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सिर्फ गरीबों के साथ छलावा!..प्रशासनिक बयान सीएम की मंशा पर भी लगा रहे सवालिया निशान….

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मुद्दा: सराय की उजाड़ी झुग्गी-झोपड़ी बस्ती

कटनी। शहर केे बल्लभदास अग्रवाल वार्ड सराय मोहल्ला झुग्गी-झोपड़ी बस्ती की बसाहट आबादी नजूल भूमि पर है। वर्ष 1984 व 1998 में राज्य शासन द्वारा काबिज कब्जेधारियों को भू-अधिकार पत्र (पट्टा) आवंटित किए गए हैं। दीगर, बाद के शेष बचे कुछ काबिज कब्जाधारियों को भी मौजूदा भाजपा सरकार ने जल्द भू-अधिकार पत्र बांटे जाने का आश्वासन दिया है। इस पर अमल करते हुए सर्वेक्षण कराए जाने की बजाय बीते दिनों पूरी बस्ती जमींदोज कर दी गई। जिसके पीछे जिम्मेदार अधिकारी अपने बयान में पूर्व में आवंटित हुए तमाम भू-पट्टा फर्जी बताकर जमीन पर चर्च का मालिकाना हक बता रहे हैं। मसलन, अब यह बहस भी शुरु हो गई है कि क्या मध्यप्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस व मौजूदा भाजपा सरकार ने गरीबों के साथ सिर्फ छलावा किया? अलावा चर्च संगठन का भूमि पर स्वामित्व दिलाने प्रशासन ने जिम्मा ले लिया हैै?
बीते 35-40 वर्षों में जिला प्रशासन का ऐसा कोई अधिकारिक बयान जाहिर नहीं हुआ है, जिसमें जारी हुए भू-अधिकार पत्र फर्जी करार दिए गए हों। ऐसा लगता है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सीएम शिवराज सिंह चैहान को अपनी नई पदस्थापना से खुश करने की कोशिश में बिना तथ्य जुटाए, कार्ययोजना के आनन-फानन में पूरी गरीब बस्ती उजाड दी।
बवाल मचते अब येनकेन प्रकारेण मीडिया को भी साधने का प्रयास हो रहा है। जबकि जिला मुख्यालय की सबसे पुरानी इस गरीब बस्ती में राज्य शासन द्वारा मुहैया करायीं जा रहीं तमाम बुनियादी सुविधाओं के बीच प्रभावित परिवार गरीबी में निवास एवं जीवनयापन करते चले आ रहे हैं। इनमें कुछ तो भीख मांगकर अपना परिवार पाल रहे हैं। बताते हैं, पट्टाधारियों को आयुक्त नगर पालिक निगम मुड़वारा (कटनी) का कर निर्धारण विभाग बकायदा नोटिस जारी कर निर्धारण एवं वार्षिक किराया भी वसूलता रहा। फिर भी गरीबों को कसूरवार ठहराते हुए उनकी टपरियों को तहस-नहस कर कड़कड़ाती ठंड में उन्हें बेघर कर दिया गया। आखिर कौन लेगा बेसहारों की सुध?
क्या इन्हें इंसानों की तरह रहने का हक नहीं?
उनका हक है कि वे चैन के साथ रह सकें। सालों से उस जमीन पर जिस पर उनका घर है।संवेदनशीलता के नये आयाम के तहत तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने काबिज गरीब भूमिहीनों को जमीन के पट्टे दिए।मौजूदा भाजपा सरकार की मंशा भी कुछ यूं ही है, झुग्गी बस्तियों में अब कोई किरायेदार नहीं। जो जहां रहता है अब वही उसका मालिक। किसी की धौंस-धपट नहीं- किसी की दादागिरी नहीं।
ये पट्टा सिर्फ जमीन का नहीं, उस सुकून का है जिनका हक है हर इंसान को।पट्टा आवंटित किए जाने से बस्ती अधोसंरचना विकास कार्यों में कोई बाधा की संभावना नहीं थी और न ही काबिज पट्टाधारियों के रहवास से किसी को आपत्ति रही।

कटनी से हरिशंकर पाराशर

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