नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर देश भर में व्यापक विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक नई पीठ बृहस्पतिवार को स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर ‘जल्द से जल्द’ आश्रय स्थलों पर स्थायी रूप से स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे.

जब आवारा कुत्तों से संबंधित एक अन्य मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई के समक्ष 11 अगस्त के फैसले का हवाला देते हुए अपनी याचिका का उल्लेख किया, तो उन्होंने कहा कि वह ‘इस पर गौर करेंगे. जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की पीठ ने 11 अगस्त को कहा था कि कुत्तों के काटने की घटनाओं ने ‘बेहद गंभीर’ स्थिति पैदा कर दी है. इसने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को ‘जल्द से जल्द’ आश्रय स्थलों पर स्थायी रूप से स्थानांतरित करने का आदेश दिया था.
बुधवार को वकील ने जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा मई 2024 में पारित आदेश का हवाला दिया, जिसमें आवारा कुत्तों के मुद्दे से संबंधित याचिकाओं को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया गया था. ‘कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स’ (इंडिया) की याचिका में दावा किया गया कि पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम, 2001 के तहत आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए नियमित नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है.
कौन हैं तीन जज, जो करेंगे आवारा कुत्ते मामले में सुनवाई
जस्टिस विक्रम नाथ अगस्त 2021 से भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हैं. उनका जन्म 24 सितंबर 1962 को उत्तर प्रदेश के कौशांबी में हुआ. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक (1983) और कानून की डिग्री (1986) हासिल की. मार्च 1987 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के साथ उन्होंने अधिवक्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया, और 17 वर्ष प्रैक्टिस के बाद सितंबर 2004 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और फरवरी 2006 में स्थायी न्यायाधीश बने. सितंबर 2019 में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया, जहां वे पहली बार हाईकोर्ट के संचालन को COVID-19 महामारी के दौरान YouTube पर लाइव-स्ट्रीम करने वाले चीफ जस्टिस बने.
जस्टिस संदीप मेहता भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीशों में से एक हैं. उनका जन्म 11 जनवरी 1963 को हुआ. उन्होंने BSc और LLB की डिग्री हासिल की.उन्होंने 8 अगस्त 1986 को राजस्थान बार में वकालत की शुरुआत की और मुख्यतः संवैधानिक व आपराधिक मामलों में विशेषज्ञता हासिल की. जनवरी 2011 में वे राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश और फरवरी 2013 में स्थायी जज बने. 15 फरवरी 2023 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई थी.
जस्टिस निलय विपिनचंद्र अंजारिया, जो 23 मार्च 1965 को अहमदाबाद में जन्मे, गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और कर्नाटक हाईकोर्ट के 34वें मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. उन्होंने एच.एल. कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक, सर एल. ए. शाह लॉ कॉलेज से 1988 में एल.एल.बी. और अहमदाबाद के लॉ यूनिवर्सिटी स्कूल से 1990 में LL.M. की डिग्री हासिल की. जनवरी 2011 में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में गुजरात हाईकोर्ट में नियुक्त हुए और सितंबर 2013 में स्थायी न्यायाधीश बने. इसके बाद, उन्होंने 25 फरवरी 2024 को कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. 26 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी नियुक्ति की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में की, जिसे राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिली और 30 मई 2025 को उन्होंने शपथ ली.
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर क्या आदेश दिया था
शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त के अपने फैसले में यह भी कहा कि समय के साथ कुत्तों के लिए आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ानी होगी. इसने दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छह से आठ सप्ताह के भीतर लगभग 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाना शुरू करें. इसके अलावा, पीठ ने चेतावनी दी कि यदि पुनर्वास अभियान में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न की गई तो किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अदालत अवमानना कार्यवाही भी शुरू कर सकती है.