले गुरु नानक के आने के पहले टेकड़ी पर क्या था, कोई बता सकता है क्या? जंगल में नानक जी आए इसीलिए उसे ईदगाह ना कहके गुरु नानक टेकड़ी कहा जाए। गुरु नानक पहले भोपाल आए थे तो भोपाल की धरती पवित्र हुई। उनका कहना है कि जिस जगह का जो प्राचीन नाम है, उसे उसी नाम से ही पुकारा जाएगा। उनका तो यहां तक कहना है कि जो इस पर राजनीति कर रहा है, वह मूर्ख है, उसको अकल नहीं है। होशंगाबाद को भी नर्मदापुरम कहते हैं। जिसके नाम पर इस जिले का नाम रखा गया है, वह होशंग शाह लुटेरा था, लुटेरे के नाम से तो नगर नहीं बसेगा ना। उन्होंने कहा कि लुटेरे की इज्जत करनी है या शहीदों का सम्मान करना है?
उमा को मिला सांसद प्रज्ञा का समर्थन
हलाली डेम का नाम बदलने की उमा भारती की मांग को भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का समर्थन मिल गया है। सांसद का भी इस मामले में कहना है कि हलाली डैम हिंदुओं के हलाल होने की याद दिलाता है। उन्होंने इसके साथ ही लालघाटी और इस्लाम नगर आदि के नाम बदलने की भी मांग की है। उधर इस मामले में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग भी लाल घाटी का नाम बदलने की मांग कर चुके हैं।
उमा चाहती है हलाली का नाम बदले
सूबे की पूर्व मुखिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती भोपाल के समीप स्थित हलाली डैम के नाम में बदलाव चाहती हैं। उन्होंने इसके लिए स्थानीय भाजपा विधायक विधायक विष्णु खत्री को एक चिट्ठी भी लिखी है। सुत्री भारती ने इस चिट्ठी में हलाली शब्द को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए कई अहम बातें लिखी हैं। चिट्ठी में लिखा है कि आपके विधानसभा क्षेत्र बैरसिया में एक चर्चित स्थल हलाली डैम का नाम बार-बार आता है। जबकि मेरी जानकारी के अनुसार उसका नाम बदल चुका है। भोपाल शहर के बाहर प्रचलित हलाली नाम का स्थान एवं नदी विश्वासघात की उस कहानी की याद दिलाती है जिसमें दोस्त मोहम्मद खां ने भोपाल के आसपास के अपने मित्र राजाओं को बुलाकर उन्हें धोखा देकर उनका सामूहिक कत्ल किया था। उनके कत्ल से नदी लाल हो गई थी। हलाली शब्द हलाली स्थान उसी प्रसंग का स्मरण कराता है।
मांग का विरोध
भोपाल में ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरुनानक टेकड़ी करने की मांग पर मुस्लिम समाज के साथ-साथ कांग्रेस भी सवाल उठा रही है। उनका आरोप है कि बीजेपी के नेता एक धर्म विशेष को टारगेट कर अपनी राजनीति चमकाते हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की मांग बीजेपी के नेता जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उठा रहे हैं।
हलाली यानि विश्वासघात, धोखाधड़ी, अमानवीयता
उमा ने चिट्ठी में लिखा कि विश्वासघात, धोखाधड़ी, अमानवीयता यह सब एक साथ हलाली शब्द के साथ आते हैं, तो हलाली का इतिहास जानने वालों के अंदर घृणा का संचार होता है। मैंने सुना है कि उसको एक पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है क्योंकि वहां डैम है, नदी है। यह एक बहुत अच्छी बात है। किंतु आप तुरंत संस्कृति एवं पर्यटन विभाग से संपर्क करके घृणा पैदा करने वाले इस नाम का उल्लेख बंद करवा दीजिए। आप इस संबंध में पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर से मिलकर भी बात कर सकते हैं। मैं भी इस पत्र की एक कॉपी उनको भेज दूंगी।
झा भी कर चुके हैं स्टेशन का नाम बदलने की मांग
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर अटल जंक्शन करने की मांग चुके हैं। इसके लिए उनके द्वारा रेल मंत्री को भी एक आग्रह पत्र दिया जा चुका है।
प्रमाण और तथ्यों के आधार पर ही बदले जाएंगे नाम
प्रदेश की पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर ने प्रमाण और तथ्यों के आधार पर ही ऐतिहासिक धरोहरों के नाम बदलने की बात कही है। उनका पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के हलाली डैम का नाम बदले जाने के पत्र पर कहना है कि उमा भारती के पत्र पर विभाग फैसला लेगा।

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