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महाकाल की दान में मिली जमीन बेचने का प्लान तैयार कर रहा है प्रशासन: भूमि बेचकर उज्जैन में खरीदेंगे नई प्रॉपर्टी

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उज्जैन

अब आम आदमी भी महाकालेश्वर मंदिर की जमीन खरीद सकेगा। उज्जैन जिला प्रशासन इसके लिए प्लान तैयार कर रहा है। असल में श्रद्धालु मंदिर को सोना-चांदी और नकदी के अलावा जमीनें भी दान करते हैं। ये जमीनें उज्जैन जिले के अलावा दूसरे जिलों में भी मौजूद हैं। अब जिला प्रशासन इन जमीनों को बेचकर उज्जैन में ही जमीन खरीदेगा। जल्द ही इस मुद्दे को बैठक में रखा जाएगा। महाकाल को प्रदेशभर में 84.132 बीघा जमीन दान स्वरूप मिली है।

कलेक्टर आशीष सिंह के मुताबिक ये जमीन स्टेट के जमाने से भक्तों ने महाकाल को दान में दी थी। ये जमीनें प्रदेश के उज्जैन, इंदौर, देवास, रतलाम और मंदसौर जिलों में स्थित हैं। हालांकि ऐसा करने में प्रशासन को कई मुश्किलें भी आएंगी। क्योंकि इनमें से कई जमीनों पर अतिक्रमण हो चुका है। वहीं, कुछ जमीनों पर विवाद के बाद कोर्ट में केस चल रहा है। कुछ का राजस्व ही नहीं मिलता। ऐसी जमीनों को चिन्हित कर जल्द ही उन्हें बेचकर उज्जैन में नई जमीन खरीदी जाएगी, जिससे इनका उपयोग मंदिर में होने वाले कार्यों के लिए हो सकेगा।

ये जमीनें हैं मंदिर के पास

जमीनों पर मंदिर समिति का ही कब्जा

उज्जैन के चिंतामन और मंगरोला में दान के रूप में आई जमीन के कुछ हिस्सों पर विवाद होने के बाद कोर्ट में केस चल रहा है। अन्य जिलों में भी यही हालात हैं। अच्छी बात ये है कि जमीनों पर कब्जा मंदिर समिति का ही है।

कलेक्टर ने कहा-मंदिर समिति बना रही प्लान

कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि अन्य जिलों की जमीनों से मंदिर समिति को राजस्व भी नहीं मिल रहा। उज्जैन को छोड़कर देवास, रतलाम, इंदौर सहित मंदसौर की जमीनों को मंदिर समिति बेचने का प्लान तैयार कर रही है। ताकि इससे मिलने वाले पैसों से उज्जैन में एक बड़ी जमीन खरीदी जा सके। जो मंदिर के अन्य क्रियाकलापों के लिए काम आ सकेगी।

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