Site icon अग्नि आलोक

मालदा में ट्रेनों पर 1 साल में 150 बार पथराव

Share

कोलकाता: भारतीय रेलवे जहां एक ओर वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड परियोजनाओं के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल का मालदा जिला सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. पिछले एक साल के आंकड़ों ने रेलवे बोर्ड की नींद उड़ा दी है. ईस्टर्न रेलवे जोन में पत्थरबाजी की करीब 150 घटनाएं दर्ज की गई हैं. मालदा को अब आधिकारिक तौर पर ‘हॉटस्पॉट’ घोषित कर दिया गया है. इन घटनाओं का सबसे खौफनाक चेहरा 17 जनवरी को दिखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की पहली वंदे भारत स्लीपर को हरी झंडी दिखाए जाने से महज कुछ घंटे पहले ट्रेन पर पथराव किया गया. पश्चिम बंगाल का मालदा जिला ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं का ‘हॉटस्पॉट’ बन गया है. पिछले एक साल में ईस्टर्न रेलवे जोन में पथराव की 150 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 133 लोगों को गिरफ्तार किया गया. हाल ही में वंदे भारत स्लीपर को निशाना बनाए जाने के बाद रेलवे ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है और उपद्रवियों के खिलाफ 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है.

वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर मंडराता खतरा

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अगर ट्रेनों की सुरक्षा इसी तरह दांव पर रही, तो 180 किमी/घंटा या 320 किमी/घंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलाना नामुमकिन होगा. मालदा टाउन स्टेशन के यार्ड में खड़ी वंदे भारत स्लीपर के शीशे टूटना इस बात का गवाह है कि उपद्रवियों के हौसले कितने बुलंद हैं. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने पहले ही स्थानीय पुलिस को संभावित हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा में चूक हुई. केवल मालदा ही नहीं, बल्कि पास के बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) में भी भीड़ द्वारा एनएच-12 जाम करने और रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने की घटनाओं ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया है.

आंकड़ों में आतंक: 12 महीनों में 133 गिरफ्तारियां

ईस्टर्न रेलवे जोन, जिसमें पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के हिस्से आते हैं, वहां पिछले 12 महीनों में 150 पत्थरबाजी की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. इस क्षेत्र से अब तक 133 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अगर राष्ट्रीय स्तर पर देखें, तो जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच पूरे देश में तोड़फोड़ के 1,698 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 665 गिरफ्तारियां हुई हैं. अधिकारियों का मानना है कि मालदा में यह समस्या देश के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में कहीं अधिक गंभीर और केंद्रित है.

जीरो टॉलरेंस और सख्त कानून की तैयारी

‘मालदा के इस खतरे’ (Malda Menace) से निपटने के लिए रेलवे ने अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपना ली है. संवेदनशील इलाकों में हाई-डेफिनिशन और सोलर-पावर्ड कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि पत्थरबाजों की रियल-टाइम पहचान हो सके. आरपीएफ ने जनता को आगाह किया है कि रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत यह एक गंभीर अपराध है. धारा 153 के तहत यात्रियों की जान जोखिम में डालने पर 5 साल की जेल और धारा 154 के तहत लापरवाही से सुरक्षा को खतरा पहुंचाने पर एक साल की कैद या जुर्माना हो सकता है.

बेरोजगारी या सोची-समझी साजिश?

अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाओं के पीछे केवल विरोध प्रदर्शन ही कारण नहीं हैं. कई बार स्थानीय बेरोजगार युवा बिना किसी योजना के ‘मस्ती’ के लिए ट्रेनों पर पत्थर फेंकते हैं, जो बाद में बड़े हादसे का कारण बनता है. हालांकि, कुछ मामलों में प्रवासी मजदूरों के असंतोष और संगठित विरोध की बात भी सामने आई है. इस स्थिति को सुधारने के लिए रेलवे अब पटरियों के किनारे बसे गांवों और स्कूलों में जागरूकता अभियान चला रहा है. रेलवे ने जनता से अपील की है कि वे टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 139 का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें, क्योंकि रेलवे की संपत्ति देश की संपत्ति है.

Exit mobile version