12 साल पहले दिसंबर की एक सर्द सुबह इंदौर का सियागंज इलाका गोलियों की आवाजों, हवा में फैली बारूद की गंध और सड़क पर फैले हम्माल मनोहर वर्मा के खून से दहशत में आ गया था। वर्मा को आधा दर्जन लोगों ने घेरकर गोली मार दी थी। 12 साल बाद इस मामले में जब कोर्ट का फैसला आया, तो पूर्व मंत्री प्रकाश सोनकर के भतीजे कांग्रेस नेता कपिल सोनकर सहित सात आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हत्याकांड में सजा दिलवाने के लिए 38 गवाह कोर्ट में पेश किए गए, लेकिन मृतक मनोहर की पत्नी यशोदा ही कोर्ट में पुलिस को दिए अपने बयान से पलट गई। लेकिन कोर्ट के फैसले पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इतना ही नहीं आरोपियों को बचाने के लिए बचाव पक्ष के वकील ने जो तर्क कोर्ट में दिए, जिसमें पुलिस द्वारा झूठा डाइंग डिक्लेरेशन और मृतक मनोहर की लाश से उस पर अंगूठा लगवाना शामिल थे, कोर्ट में एक-एक कर खारिज हो गए।
जानिए सिलसिलेवार घटना के बाद से लेकर कोर्ट के फैसले की कहानी विशेष लोक अभियोजक विशाल श्रीवास्तव की जुबानी, जो उन्होंने भास्कर को बताई…।
घटना 19 दिसंबर 2011 की है। सियागंज में हम्माली करने वाले मनोहर वर्मा (उम्र 30) को कुछ लोगों ने सुबह 8.30 बजे कैलाश कुटी वेयर हाउस रोड सियागंज पर बुलाया था। मनोहर जैसे ही वहां पहुंचा, उन्होंने उस पर गोली चला दी। उसे सिर, कंधे और पेट में गोली लगी थी। 6 आरोपी अलग-अलग बाइक से आए थे और घटना को अंजाम देने के बाद वे फरार हो गए। वहां से गुजर रहे एक ऑटो वाले ने बीट के पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और मनोहर को गंभीर घायल हालत में एमवाय अस्पताल ले गए। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने हमले के बारे में पूछा, इस पर उसने बताया कि गोली मारने वाले कपिल सोनकर के आदमी थे। उसी के कहने पर उसके लोगों ने मुझे गोली मारी है। कपिल मुझ पर मिलने के लिए बार-बार दबाव बना रहा था। शूटरों ने भी मुझे कपिल से मिलने के लिए साथ चलने को कहा था।
पुलिस मनोहर को लहूलुहान हालत में अस्पताल लेकर पहुंची। उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन गोली लगने के कारण काफी खून बह गया था। 11 बजकर 45 मिनट पर उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। मरने से पहले तत्कालीन तहसीलदार लक्ष्मण सिंह ने उसके बयान दर्ज किए थे। इसमें भी मनोहर ने कपिल सोनकर द्वारा उसकी हत्या करवाने की बात कही थी।
पुलिस ने इन लोगों पर केस दर्ज किया
पुलिस ने मामले में कपिल सोनकर (42) निवासी लुनियापुरा, तनवीर उर्फ नन्नू खान (32) निवासी लुनियापुरा, देवेंद्र चौहान (33) निवासी लुनियापुरा, कालू उर्फ पप्पू चौहान (33) निवासी लुनियापुरा, जयपालसिंह अहिरवार (34) निवासी बड़ी भमोरी, भूपेंद्र उर्फ धर्मेंद्र ठाकुर (40) निवासी ग्राम गजर थाना खुरई जिला सागर, ज्वाला सिंह उर्फ ज्वाला प्रसाद के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी। आरोपी कपिल और ज्वाला सिंह को छोड़कर अन्य सभी शूटर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
आरोपियों ने बताया- कपिल हत्याकांड का मास्टरमाइंड
आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में भी कबूल किया कि उन्होंने कपिल के कहने पर ही मनोहर को गोली मारी थी, लेकिन कपिल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर था। मौके से पुलिस ने पिस्टल की गोली के खाली खोके जब्त किए थे। साथ ही आरोपियों के पास से जब्त मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से कपिल और उनके बीच बातचीत होने की पुष्टि भी हो चुकी थी।
बाद में पुलिस ने कपिल को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से अवैध रूप से रखी पिस्टल भी जब्त हुई। उसके साथी पहले ही कबूल कर चुके थे कि हत्याकांड का मास्टरमाइंड कपिल ही है और उसी के कहने पर उन्होंने मनोहर की जान ली। हत्या की साजिश रचने के साथ ही फंड और हथियार की व्यवस्था भी कपिल ने ही की थी।
विशेष लोक अभियोजक विशाल श्रीवास्तव ने इस हत्याकांड की सिलसिलेवार कहानी बताई।
क्यों की हत्या और कोर्ट में मृतक की पत्नी ने बयान बदलकर क्या कहा ये जान लीजिए…
पुलिस की जांच में ये बात सामने आई कि कपिल और मनोहर के बीच में खड़ी कराई(अवैध वसूली) को लेकर पहले से विवाद चला आ रहा था। इसे लेकर एक यूनियन बनी हुई है, जो सियागंज में आने वाले ट्रकों से वसूली करती है। मृतक मनोहर भी यूनियन का सदस्य था। लेकिन इंदर सोनकर और कपिल सोनकर के बीच वसूली को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। इन दोनों के विवाद में मृतक मनोहर गवाह था, इसलिए कई बार कपिल ने मृतक को मिलने के लिए भी बुलाया लेकिन वो नहीं गया। आखिर में रंजिश के चलते कपिल ने शूटर के माध्यम से उसकी हत्या करवा दी।
मृतक की पत्नी बयान से पलट गई
आरोपियों के अलग-अलग कास्ट के होने के कारण केस एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट में चलाया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए 38 गवाह पेश किए गए लेकिन इनमें से कई गवाहों ने अपने बयान बदल लिए, यानी वो पलट गए। लेकिन कुछ सरकारी गवाह अपने बयान पर कायम रहे, इंदौर से ट्रांसफर हो जाने के बावजूद वे गवाही देने आते रहे। बयान से पलटने वालों में मृतक मनोहर की पत्नी यशोदा भी शामिल है।
इंदौर स्थित जिला कोर्ट में वर्मा की पत्नी ने कहा कि घटना के बारे में उसे कुछ भी जानकारी नहीं है कि कैसे पति की हत्या हुई। बयान बदलने के पीछे डर, दबाव या लालच माना गया।
मनोहर की पत्नी ने पुलिस को दिए बयान में पहले कहा था कि कपिल सोनकर का उसके पति से खड़ी कराई को लेकर विवाद था लेकिन कोर्ट में जब उससे पूछा गया तो वो पलट गई और कहा कि उसे दोनों के बीच विवाद के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं प्रॉसिक्यूशन ने उससे पुलिस में दिए बयान के संबंध में जो भी सवाल किए उसके विपरीत जवाब कोर्ट में दिए। पत्नी ने कहा कि घटना के बारे में उसे कुछ भी जानकारी नहीं है कि कैसे पति की हत्या हुई। इस तरह बयान बदलने के पीछे कारण डर, दबाव या लालच माना गया था।
कपिल सोनकर ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस जॉइन कर ली थी। कपिल इंदौर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का करीबी बताया जाता है।
मामले में कपिल को गिरफ्तारी के कुछ समय बाद जमानत मिल गई थी। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। कपिल पूर्व मंत्री स्वर्गीय प्रकाश सोनकर का भतीजा है। पिछले साल हुए नगर निगम चुनाव में उसने कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव भी लड़ा, हालांकि वह चुनाव हार गया।
बचाव पक्ष के कोर्ट में दिए तर्क एक-एक कर खारिज होते चले गए..
दूसरी तरफ कोर्ट में कपिल को बचाने के लिए उनके वकील की तरफ से काफी कोशिश की गई। लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कपिल को बचाने के लिए वकील ने कोर्ट में ये तर्क दिए कि कपिल को पुलिस ने झूठा फंसाया है, क्योंकि कपिल और इंदर सोनकर के बीच पुरानी दुश्मनी चल रही है। पूर्व में भी एक हत्या का प्रकरण चल चुका है। जिसमें दिनेश नामक युवक की हत्या हुई थी और इंदर सोनकर घायल हुआ था। दोनों गुटों में वर्चस्व की लड़ाई के कारण ये हत्या हुई थी।
ऐसे में कपिल के बचाव में ये तक कहा गया कि पुलिस ने झूठा डाइंग डिक्लरेशन तैयार किया और मनोहर की लाश से अंगूठे लगवा लिए। कोर्ट ने कपिल को बचाने के लिए दिए गए वकील के तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस केस में महत्वपूर्ण बात ये भी मानी है कि जो बात मनोहर ने घायल स्थिति में दोनों पुलिसकर्मियों को बताई वो ही बात उसने अस्पताल में तत्कालीन तहसीलदार लक्ष्मण सिंह को कही।
बचाव पक्ष अपना तर्क साबित नहीं कर पाया कि पुलिस की कपिल से क्या दुश्मनी थी, जो वो उसे झूठा फंसाते। इतना ही नहीं कोर्ट से कम सजा देने की भी गुहार लगाई गई थी। आखिरकार विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), धारा 302 (हत्या) और अन्य संबद्ध प्रावधानों के तहत शुक्रवार, 28 अप्रैल को कपिल सहित सभी आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुना दी, हालांकि आरोपी ज्वाला सिंह अभी भी फरार है। पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जबकि आरोपी भूपेंद्र ठाकुर पहले से ही जेल में है।
सजा सुनाने के बाद हत्याकांड के मास्टरमाइंड कपिल सोनकर को ले जाते पुलिसकर्मी।
क्या होती है खड़ी कराई
खड़ी कराई एक तरह की अवैध वसूली है। बाहर से आने वाली गाड़ियों को बाजार में खड़ा कराने के बदले यह रंगदारी वसूली जाती है। गाड़ी से माल खाली कराने के नाम पर इसे वसूला जाता है। यह हम्माली के अलावा होती है। वर्षों पूर्व इसे अवैध घोषित किया जा चुका है। इंदौर का सियागंज क्षेत्र बड़ा मार्केट है। यहां कई दुकानें हैं और सामान लेकर रोजाना कई ट्रक क्षेत्र में आने के कारण खड़ी कराई के नाम पर वसूली शुरू हुई थी।

