मध्यप्रदेश के वसीम खान ने मजदूरी से उद्यमिता की राह चुनी. उन्होंने अपने पावरलूम को सोलर एनर्जी से चलाना शुरू किया, जिससे उनका मासिक बिजली खर्च शून्य हो गया.
बुरहानपुर. अक्सर आपने सुना होगा कि पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी मिलती हैं और व्यवसाय करने में वह सफल होते हैं, लेकिन आज हम आप को ऐसे उद्योगपति सेठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कभी दूसरों के यहां पर मजदूरी करते थे, लेकिन आज स्वयं सेठ बन गए हैं. मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के लालबाग में रहने वाले वसीम खान कक्षा 12वीं तक पढ़े हुए हैं. कभी दूसरों के यहां मजदूरी करते थे, लेकिन अब वह कारखाना संचालित कर दो लोगों को रोजगार दे रहा हैं, जिससे उसकी लाखों रुपए की कमाई भी हो रही है. अब उन्हें एक ओर नवाचार किया है. अभी तक आपने सोलर पैनल से घर की बिजली का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा और सुना होगा मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में अब युवा सोलर पैनल से पावर लूम कारखाने का संचालन कर रहे हैं. लालबाग क्षेत्र में रहने वाले वसीम खान ने जानकारी देते हुए बताया कि चार पावर लूम का कारखाना में सोलर पैनल से संचालित कर रहा हूं. मैंने यूट्यूब के माध्यम से देखा और निजी कंपनी से सोलर पैनल लगाया उसके बाद अब चार पावरलूम 17 घंटे तक चल जाते हैं. पहले मुझे 4000 से 5000 रुपए महीने का बिल लता था, लेकिन अब कोई भी बिल नहीं भरना पड़ता है. वसीम खान का कहना है कि मैं कक्षा 12वीं तक पढ़ा हूं मैं पावरलूम कारखाना संचालित कर दो लोगों को रोजगार भी दे रहा हूं.
युवक ने दी जानकारी
जब वसीम खान से बात की तो उन्होंने बताया कि मैं कक्षा 12वीं तक पढ़ा हुआ हूं. मैं भी दूसरों के यहां पर पावर लूम चलाने का काम करता था. यह मेरे दिमाग में आइडिया आया, मैंने अपने घर परिवार के लोगों को बताया पूरे परिवार ने मुझे सहयोग किया मैंने सोलर प्लांट पांच लाख रुपए का लगाया. इसमें ₹300000 की सब्सिडी भी मुझे प्राप्त हुई है. उसके माध्यम से मेरे यहां पर अब पावरलूम का संचालन हो रहा है, जिससे मेरी बिजली की बचत हो रही है बिजली की यदि बात करें हर महा की, तो पांच से ₹6000 तक बिल आता है. लेकिन इसमें कोई भी बिल नहीं भरना है.
परिवार करता है सहयोग
वसीम के यदि परिवार की बात करें तो उसके पिता भी पावरलूम चलाते थे. पिता भी पावरलूम चलाने में उसकी मदद करते हैं. जिससे अब वसीम को रोजगार भी मिलना शुरू हो गया है. जिससे उसकी हर साल लाखों रुपए की कमाई हो रही है. ढाई साल पहले उसने यह नया सिस्टम लगाया है.

