ग्वालियरजिले की छह विधानसभा की मतदाता सूची की मैपिंग का काम सोमवार को पूरा हो गया। इसकी रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है। शहर की विधानसभा में 15 से 20 फीसदी ही मतदाताओं का मिलाना हुआ है। ग्रामीण में 35 फीसदी। अब पुनरीक्षण के दौरान शहर की 80 फीसदी मतदाताओं को अपनी नागरिकता के दस्तावेज दिखाने होंगे। जबकि गांव में 65 फीसदी मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। पुनरीक्षण कार्यक्रम से पहले राजनीतिक पार्टियों के समक्ष इस डेटा को रखा जा सकता है।
दरअसल प्रदेश में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया जाना है। 22 साल बाद पुनरीक्षण हो रहा है। पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी करने से पहले चुनाव आयोग ने 2003 की मतदाता सूची से 2025 की मतदाता सूची का मिलाना कराय गया। बीएलओ को पुनरीक्षण के लिए सूची दी गई थी। 19 सितंबर तक रिपोर्ट आयोग को भेजना था, लेकिन पुनरीक्षण नहीं हो सका। इसके बाद अधिकारियों ने सख्ती की और बीएलओ को कलेक्ट्रेट में बिठाया गया। उन्होंने मतदाता सूची से मैपिंग की और ऑनलाइन डेटा फीड किया। 2003 में जो मतदाता थे, उनके नाम 2025 में नहीं मिले। ग्वालियर पूर्व विधानसभा 2003 के बाद नई बनी। इस विधानसभा में 15 फीसदी मतदाताओं के नाम मिले। 85 फीसदी नाम का मिलान नहीं हुआ है। ग्वालियर दक्षिण व ग्वालियर विधानसभा में 20 फीसदी वोटर का मिलान हुआ है। जबकि डबरा, भितरवार व ग्वालियर ग्रामीण में 35 फीसदी का आंकड़ा आया है।
ऐसे दिखाने होंगे दस्तावेज
जिन मतदाताओं के नाम 2003 की एसआईआर में शामिल है, उन्हें सिर्फ अपने नाम की पुष्टि करनी होगी। गणक पत्रक भरने होंगे। ऐसे मतदाताओं को कोई दस्तावेज नहीं दिखाना है।- ऐसे मतदाता, जिनके माता-पिता में किसी एक का 1 जनवरी 2003 तक मतदाता सूची में नाम है। उन्हें नामांकन के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिखाना है। भले ही जन्म 1987 के पहले हुआ है। इन्हें सिर्फ माता-पिता का एपिक नंबर बताना होगा।
– ऐसे सभी वोटर जिनका जन्म 1987 के बाद हुआ है। वोटर लिस्ट में नाम 2003 के बाद आया है। उनके माता-पिता का वोटर लिस्ट में कहां नाम था। उन्हें बताना होगा।
– 2003 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिल रहा है और नाम वोटर लिस्ट में आया है। उन्हें नागरिकता के दस्तावेज दिखाने होंगे।

