Site icon अग्नि आलोक

केंद्र सरकार ने कहा- रेमडेसिविर जीवनरक्षक दवा नहीं, फिर भी देश में इसकी जमाखोरी, राजनीति और कालाबाजारी

Share

भारत में दिल्ली-मुंबई से लेकर हर छोटे शहर-कस्बे तक में रेमडेसिविर को लेकर मारामारी है। कहीं राजनीति गरमा रही है तो कहीं लोग ब्लैक में कई गुना ज्यादा पैसा देकर इसे खरीद रहे हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि रेमडेसिविर कोरोना मरीजों के लिए जीवनरक्षक दवा नहीं है, यह गैरजरूरी है और इसके इस्तेमाल से कोई फायदा होगा, इसकी गारंटी नहीं है। यह सब देख सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब कर लिया।

हाईकोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि राज्यों को यह इंजेक्शन किस आधार पर बांटा जा रहा है? महाराष्ट्र में जब देश के 40% कोरोना मरीज हैं तो रेमडेसिविर भी इसी अनुपात में दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भी फटकारा। कोर्ट ने कहा कि जिलों को मनमाने तरीके से रेमडेसिविर का बंटवारा किया जा रहा है।

रेमडेसिविर पर घिरी सरकारें:बॉम्बे HC ने केंद्र से पूछा- महाराष्ट्र में 40% केस तो उतने इंजेक्शन क्यों नहीं?

इससे पहले केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते रेमडेसिविर इंजेक्शन के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा दी थी। दरअसल, इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मामलों में हो रहा है। डॉक्टर भी धड़ल्ले से इसे प्रिस्क्राइब कर रहे हैं और खूब ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। इस समय देश में 7 कंपनियां इस दवा को बना रही हैं, जिनकी हर महीने 39 लाख शीशियां यानी रोज 1.30 लाख डोज बनाने की क्षमता है। जबकि डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।

आइए, समझते हैं कि रेमडेसिविर और इससे जुड़े संकट को?

रेमडेसिविर क्या है?

रेमडेसिविर क्या वाकई इफेक्टिव है?

रेमडेसिविर का संकट अचानक कैसे खड़ा हो गया?

क्या सबको रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत है?

भारत में रेमडेसिविर कितनी कंपनियां बना रही हैं?

Exit mobile version