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*सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच कमेटी बनाए जाने के निर्णय का किया स्वागत* 

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*किसान संघर्ष समिति के जिला पदाधिकारियों की बैठक संपन्न* 

*किसानों के हक की पाई- पाई दिलाएगी किसान संघर्ष समिति*      *-डॉ सुनीलम*

किसान संघर्ष समिति की छिंदवाड़ा जिले के पदाधिकारी की बैठक रामेश्वर यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम एवं प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव विशेष तौर पर उपस्थित रहे। 

बैठक में  माचागोरा बांध परियोजना के विस्थापितों के आदर्श पुनर्वास नीति 2002 के तहत किए गए पुनर्वास का मूल्यांकन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 सदस्यीय कमेटी बनाए जाने का स्वागत किया गया तथा किसानों से बढ़-चढ़कर जांच कमेटी के समक्ष पुनर्वास संबंधी सभी तथ्य प्रस्तुत करने की अपील की।

   बैठक में सर्वोच्च न्यायालय की जांच कमेटी के समक्ष विस्थापित किसानों का पक्ष तैयार करने के लिए विस्थापित किसानों की 10 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई। 

   जिला पदाधिकारियों की बैठक में सभी प्रभावित ग्रामों में किसान संघर्ष समिति की इकाइयां गठित करने, विस्थापित किसानों को दस्तावेज जुटाने में मदद करने, सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी के समक्ष विस्थापित किसानों की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने, 1 – 2 जून 25 को विस्थापित किसानों का बारहविरहारी तथा भूतेरा पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के निर्णय लिए गए।

    बैठक को संबोधित करते हुए किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव सच्चे चंद्रवंशी ने कहा कि किसान संघर्ष समिति ने किसानों के विस्थापन के खिलाफ सतत संघर्ष किया है तथा किसानों के संपूर्ण पुनर्वास के लिए पूरी ताकत लगाई लेकिन पार्टी के नेताओं ने तमाम बधाएं पैदा की, इसके बावजूद भी हमारा संघर्ष जारी है। 

  प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने कहा कि संघर्ष के माध्यम से हम किसानों को जो कुछ दिला पाये वह सर्वविदित है लेकिन अब हम सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से विस्थापित किसानों को अधिकतम लाभ दिलाना चाहते हैं।

   राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम ने कहा कि आजादी के बाद 76 वर्षों में देश में हजारों सिंचाई परियोजनाओं हेतु भूमि अधिग्रहण किया गया। अधिकतम जगहों पर किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष किया लेकिन गिने-चुने संगठन ही विस्थापित किसानों के मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जा पाए ।

    डॉ सुनीलम ने कहा कि एड.आराधना भार्गव, मेधा पाटकर और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय परीख के सामूहिक प्रयासों से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 7 सदस्यीय जांच कमेटी बन सकी है लेकिन अब विस्थापित किसानों पर निर्भर है कि वे कितना लाभ ले पाते हैं। विस्थापित किसान जांच समिति के समक्ष जितने प्रभावशाली तरीके से दस्तावेजी तथ्य और जमीनी स्थिति रख पाएंगे उतना अधिक विस्थापित किसानों को लाभ होगा।

   डॉ सुनीलम ने छिंदवाड़ा में सक्रिय राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे किसानों और जांच कमेटी को गुमराह करने की बजाय किसानों को संकट से उबारने के लिए सहयोग प्रदान करें।

सज्जे चंद्रवंशी

प्रदेश सचिव, किसंस, छिंदवाड़ा

98266 80350

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