बीजिंग में आज से चीन की संसद की सालाना बैठक शुरू हो रही है। इस बैठक में देशभर के 5 हजार से ज्यादा प्रतिनिधि जुटने वाले हैं। इसमें चीन अपनी आगे की योजनाएं और लक्ष्य तय करता है। इस बार चीन 2021 के लिए अपने लक्ष्यों की घोषणा करेगा। साथ ही आर्थिक विकास की पंचवर्षीय योजना को भी मंजूरी देगा।
बैठक के दौरान पिछले साल भारतीय सेना से सीमा पर हुए तनाव को लेकर भी चर्चा होगी। कहा जा रहा है बैठक में आगे की तैयारी के लिए कुछ अहम फैसले हो सकते हैं। सालाना बैठक के दौरान दो तरह की मीटिंग होती है। पहली- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) और दूसरी- चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) की मीटिंग।
भारत के सीमावर्ती इलाकों में एडवांस ड्रोन तैनात करने पर भी चर्चा संभव
NPC में भारत के सीमावर्ती इलाकों में एडवांस ड्रोन्स की तैनाती के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। पिछले साल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीनी सेनाओं के बीच तनाव को देखते हुए ये अहम माना जा रहा है। इस प्रस्ताव को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना के प्रतिनिधियों में से एक ने बनाया है।
तिब्बत मिलिट्री कमांड में बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट के कमांडर हाउ यून ने सरकारी मीडिया को बताया कि वह प्रस्ताव दे रहे हैं। चीन को अपने सीमा प्रबंधन को बढ़ाना चाहिए और ड्रोन्स जैसे स्मार्ट उपकरणों की तैनाती करनी चाहिए। मिलिट्री में इस तरह के उपकरणों के व्यापक इस्तेमाल के बाद भी उसका अनुभव और रिसर्च बताता है कि सुधार की गुंजाइश है।
ये मीटिंग किसलिए होती है?
चीन की सत्ता पर काबिज कम्युनिस्ट पार्टी कई मेजर पॉलिसीज और पर्सनल चेंज का ऐलान NPC में करती है। आज से शुरू हो रही ये बैठक एक हफ्ते चलेगी। पिछले साल NPC में हॉन्गकॉन्ग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन्फोर्स मैकेनिजम प्लान से जुड़े बिल पास करने का ऐलान किया था। पर कभी-कभी पार्टी लाइन से बाहर जाकर कुछ प्रतिनिधि भ्रष्टाचार और अपराधों पर अपना गुस्सा जाहिर करते रहे हैं। हालांकि, ये ज्यादातर एक रबर-स्टैंप पार्लियामेंट की तरह है। जहां कम्युनिस्ट पार्टी की फैसलों पर मुहर लगती है।
चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) एक सेरेमोनियल एडवाइजरी बॉडी है, जिसकी बैठकें साथ-साथ चलती हैं। इन दोनों कार्यक्रमों में कुल मिलाकर 5,000 प्रतिनिधि भाग लेंगे। कोरोना के कारण इस बार कड़े इंतजाम में किए गए हैं। पिछले साल यह बैठक कोरोना महामारी की वजह से मई में हुई थी। 18 वर्ष से ज्यादा के नागरिक तकनीकी रूप से NPC के लिए चुने जाने के पात्र होते हैं। यह चुनाव निचले स्तर के निकायों में वोट्स के जरिए होता है। ज्यादातर प्रतिनिधि स्थानीय स्तर के अधिकारियों द्वारा चुने जाते हैं। प्रीमियर ली केकियांग और सरकार के टॉप डिप्लोमेट, स्टेट काउंसलर वांग यी न्यूज कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हैं।
इस बार की बैठक के एजेंडे में क्या है?
- एजेंडा में कोरोना के दौर में चीन और उसके राज्यों के बजट, देश की अर्थव्यवस्था और 14वें फाइव ईयर प्लान पर चर्चा होगी। चीन के 2021 से 2025 तक आर्थिक और सामाजिक विकास के ब्लूप्रिंट को भी सार्वजनिक किया जाएगा। एनालिस्ट कह रहे हैं कि इस बार विजन ज्यादा ग्रीनर, ज्यादा इनोवेटिव इकोनॉमी का होगा, जिसमें बाहरी दुनिया पर निर्भरता कम से कम होगी।
- इसमें ग्रोथ, पर्यावरणीय संरक्षण, टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट और लिविंग स्टैंडर्ड्स के लक्ष्यों तय किए जाएंगे। इसके सटीक प्लान बाद में जारी होंगे। पूरी अवधि के लिए औसत ग्रोथ टारगेट 5% का रखने की उम्मीद है। रॉयटर्स ने पहले ही रिपोर्ट किया है कि इससे पहले के पांच सालों में औसत ग्रोथ टारगेट 6.5% की रही थी।
- हॉन्गकॉन्ग की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव का भी ऐलान हो सकता है, जिससे चीन का नियंत्रण और बढ़ सके। हालांकि, ये मुद्दा पब्लिक एजेंडा का हिस्सा नहीं है। एक और मुद्दा जिस पर चर्चा हो सकती है, वो है चीन की बर्थ पॉलिसी। हो सकता है कि एक दशक बाद देश के लोगों को एक बच्चे की जगह दो बच्चे पैदा करने की छूट दे दी जाए। चीन की ज्यादातर आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है और इससे जुड़ी डेमोग्राफिक चुनौतियां भी चर्चा में रहेगी।
- सरकार घरेलू खपत बढ़ाने और आत्मनिर्भरता के प्लान को पेश कर सकती है, जो प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के डुअल सर्कुलेशन स्ट्रैटेजी का हिस्सा होगा। एक और प्राथमिकता होगी कार्बन उत्सर्जन कम करने की, जिसके लिए शी जिनपिंग ने 2060 तक चीन को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा है।
वर्क रिपोर्ट में क्या घोषणा होगी?
चीन आमतौर पर GDP ग्रोथ के लक्ष्यों की घोषणा करता है। हालांकि, पिछले साल कोविड-19 की वजह से बने आर्थिक अनिश्चितताओं से भरे माहौल की वजह से ऐसा नहीं हुआ था। पॉलिसी सूत्रों ने बताया कि इस साल भी टारगेट नहीं होगा। इसके बाद भी एनालिस्ट मान रहे हैं कि पिछले साल कोरोनावायरस की वजह से गिरावट दर्ज हुई थी और इस साल 8% तक की मजबूत रिकवरी होगी।
2021 इन्फ्लेशन, रोजगार सृजन, बजट घाटे के टारगेट्स के साथ ही स्थानीय सरकार के बॉन्ड जारी करने के मुद्दे पर सहमति बनने के भी आसार हैं। चीन इसमें रक्षा खर्च में बढ़ोतरी का आकलन भी करता है। पिछले साल ये 6.6% रखा गया था, जो तीन दशकों में से सबसे कम था। घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और ताईवान समेत अन्य पड़ोसियों से बढ़ते तनावों के मद्देनजर कई एनालिस्ट मानते हैं कि इस साल रक्षा खर्च कई गुना बढ़ सकता है।

