मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान 6 से 15 अक्टूबर के बीच हो सकता है। इसके साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर तय की है। इसके बाद 10 दिन में कभी भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है।
ऐसे में सरकार के पास चुनावी घोषणाएं और विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन करने के लिए सिर्फ 2 महीने का वक्त है। आचार संहिता के दौरान अधिकांश सरकारी कामों पर अस्थाई रोक लग जाती है। ये वो काम होते हैं, जिनसे सरकार को फायदा होने का अंदेशा होता है।
तो क्या आचार संहिता लगने के बाद 50 हजार नई भर्तियों की प्रक्रिया रुक जाएगी? जिन परीक्षाओं के रिजल्ट आ चुके हैं और जिन पदों के लिए विज्ञापन जारी होना है, उनका क्या होगा? आपके इलाके की सड़क आधी बन गई है, वो पूरी होगी या नहीं?
दैनिक भास्कर ने ऐसे कई सवालों के बीच से छह ऐसे सवाल उठाए हैं, जो हर नागरिक के मन में उठते हैं। इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत से बात की।
1. 50 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्ती का क्या होगा
मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा है कि 43 हजार 640 पदों के परीक्षा परिणाम घोषित कर चुके हैं। 11 हजार 218 पदों के लिए परीक्षा हो चुकी है और परिणाम तैयार हो रहे हैं। 4 हजार 852 पदों पर परीक्षा कराने की प्रक्रिया चल रही है और 23 हजार 16 पदों पर विज्ञापन जारी कर जल्द ही परीक्षा कराई जाएगी। 11 हजार 603 पदों के लिए जल्द विज्ञापन जारी होंगे। इतनी भर्तियां करने के बाद और 50 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी।
जवाब- यह चुनाव आयोग को देखना पड़ेगा कि भर्ती अभी क्यों निकाली जा रही है। इसका आधार है कि भर्ती देर से क्यों निकाली गई। नहीं तो यह माना जाएगा कि जान बूझकर देरी की गई है।
यदि मौजूदा सरकार फिर से सत्ता में नहीं आई तो नई सरकार के सिर मढ़ जाएगा। इस भर्ती को कैंसिल किया जाएगा। यह इलेक्टोरल पॉलिटिक्स है, जिसे चुनाव आयोग भांप लेगा तो इसे रद्द भी कर सकता है। यह आयोग के परीक्षण पर निर्भर करता है कि क्या यह चुनाव में लाभ लेने के लिए तो नहीं किया गया है।
2. मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में डेढ़ लाख रजिस्ट्रेशन
मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना के तहत प्रदेश में एक लाख 50 हजार युवाओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। विभिन्न संस्थाओं और निर्माण एजेंसियों ने पोर्टल में 61 हजार पदों की रिक्तियां दर्ज की हैं। इसमें विद्यार्थी अपनी इच्छा के अनुसार पद का चुनाव पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं।
इस योजना का राज्य स्तरीय कार्यक्रम 13 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। इसमें इंटर्नशिप के दौरान उम्मीदवार को हर महीने 8 हजार रुपए महीने मिलेंगे।
जवाब- यह देखा जाएगा कि क्या योजना पहले से बन गई है? उसका परीक्षण चल रहा है या फिर शुरू हो चुकी है और उसका बजट भी तय है तो उसमें कोई आपत्ति नहीं आएगी। योजना का लाभ मिलता रहेगा, लेकिन उसे बढ़ाकर दो या तीन गुना किया जा रहा है तो इसे चुनाव आयोग रोक देगा।
3. लाड़ली बहना योजना में राशि बढ़ाने का ऐलान
लाड़ली बहना योजना के तहत अभी प्रतिमाह एक हजार रुपए महिला हितग्राही के खाते में ट्रांसफर किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस राशि को 3 हजार रुपए तक बढ़ाया जाएगा।
जवाब- जो योजना पहले से लागू है, वह आचार संहिता लागू होने के बाद भी जारी रहेगी। लाड़ली बहना योजना के तहत जो राशि हितग्राही को दी जा रही है, वह तो दी जा सकती है, लेकिन राशि को बढ़ाया नहीं जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो माना जाएगा कि चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है।
यदि ऐसा किया भी जाता है तो इसका पहले ब्लू प्रिंट सामने आना चाहिए। सरकार को यह भी बताना होगा कि राशि क्यों बढ़ाई जा रही है? यह पहले क्यों नहीं सोचा गया? बाद में यह माना जाएगा कि यह गलत मंशा से किया जा रहा है।
4. चुनाव से ठीक पहले 7 विभागों के लिए 9,453 करोड़ रुपए का बजट जारी
सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सात विभागों को विकास कार्य के लिए 9 हजार 453 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया है। यह बजट जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में खर्च किया जाना है। इसमें सबसे अधिक 2700 करोड़ रुपए पीडब्ल्यूडी को दिया गया है।
शहरी विकास के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग को 900 करोड़ दिए हैं। इसके अलावा जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और उद्योग विभाग को बजट जारी किया गया है।
जवाब- जिन योजनाओं के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया गया है और उनके टेंडर जारी हो चुके हैं, ऐसे काम में कोई दिक्कत नहीं आएगी, लेकिन इस राशि से नई योजना को शुरू नहीं किया जा सकता है।
5. 1 लाख करोड़ के विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन
सरकार ने 16 जुलाई से मध्यप्रदेश में विकास पर्व शुरू किया है। इस दौरान कई प्रोजेक्ट का लोकापर्ण व शिलान्यास किया गया है। अब तक 36348 करोड़ रुपए की 13 सिंचाई, जल जीवन मिशन के अंतर्गत 28,471 करोड़ के 15,450 समूह पेयजल और 21,900 करोड़ रुपए के नेशनल हाईवे और सड़क निर्माण के 1207 कार्यों का भूमि पूजन किया जा चुका है।
जवाब- यह आचार संहिता लागू होते ही बंद हो जाएंगे। हालांकि, सरकार को यह लगता है कि इसका लाभ जनता को मिलना चाहिए तो इसका उद्घाटन ऐसे लोगों से करा सकते हैं, जो राजनीतिक नहीं हैं। उद्घाटन या लोकार्पण सरकारी अधिकारी कर सकते हैं।
6. सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगेगी या जारी रहेंगे
जिन कर्मचारियों को एक ही जगह पर तीन साल या इससे ज्यादा का समय बीत चुका है, चुनाव आयोग ने उनके ट्रांसफर के लिए सरकार को निर्देश दिए हैं। ऐसे कर्मचारियों के तबादलों के लिए आयोग ने 31 जुलाई की समय सीमा तय की थी। इनमें से अभी भी कई कर्मचारियों के ट्रांसफर नहीं हो सके हैं।
जवाब- चुनाव से जुड़े किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का ट्रांसफर बिना चुनाव आयोग की सहमति के नहीं होगा। दरअसल आचार संहिता के बाद ये सभी अधिकारी-कर्मचारी आयोग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ माने जाते हैं। अगर कोई इमरजेंसी है तो सरकार सारे प्रमाण आयोग को भेजेगी और अनुमति लेकर ट्रांसफर कर सकती है।
चालू कामों को नहीं रोक सकती आचार संहिता : ओपी रावत
पूर्व केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि आचार संहिता सरकार के चालू कामों को कतई नहीं रोकती है। मतलब ये है कि जो काम चल रहे हैं, जिनका बजट स्वीकृत है, वे सभी निरंतर जारी रहेंगे।
कोई नए काम जो लोकहितकारी हों, उसकी न तो घोषणा होगी और न ही शुरू किए जा जाएंगे। सरकार कोई वादा भी नहीं कर सकती है। यदि कोई योजना लागू होने की दहलीज पर है और इस बीच आचार संहिता लागू हो जाती है तो सरकार पूरे प्रमाण चुनाव आयोग भेज सकती है कि इस योजना का बजट स्वीकृत है। आगे की प्रक्रिया चल रही है। ऐसी स्थिति में आयोग परीक्षण कर इसे अनुमति भी दे सकती है।

