मध्य प्रदेश के हरदा जिले के राम सोलंकी ने दूसरी बार एमपीपीएससी क्रैक की है. उनको मुख्य परीक्षा में कुल 768 नंबर मिले है. फिलहाल वे आगर मालवा जिले के उद्योग विभाग सहायक संचालक के रूप में पदस्थ हैं
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने शनिवार को राज्य सेवा परीक्षा 2022 का आखिरी रिजल्ट जारी किया. इसमें हरदा जिले के सोडलपुर गांव के राम सोलंकी का भी सिलेक्शन हो गया है. राम सोलंकी का MPPSC में दूसरी बार चयनत हुआ है. उनको जिला कोषालय अधिकारी/ जिला शिक्षा अधिकारी के तौर पर पोस्टिंग मिलेगी. उनको मुख्य परीक्षा में कुल 768 नंबर मिले है तो वहीं टॉपर दीपिका को मुख्य परीक्षा में 756 नंबर मिले. इंटरव्यू में कम नंबर मिलने से वे पिछड़ गए. राम सोलंकी 2019 की MP PSC परीक्षा में चयनित हो चुके हैं. फिलहाल वे आगर मालवा जिले के उद्योग विभाग सहायक संचालक के रूप में पदस्थ हैं. राम सोलंकी MP PSC 2019 के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु अधिकारी भी रह चुके हैं.

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा परिक्षा 2022 के परिणाम घोषित किए. इसमें हरदा जिले के सोडलपूर गांव में रहने वाले जगदीश सोलंकी के बेटे राम सोलंकी का चयन दूसरी बार एमपीपीएससी में हुआ. राम सोलंकी ने पहले प्रयास में MP PSC 2019 परीक्षा पास की थी.
बेहद साधारण परिवार से आने वाले राम के पिता सोडलपूर गांव के कान्हा बाबा चौक पर सब्जी का ठेला लगाते हैं. 10 और 12 कक्षा की परीक्षा में 90 फीसदी से ज्यादा नंबर लाने वाले राम पिता के साथ ही सब्जी बेचते थे. राम सोलंकी यूपीएससी की कोचिंग करने के लिए टीमरनी तहसील में यूनियन बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन बैंक मैनेजर मंगेश सोलंकी ने कहा कि कोचिंग के लिए लोन नहीं दिया जाता. इससे मायूस होकर राम सोलंकी पिता की सब्जी दुकान पर बेठेते थे.
एक दिन बैंक मैनेजर मंगेश आए और कहा कि अगर वो आगे पढ़ना चाहते हैं तो वे आर्थिक मदद देंगे. उन्होंने राम सोलंकी की प्रतिभा की परीक्षा ली. कुछ नोट्स देकर कहा कि वे 3 दिन में इसे याद करके दिखाएं. राम ने इसे कर दिखाया. उसके बाद बैंक मेनेजर मंगेश सोलंकी की मदद से वे इंदौर गए. उन्होंने बिना कोचिंग के कमरा किराए पर लेकर पढ़ाई की. फिर 2019 में राज्य सेवा की परीक्षा दी थी. उनका इंटरव्यू 2022 में हुआ और अब 2023 में वे एमपीपीएससी 2019 में सिलेक्ट हो गए है. राम उद्योग विभाग में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ हैं. उन्होंने बताया कि वे आगे और पढ़ेंगे. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है.