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अजमेर के पार्षद दिल्ली वालों की तरह भ्रष्ट नहीं सेवाभावी हैं

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एस पी मित्तल, अजमेर

एबीपी न्यूज चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर दिल्ली नगर निगम के सात पार्षदों के भ्रष्टाचार को कैमरे में कैद कर लिया। यह पार्षद निगम से जुड़े कार्यों को करवाने के लिए 20 लाख रुपए तक की रिश्वत की मांग बेशर्मी से करते नजर आए। पार्षदों का कहना रहा कि यदि हमें रिश्वत दे दी गई तो फिर किसी की भी परवाह करने की जरुरत नहीं है। ऐसे भ्रष्ट पार्षदों में भाजपा के चार तथा अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद शामिल हैं। स्टिंग ऑपरेशन के प्रसारण के बाद भाजपा ने अपने पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया है, जबकि आप के पदाधिकारी भी एबीवीपी के स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की जांच कर रहे हैं। भले ही दिल्ली के पार्षदों का भ्रष्टाचार कैमरे में कैद हो गया हो, लेकिन अजमेर के 80 निर्वाचित और 20 मनोनीत पार्षदों में से एक भी भ्रष्टाचारी नहीं है। इन सभी पार्षदों में सेवाभाव कूट कूट कर भरा हुआ है। इनके वार्ड में यदि कोई व्यक्ति निर्माण कार्य करवाता है तो पार्षद महोदय उधर देखते भी नहीं है। निर्माण वेध और या अवैध किसी भी पार्षद को कोई सरोकार नहीं होता है। यदि किसी व्यक्ति को नगर निगम से नक्शा स्वीकृत करवाना होता है तो अजमेर के सेवाभावी पार्षद स्वयं सारी कार्यवाही करते हैं और स्वीकृत होने पर मानचित्र को संबंधित व्यक्ति के घर जाकर देते हैं। पार्षदों की इस सेवा भावना के कारण ही वार्ड के मतदाताओं को किसी भी कार्य के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होते हैं। ईमानदारी ऐसे ही है 120 रुपए लीटर वाला पेट्रोल अपनी कार में भरवा कर वार्ड के एक एक मतदाता की कुशलक्षेम पूछते हैं। वार्ड के सफाई निरीक्षक और जमादार से भी पार्षदों का कोई सरोकार नहीं होता है। निगम प्रशासन जितने सफाई कर्मी लगाता है उतने ही हर दिन वार्ड में सफाई का काम करते हैं। पार्षदों ने अपने वार्ड के जमादार और निरीक्षक को हिदायत दे रखी है कि एक भी सफाई कर्मचारी के नाम पर कोई हेराफेरी नहीं की जाए। पार्षदों की इस ईमानदारी से सफाई जमादार भी कायल हैं। अजमेर में नगर निगम के 60 निर्वाचित पार्षद हैं। जिस सेवा भावना से पार्षद काम कर रहे हैं उसकी वजह से कई पार्षद स्वयं को विधायक पद का दावेदार समझने लगे हैं। पार्षदों का कहना है कि जब हम वार्ड का चुनाव जीत सकते हैं तो फिर विधायक का चुनाव भी जीत लेंगे। विधायक के चुनाव में पैसा खर्च करने की कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि पार्षद बनने के बाद अधिकांश पार्षद 10 लाख से अधिक की कीमत वाली कारों में बैठकर सेवा भाव से काम कर रहे हैं। अजमेर के पार्षदों को इस बात का ताज्जुब हो रहा है कि दिल्ली के पार्षद कितने भ्रष्ट हैं। अजमेर के पार्षद इतनी ईमानदारी से काम कर रहे हैं और दिल्ली दिल्ली के पार्षद 20-20 लाख रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। 

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