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सोनम वांगचुक देश के लिए खतरा, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने NSA को बताया सही

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 केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने का बचाव किया, और तर्क दिया कि उनके बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा थे. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके “ज़हर फैलाने” की इजाज़त नहीं दी जा सकती, खासकर लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में, जो देश की रक्षा और सीमा पर तैनात सेनाओं के लिए सप्लाई चेन के लिए बहुत ज़रूरी है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस इलाके को ठप होने से रोकना बहुत ज़रूरी है.

केंद्र सरकार ने वांगचुक के उन बयानों पर सवाल उठाया जिनमें उन्होंने दावा किया था कि हर इलाके को यह तय करने का अधिकार है कि वह किससे संबंधित है और उन्होंने जनमत संग्रह और रेफरेंडम की वकालत की थी. मेहता ने पूछा कि क्या ऐसे बयान NSA लगाने के लिए सही मामला नहीं बनाते?

 सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। लेह को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, जिससे हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हो गए थे मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तारी के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो द्वारा दायर याचिका में उनकी गिरफ्तारी को ‘असंवैधानिक’ और ‘दमनकारी’ बताया गया है। बता दें कि वांगचुक को तब गिरफ्तार किया गया जब वे लद्दाख की मांगों को लेकर ‘दिल्ली चलो’ पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे।

‘दिल्ली चलो’ मार्च के दौरान हुए थे गिरफ्तार

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। लेह को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, जिससे हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हो गए थे।

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