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*वह घोषित आपातकाल था आज घोषित आपातकाल है -रघु ठाकुर*

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*इमरजेंसी के जुल्मों को याद करने पर आज भी सिहरन होती है- जटिया*

 इंदौर। इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए इमरजेंसी लगाई थी, वह घोषित आपातकाल था जबकि आज भी सत्ता को बचाए रखने के लिए अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं, लेकिन लोकतंत्र में तानाशाह बनने की कोशिशें  इस देश में ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है । यह विचार समाजवादी चिंतक और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रघु ठाकुर ने लोहिया विचार मंच द्वारा यहां आयोजित आपातकाल की यादें विषय पर बोलते हुए व्यक्त किये।

 कार्यक्रम के विशेष अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया ने कहा कि इमरजेंसी में जिस तरह से लोकतंत्र का गला घोटा गया और जुल्म ढाए गए उन्हें याद कर आज भी सिहरन दौड़ जाती है ।

 अपने उद्बोधन में रघु ठाकुर ने 1974 में जयप्रकाश जी द्वारा चलाए गए आंदोलन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इंदिरा गांधी के खिलाफ दिए गए फैसले और बाद में आपातकाल की यातनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि लोकतंत्र से चुने गए नेता जब अपनी सत्ता पर संकट देखते हैं तो तानाशाह बन जाते हैं । इंदिरा गांधी ने भी वही किया और आज के सत्ताधीश भी वही कर रहे हैं ,लेकिन यह ज्यादा समय नहीं चलता है । जनता ने इंदिरा को भी हटाया था और आज जो तानाशाह बनने की कोशिश में है  उसे भी सबक सिखाएंगे ।

 श्री जटिया ने अपनी कविता मय भाषण शैली में उपस्थित मीसाबंदी और राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मोहित किया । उनका कहना था कि सत्ता किसी भी की दल की हो वह अगर लोगों की बोली पर ताला लगाने की कोशिश करेगी तो उसे जाना होगा । जनता उसे माफ नहीं करेगी ।

अध्यक्षता रामबाबू अग्रवाल ने की जबकि संचालन रामस्वरूप मंत्री ने किया । अतिथियों का स्वागत अशफाक हुसैन, राजेंद्र यादव ,गिरीश शर्मा आदित्य, अजय यादव ,मोहम्मद अली सिद्दीकी, कमल गुप्ता एडवोकेट ,नियामत उल्ला खान, राजेंद्र सचदेव, शफी शेख आदि ने किया । आभार माना सुभाष खंडेलवाल ने । इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सीमा यादव और आदिवासी नेता चंदन सिंह मकवाना का रघु ठाकुर ने सम्मान भी किया ।

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