मामला मुलताई नगरपालिका में जल आवर्धन योजना का
भोपाल। काम किसी ने किया और उसका भुगतान किसी और को कर दिया गया। भुगतान भी थोड़ा बहुत नहीं बल्कि आठ करोड़ रुपए का किया गया है। यह पूरा खेल नगरीय विकास विभाग और जल संसाधन विभाग के अफसरों ने मिलकर एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए खेला है। यह मामला बैतूल जिले की मुलताई नगरपालिका में जल आवर्धन योजना में किया गया है। खास बात यह है कि यह मामला विधानसभा में उठ चुका है, लेकिन अफसरों ने सरकार को वहां भी गलत जानकारी दे डाली। दरअसल यह पूरा मामला नगरपालिका की हरदोली बांध जल आवर्धन योजना का है। यहां पर यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत एक फर्म को ठेका देने के बाद नपा अधिकारियों ने उससे डिजाइन एप्रूव करवाकर उसे वर्क आर्डर जारी कर दिया था, लेकिन इसके बाद अचानक से अफसरों ने मिलकर अपनी एक चहेती कंपनी को दिलाने के लिए उसका ठेका निरस्त करते हुए चहेती कंपनी को यह काम दे दिया। इसके बाद पुराने ठेके वाली कंपनी की स्वीकृत हो चुकी डिजाइन को नए ठेकेदार की बताकर उसका भुगतान कर दिया गया। गौरतलब है कि पहले यह काम नियमानुसार टेंडर के जरिए मेसर्स एसके लोखंडे की फर्म को मिला था। उनके द्वारा तैयार की गई डिजाइन को नगरपालिका द्वारा नगरीय विकास संचालनालय से एप्रूव कराया और बाद में उसमें कमी बताकर लोखंडे की फर्म को नोटिस दिया और फिर यही काम टेंडर बुलाकर एससी नागपाल की फर्म को दे दिया गया। इसमें भी खास बात यह है कि जल संसाधन विभाग ने भी पुरानी फर्म के डिजाइन को मंजूरी दी थी। इसमें भी खास बात यह है कि सीएमओ मुलताई द्वारा पहली फर्म की डिजाइन के आधार पर ही दूसरी नागपाल की फर्म को आठ करोड़ 64 लाख का भुगतान भी कर दिया गया। यही नहीं नई कंपनी की डिजाइन मंजूर होने से ही पहले नागपाल की कंपनी को राशि का भुगतान तक कर दिया गया। दस्तावेजों के मुताबिक ठेकेदारों ने नागपाल की फर्म से जो एग्रीमेंट किया है, उसमें ठेकेदार के हस्ताक्षर नहीं हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार में निकाले गए दस्तावेजों में सामने आई गई है।
दो साल से कई बार विस में उठ चुका है मामला
इस गड़बड़ घोटाले को बीते दो सालों से लगातार विधानसभा में उठाया जा रहा है। हाल ही में समाप्त हुए सत्र में भी इस मामले को विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाया गया है। अफसरों ने इस पर सरकार को गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह करने का काम किया है। सदन में जानकारी दी गई वह सूचना के अधिकार में दी गई जानकारी से भिन्न है। अब इस मामले में विधायक सुनील उइके ने भी सरकार से कार्रवाई की मांग की है।
