पहलगाम आतंकी हमले के बाद हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिलों और पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को अहम दिशा निर्देश जारी किए हैं। जम्मू के साथ लगते बॉर्डर एरिया में अलर्ट को लेकर सीएम ने कहा कि जब ऐसी घटनाएं घटती हैं, तो अलर्ट निश्चित तौर पर होता है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर के साथ लगती सीमाओं पर गतिविधियों को तेज करने को कहा है। सीएम के निर्देश के चलते हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषकर सीमावर्ती जिलों चंबा और कांगड़ा में, जो जम्मू-कश्मीर से लगते हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिलों और पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को अहम दिशा निर्देश जारी किए हैं। जम्मू के साथ लगते बॉर्डर एरिया में अलर्ट को लेकर सीएम ने कहा कि जब ऐसी घटनाएं घटती हैं, तो अलर्ट निश्चित तौर पर होता है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर के साथ लगती सीमाओं पर गतिविधियों को तेज करने को कहा है। सीएम के निर्देश के चलते हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषकर सीमावर्ती जिलों चंबा और कांगड़ा में, जो जम्मू-कश्मीर से लगते हैं। इस हमले के आलोक में पर्यटन को बाधित करने की आशंका को देखते हुए सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी सतर्कता बढ़ाएं। इस बारे में पुलिस मुख्यालय की ओर से भी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें सीमावर्ती चौकियों पर गश्त और तलाशी अभियान तेज करने, प्रवासी मजदूरों व अनजान व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी, पर्यटक स्थलों, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों व धार्मिक स्थलों पर पुलिस की उपस्थिति बढ़ाने के लिए कहा गया है।

क्यूआरटी और एंटी-सैबोटाज दलों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात करने और जिला पुलिस अधीक्षकों को आपातकालीन योजनाओं की समीक्षा करें और सभी सुरक्षा बलों की तत्परता सुनिश्चित करने को कहा गया है। राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने हेतु सभी थाना प्रभारियों को सतर्क रहने और समाज के सभी वर्गों से संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी फील्ड इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय खुफिया सूचनाओं पर सक्रिय प्रतिक्रिया दें और संभावित खतरे की स्थिति में शीघ्र कार्रवाई करें। पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रदेश की जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की सूचना तुरंत 112 डायल करके पुलिस को दें। इसके अलावा अफवाहों से बचें, सतर्क रहें और प्रशासन से सहयोग करें। प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने हेतु सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है।
महाराष्ट्र में स्कूली पढ़ाई के लिए अब हिंदी अनिवार्य भाषा नहीं होगी। राज्य की फडऩवीस सरकार ने हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का निर्णय वापस ले लिया है। शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि मराठी अनिवार्य होगी, अंग्रेजी दूसरी भाषा और तीसरी भाषा ऑप्शनल यानी वैकल्पिक होगी। इससे पहले गत रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने भी कहा था कि छात्र तीसरी भाषा अपने मन से चुन सकेंगे। हिंदी अनिवार्य नहीं होगी।
आपको बता दें कि फैसला वापस लेने से सात दिन पहले यानी गत बुधवार को ही महाराष्ट्र में पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य की गई थी। यह फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी-2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में इन क्लासेज के लिए तीन भाषा की पॉलिसी लागू की गई थी। हालांकि राज ठाकरे की मनसे समेत उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और कई जगह प्रदर्शन भी किए गए थे।
शिमला राज्य सरकार खनिजों के परिवहन के दौरान ट्रांजिट पास के दुरुपयोग से जुड़ी भ्रष्ट गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करेगी। इससे रॉयल्टी में होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को यहां उद्योग विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा फर्जी ट्रांजिट पास राज्य सरकार को खनिजों के परिवहन में भारी रॉयल्टी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पहले नियम 81-ए लागू किया था। इस नियम के अंतर्गत ट्रांजिट पास उपलब्ध न होने की स्थिति में पंचायतों और अन्य कार्य करने वाली एजेंसियों से 80 रुपए प्रति टन की रॉयल्टी और 20 रुपए जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया था। नियम के कार्यान्वयन पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाई गई है और इस मामले पर 25 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश
मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए हर संभव उपाय और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव केके पंत, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता अनूप रतन, सचिव विधि शरद कुमार लगवाल, निदेशक उद्योग डा. यूनुस, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा आदि अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
हक पाने के लिए सीएम से मिले एचएएस अधिकारी
शिमला एचएएस अधिकारियों का एक दल एसोसिएशन के रूप में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिला। बुधवार को हुई इस मुलाकात के दौरान संगठन ने एक सूत्रीय मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उन्होंने कहा है कि एचएएस से आईएएस में प्रोमोशन के लिए बहुत वक्त लग रहा है। आजकल इस प्रोमोशन की औसत अवधि 20 साल हो गई है, इसलिए एचएएस अधिकारियों को वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य सरकार एचएएस के लिए मौजूद डेजिग्नेशन की प्रक्रिया को ही प्रोमोशन बेनिफिट में कन्वर्ट कर दे। ऐसा करने से देरी से इंडक्शन होने का वित्तीय नुकसान इन अधिकारियों को नहीं होगा। संगठन की इस मांग पर मुख्यमंत्री ने विचार करने को कहा और उन्हें सुझाव दिया कि इस बारे में एक लिखित रिप्रेजेंटेशन दे दिया जाए। इसे पहले मुख्य सचिव के स्तर पर समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद आने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला होगा। अधिकारियों ने पिछले वेतन आयोग में पूर्व सरकार के दौरान 10000 ग्रेड पे की मांग रखी थी, जो पूरी नहीं हो पाई थी, लेकिन अब प्रोमोशन चैनल को लेकर नए सिरे से प्रस्ताव देने का फैसला हुआ है।
77 इको टूरिज्म साइट्स निजी हाथों को सौंपेगी सरकार
हिमाचल प्रदेश में सरकार इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम में जुट गई है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने इस वित्त वर्ष के बजट में राज्य में 77 नई इको टूरिज्म साइट्स को निजी लोगों को देने का एलान किया है ताकि पर्यटक प्रदेश जंगलों तक पहुंचे। हिमाचल के प्राकृतिक सौंदर्य का असल मजा यहां के जंगलों में रहने का है और इसके लिए सरकार चाहती है कि ऐसी साइट्स डवलप हों जहां पर पर्यटकों को खूब आनंद मिले। इससे राज्य में एक नया पर्यटन विस्तार होगा। राज्य में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पर टूरिस्ट घूमने के लिए आते हैं। पर्यटन मानचित्र में वो क्षेत्र शामिल हैं और लाखों लोग वहां आते हैं। मगर यहां के जंगलों में सुकून के कुछ पल बीताने की इच्छा रखने वालों के लिए कोई ज्यादा व्यवस्था नहीं है। पूर्व की सरकारों ने भी इस दिशा में प्रयास किए मगर ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई। अब वर्तमान सरकार नई नीतियों के साथ इको टूरिज्म को विकसित करना चाहती है और वन विभाग ने इसपर काम शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के वन विभाग ने राज्य में 77 इको टूरिज्म साइट्स डवलप करने के लिए लोगों से आवेदन मांग लिए हैं। बुधवार से इस प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। प्राइवेट कंपनियां व डेवलपर्स यहां इको टूरिज्म साइट्स ले सकते हैं। अब वन विभाग जल्द ही नई ईको-टूरिज्म साइट्स को चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया आरम्भ करेगा। इसके लिए मंगलवार से आवेदन का दौर शुरू हो गया है और 5 मई तक लोग आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद टेंडर होंगे और आवेदकों से इसमें बिड करवाई जाएगी।
बता दें कि अब तक हिमाचल प्रदेश का वन विभाग 7 ईको-टूरिज्म साईट्स का आबंटन कर चुका है। इसी श्रृंख्ला में हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने अब 77 नई ईको टूरिज्म साइट्स के आबंटन की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। यह 77 साईट्स धर्मशाला, कुल्लू, मण्डी, हमीरपुर, नाहन, बिलासपुर, रामपुर व शिमला वन वृतों में चयनित की गई हैं। इन साइट्स के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक 23 अप्रैल से हिमाचल प्रदेश के ई-टेन्डर पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते ेहैं। आवेदन करने की अन्तिम तारीख 5 मई रखी गई है। इसकी अधिक जानकारी के लिए सी0ई0ओ0 एवं प्रधान मुख्य अरण्यपाल ईको टूरिज्म के कार्यालय के दूरभाष 0177 2623036 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।
हिमाचल में इको टूरिज्म का विकास करने के लिए काफी ज्यादा संभावनाएं हैं। इन्हीं संभावनाओं को सरकार फलीभूत करना चाहती है। प्रदेश के जंगलों में वन विभाग के अपने रेस्ट हाउस आदि भी हैं जिनको भी इको टूरिज्म के नाम पर डवलप किया जाएगा। इनका भी प्रयोग वन विभाग पर्यटन विकास के लिए करेगा। इको टूरिज्म को लेकर पहले विवाद भी जुड़े रहे हैं। पूर्व की सरकारों ने कुछ साइट्स दी थीं लेकिन उस दौरान बनी नीतियां लोगों पर भारी पड़ गई। कई लोग अभी तक सरकार का पैसा तक नहीं दे पाए हैं जिन शर्तों पर उनको यह काम सौंपा गया था उनको पूरा नहीं किया गया। इस तरह से यह प्रयोग विफल साबित हुआ मगर अब वर्तमान सरकार इस दिशा में नई नीतियों के साथ आगे बढ़ेगी। यहां काफी कंपनियां इस तरह से इको टूरिज्म साइट्स लेने के लिए गंभीर हैं और सरकार से लगातार इसकी मांग उठाई जा रही थी। अब क्योंकि बजट में मुख्यमंत्री ने इस संबंध में घोषणा की है तो माना जा रहा है कि अगले महीने मई के अंत तक इको टूरिज्म का यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ा दिया जाएगा।
नरम पड़े ट्रंप के तेवर, कहा, चीन के साथ अच्छा व्यवहार करेगा अमरीका
बीजिंग
चीन के खिलाफ टैरिफ एक्शन को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अब नरम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वाशिंगटन बीजिंग के प्रति ‘बहुत अच्छा’ व्यवहार करेगा और टैरिफ 145 फीसदी तक नहीं रहेगा। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वाङ्क्षशगटन और बीङ्क्षजग टैरिफ समझौते पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं… यह लंबे समय से बहुत अच्छे रहे हैं। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। और मुझे लगता है कि हम चीन के साथ समझौता करेंगे।
अगर हम समझौता नहीं करते हैं, तो हम इसे तय करेंगे। हम बस संख्या तय करेंगे। टं्रप के नरम तेवरों से ऐसा माना जा रहा है कि अब अमरीका और चीन के बीच व्यापार को लेकर हो रही तनातनी खत्म हो सकती है। साथ ही ट्रेड वॉर का खतरा भी लगभग खत्?म माना जा रहा है। ट्रंप का ऐसा बयान चीन और अमरीकी बाजारों के लिए भी अच्छा संकेत देता है, जिससे ग्लोबल से लेकर एशियाई बाजारों में आगे तेजी की संभावना बढ़ गई है। वहीं महंगाई बढऩे की आशंका भी कम हो सकती है।
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति ने कम आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि चीन ने अमरीका धोखा दिया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच डील जल्द ही हो जाएगी। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मैं चीन के साथ सख्ती से पेश आऊंगा, हम बहुत अच्छे रहेंगे, वे भी बहुत अच्छे रहेंगे और हम देखेंगे कि क्या होता है? आखिरकार उन्हें कोई सौदा करना ही होगा, नहीं तो वे अमरीका में कारोबार नहीं कर पाएंगे, इसलिए हम चाहते हैं कि वे इसमें शामिल हों, लेकिन उन्हें कोई डील करना ही होगा। अगर वे डील नहीं करते हैं, तो हम डील तय करेंगे। हम तय करेंगे और यह सभी के लिए उचित होगा।
टैरिफ और ट्रेड वॉर में कोई विजेता नहीं होता
इस बीच, चीन ने अमरीका को चेतावनी दी कि वाशिंगटन द्वारा अत्यधिक दबाव डाले जाने के बावजूद बीजिंग के साथ समझौता करना, चीनी पक्ष से निपटने का सही तरीका नहीं है और यह काम नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने पत्रकारों के सामने चीन के रुख को दोहराया कि टैरिफ वॉर और व्यापार वॉर में कोई विजेता नहीं होता।
छह दिन ही निभा सके सात जन्मों का बंधन
चंडीगढ़
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में कायर आतंकियों ने जिन पर्यटकों की जान ली, उनमें करनाल का लाल लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल था। नौसेना में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल पत्नी हिमांशी के साथ घूमने के लिए गए थे। दोनों की शादी हमले के छह दिन पहले 16 अप्रैल को डेस्टीनेशन वेडिंग के रूप में मसूरी में हुई थी। परिवार के अनुसार, शादी के बाद विनय और हिमांशी ने हनीमून के लिए यूरोप जाने का मन बनाया था। इसके लिए वे शादी से पहले ही तैयारी कर रहे थे, लेकिन वीजा नहीं मिलने के कारण उनका यह प्लान रद्द हो गया। इसके बाद वे कश्मीर घूमने गए।
जहां पहलगाम में मंगलवार को आतंकियों ने उनके समेत अन्य टूरिस्ट की भी गोली मारकर हत्या कर दी। बुधवार को विनय की पत्नी हिमांशी ने अपने पति को भावभीनी विदाई दी। विनय के पार्थिव शरीर से लिपटकर हिमांशी बार-बार रोए जा रही थीं। उनको देखकर परिजन भी अपने आंसू रोक नहीं पाए।
घर में भी जीत की हैट्रिक को तरसे सनराइजर्स
हैदराबाद
आईपीएल का 41वां मैच सनराइजर्स हैदराबाद और मुंबई इंडियंस के बीच खेला गया। हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में मुंबई ने टॉस जीतकर बॉलिंग चुनी। सनराइजर्स हैदराबाद ने मुंबई इंडियंस को 144 रन का टारगेट दिया। मुंबई इंडियन ने सात विकेट के नुकसान पर 146/3 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। हैदराबाद ने आठ विकेट खोकर 143 रन बनाए। टीम से हेनरिक क्लासेन और इम्पेक्ट प्लेयर अभिनव मनोहर ने लडख़ड़ाई पारी को संभाला। क्लासेन ने 34 बॉल पर फिफ्टी लगा दी। मुंबई से ट्रेंट बोल्ट ने चार और दीपक चाहर ने दोविकेट लिए। वहीं बुमराह-पांड्या को एक-एक विकेट मिला।
काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरे खिलाड़ी
आईपीएल में बुधवार को सनराइजर्स हैदराबाद और मुंबई इंडियंस के बीच के खेले जाने वाले मैच में सभी खिलाड़ी और अंपायर काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 28 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए यह फैसला लिया। यही नहीं इस मैच के दौरान मैदान पर किसी भी तरह का जश्न नहीं मनाया जाएगा।
खेल शांति के साथ खेला गया। न पटाखे चलाए गए और न ही चीयरलीडर्स का डांस हुआ। मैच से पहले आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मौन भी रखा गया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कई क्रिकेटरों ने निंदा की है। उन्होंने पोस्ट कर मरने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सचिन तेंदुलकर ने लिखा, हमले से प्रभावित परिवार अकल्पनीय पीड़ा से गुजर रहे होंगे। भारत और दुनिया इस परिस्थिति में उनके साथ एकजुट है। हम सभी लोगों को न्याय मिले, इसकी प्रार्थना करते हैं।