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कई मायनों में खास होगा बजट:टैरिफ जंग के बीच मोदी सरकार का आक्रामक सुधार एजेंडा

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वैश्विक अर्थव्यवस्था में उच्च अमेरिकी टैरिफ से हड़कंप मचा है। भू-राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे चुनौतीभरे माहौल के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को सुधार आधारित बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट देश की विकास दर को रफ्तार देने वाला होगा। साथ ही, भारत को सुरक्षित निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। बजट-2026 का सीधा संदेश है…आक्रामक सुधार और तेज वृद्धि। रिकॉर्ड नौवीं बार बजट पेश करने जा रहीं वित्त मंत्री निवेश बढ़ाने के लिए इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड की घोषणा कर सकती हैं। यह फंड हरित ऊर्जा, एमएसएमई और युवा कौशल विकास की दिशा बदलने वाला होगा। टैरिफ संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिहाज से मोदी सरकार के लिए यह बजट कई मायनों में खास होगा। अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली का कहना है कि यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते के तुरंत बाद पेश होने वाले बजट में सरकार को जोर सुधारों पर होगा, ताकि जीडीपी की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखने के साथ उसमें और तेजी लाई जा सके। 

दरअसल, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सुधारों के अच्छे परिणाम दिखे हैं। महज एक साल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 73 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़त देखने को मिली है। इस दौरान 47 अरब डॉलर का निवेश भारत आया। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के कारण विनिर्माण और निर्यात में भी 20 फीसदी की वृद्धि हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने 37 फीसदी की छलांग लगाई और पहली बार 4.15 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। स्मार्टफोन निर्यात भी 30 अरब डॉलर के पार है। बजट इन्हीं  सफलताओं को नया आधार देगा।

8.2% की मजबूत दर से बढ़ी थी जीडीपी दूसरी तिमाही में

निवेश के लिए बनेगा रणनीतिक कोष

सुधार के चार स्तंभ

अनुसंधान केंद्र : नवाचार के लिए देशभर में 10 नए उन्नत केंद्र खोले जाएंगे।

स्ट्रैटेजिक फंड : हरित ऊर्जा और स्किलिंग के लिए विशेष निवेश कोष।

डिजिटलीकरण कोष : व्यापार को आसान बनाने के लिए 1,000 करोड़ का समर्पित फंड।

नए बाजार : टैरिफ वॉर के बीच एफटीआई व बीआईआई के जरिये ग्लोबल मार्केट पर नजर।

रक्षा क्षेत्र- सैन्य आधुनिकीकरण पर 20% खर्च बढ़ाने की उम्मीद; ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ

आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण की रणनीतिक सफलता के बाद सरकार इस बार सबसे एक्शन ओरिएंटेड रक्षा बजट पेश करने जा रही है। यह सिर्फ सैन्य आवंटन नहीं, बल्कि भारत की ऑफेंसिव-डिफेंस नीति का आर्थिक घोषणापत्र होगा, जो स्पष्ट करेगा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और सेनाएं भविष्य की किसी भी स्ट्राइक के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में, रक्षा मंत्रालय ने इस बार सैन्य आधुनिकीकरण पर 20 फीसदी अधिक आवंटन का रोडमैप तैयार किया है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के हालिया संकेतों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेनाओं की कुछ तकनीकी कमियां सामने आई हैं। बजट में इन्हें दूर करने के लिए विशेष प्रावधान होंगे। सरकार का ध्यान ऐसे जीपीएस-मुक्त ड्रोन निर्माण पर है, जो दुश्मन की जैमिंग के बावजूद सटीक प्रहार कर सकें। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रौद्योगिकी व ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए मजबूत स्वदेशी ईको-सिस्टम का निर्माण प्राथमिकता होगी।

चार प्राथमिकताएं
स्वदेशी ड्रोन ईको-सिस्टम:
 बिना जीपीएस और जैमिंग-मुक्त ड्रोन निर्माण के लिए फंड।
एंटी-ड्रोन तकनीक: सीमाओं पर स्मार्ट फेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का विस्तार।
डाटा ग्रिड: तीनों सेनाओं को एक ही डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर त्वरित प्रहार की क्षमता।
फ्यूचर वेपन्स: निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) और एआई आधारित रक्षा प्रणाली।

डाटा सेंट्रिसिटी और नेटवर्किंग का साल
सेना ने आने वाले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका असर बजट में दिखेगा, जहां डाटा को एक रणनीतिक संसाधन माना जाएगा। सेंसर, ड्रोन, सैटेलाइट और मैदान में तैनात सैनिकों को एक ही डिजिटल ग्रिड से जोड़ा जाएगा, जिससे कमांडर्स कुछ ही पलों में सटीक निर्णय ले सकें। उन्नत रक्षा प्रणाली पर निवेश बजट का आकर्षण होगा।

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