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शिकायतें लटकाने वाले अधिकारी की वेतनवृद्धि रोकी

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इंदौर। जलप्रदाय से संबंधित मामलों की 510 शिकायतों का सौ दिनों के बाद भी निराकरण नहीं होने के मामले को लेकर कल नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) पर गाज गिरी और उन्हें फटकार के साथ-साथ उनकी एक वेतनवृद्धि रोके जाने के निर्देश दिए गए हैं। निगम के अफसरों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी मामलों की शिकायतों का निराकरण लेवल वन और टू पर ही कर लिया जाए।
नगर निगम (Municipal Corporaiton) के कई विभागों के अधिकारियों की लापरवाही के चलते सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) से लेकर कई अन्य मामलों की शिकायतों के मामले में कार्रवाई नहीं होने के चलते रहवासियों का गुस्सा निगम के प्रति बढ़ता जाता है, वहीं दूसरी ओर शिकायतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जाता है। पिछले दिनों कलेक्टर मनीष सिंह (Collector Manish Singh) ने भी निगम अफसरो को पेंडिंग शिकायतों के मामले में फटकार लगाई थी। सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर तीन हजार से ज्यादा शिकायतें उन दिनों पेंडिंग हो गई थीं और कई शिकायतें लेवल थ्री और फोर तक पहुंच गई थीं। इसके बाद निगम ने अभियान चलाकर तेजी से शिकायतों का निराकरण कराने की कार्रवाई शुरू की थी, मगर फिर भी आंकड़ा 1500 से 1700 पर आकर अटक गया था। इनमें सर्वाधिक गंदे पानी, पानी नहीं मिलने की शिकायतों से लेकर चोक ड्रेनेज लाइन (Choke Drainage Line), बैकलाइनों की सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, कब्जे और वार्डों की बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों की रहती हैं। जल यंत्रालय विभाग (Water Engineering Department) की टीमें भी शिकायतों के मामले में लगतारा लापरवाही करती थीं, जिसके चलते गंदा पानी, पानी नहीं मिलने और अत्यधिक बिल आने की शिकायतों के मामले बढ़ते जा रहे थे। ऐसी 510 शिकायतें हो गई थीं, जिनका सौ दिनों में निराकरण नहीं किया। इसके बाद जलप्रदाय और नर्मदा प्रोजेक्ट का काम देखने वाले कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया था और नगर निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने खासी फटकार लगाई। शिकायतों के मामले में लापरवाही को लेकर श्रीवास्तव की एक वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश दिए गए है। इससे पहले भी शिकायतों में लापरवाही पर निगम के ही कुछ अधिकारियों पर जुर्माना भी हो सका।

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