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सुप्रीम कोर्ट की विजय शाह को फटकार: MP सरकार को दिए सख्त निर्देश

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने MP के मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अब माफी स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने राज्य सरकार को केस चलाने की मंजूरी पर 2 हफ्ते में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

भोपाल/ नई दिल्ली.

सुप्रीम कोर्ट की यह हालिया टिप्पणी मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा की गई टिप्पणियों के मामले में केवल “औपचारिक माफी” (procedural apology) कानूनी जवाबदेही से बचने का रास्ता नहीं हो सकती।

इस मामले में CJI सूर्यकांत और पीठ ने कहा कि जब मामला एक गंभीर मोड़ ले चुका हो और जांच आगे बढ़ गई हो, तब “देर से मांगी गई माफी” का कोई अर्थ नहीं रह जाता। अदालत ने इसे केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का एक जरिया माना।  कोर्ट इस बात से नाखुश दिखा कि सरकार ने “मामला कोर्ट में लंबित है” का हवाला देकर केस चलाने की मंजूरी (Sanction for prosecution) पर फैसला रोक रखा था। बता दे विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है।

अगले दो हफ्तों में क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, मध्य प्रदेश सरकार के पास अब 14 दिनों का समय है। इस दौरान सरकार को यह तय करना होगा कि क्या वह अपने ही कैबिनेट मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की आधिकारिक अनुमति देगी। यहां मौजूदा मामले में बता दें मंत्री विजय शाह माफीनामा दाखिल कर चुके हैं, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त माना है। अगले 2 हफ्तों में ‘प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन’ (Prosecution Sanction) पर निर्णय लेना अनिवार्य है। जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

शाह और सरकार के लिए अग्निपरीक्षा

यह मामला न केवल विजय शाह के लिए व्यक्तिगत रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह मध्य प्रदेश सरकार के लिए भी एक ‘अग्निपरीक्षा’ है। यदि सरकार मंजूरी देती है, तो मंत्री को कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ेगा। यदि मंजूरी में देरी होती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt) की श्रेणी में आ सकता है।

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