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*इंदौर में देश का पहला वेस्ट क्लॉथ प्रोसेसिंग प्लांट, वेस्ट कपड़ों से क्लीन सिटी की भरेगी तिजोरी,पुराने कपड़ों से नगर निगम बनाएगी धागा*

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इंदौर. स्वच्छता के लिए पूरे देश में मिसाल बनने के बाद मध्य प्रदेश का इंदौर अब एक ऐसा काम करने जा रहा है, जो देश में पहली बार होने वाला है. नगर निगम के इस काम के बाद खराब कपड़ों के नियोजन की तस्वीर पूरी तरह से बदलने जा रही है. वेस्ट क्लॉथ प्रोसेसिंग प्लांट में बेकार कपड़ों को रूई में तब्दील कर नया धागा बनाया जाएगा‌. खास बात यह है कि इससे नगर निगम की कमाई भी होने वाली है.‌ स्वास्थ्य प्रभारी आश्विन शुक्ला ने बताया कि यहां देश का पहला ऐसा संयंत्र लगाया जा रहा है, जहां वेस्ट कपड़ों को सेग्रीगेट कर उससे रुई बनाई जाएगी और उसके बाद इसी रुई से धागा तैयार किया जाएगा. इससे नगर निगम को हर माह 1.75 लाख रुपये की कमाई भी होने वाली है. यह वेस्ट क्लॉथ प्रोसेसिंग प्लांट पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए HMS कंपनी को कांट्रैक्ट दिया है. वही प्लांट बना रही है. कंपनी ही धागा बनाने से लेकर उसे बेचने तक का काम करेगी. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कंपनी को 120 दिन में प्लांट तैयार करने का टारगेट दिया है.‌

निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने कहा, “स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचार करना इंदौर की परंपरा रही है. इसी परंपरा को आगे बढ़ते हुए नगर निगम वेस्ट कपड़ों का प्रयोग करने के बारे में काफी समय से विचार कर रहा था. वेस्ट कपड़ों का उपयोग कर धागे का निर्माण करने के लिए प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप में प्लांट लगाने का टेंडर जारी किया गया है.

ट लगाने का ह्यूमन मैट्रिक्स को मिला टेंडर

निगम द्वारा जारी किए गए टेंडर के जवाब में कुछ कंपनियों द्वारा अपने ऑफर दिए गए हैं, जिसमें निगम को सबसे ज्यादा ऑफर ह्यूमन मैट्रिक्स की ओर से मिला है. यह कंपनी नगर निगम को 175000 रुपए प्रति महीने देने के लिए तैयार है. निगम के द्वारा दिए गए स्थान पर इस कंपनी द्वारा 25 टन क्षमता का प्लांट बनाया जाएगा.

6 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा प्लांट

इस प्लांट के माध्यम से नगर निगम वेस्ट कपड़ों का उपयोग किया जा सकेगा. ह्यूमन मैट्रिक्स कंपनी के डायरेक्टर सनप्रीत सिंह ने कहा, “यह अपने तरह का देश का पहला और सबसे बड़ा प्लांट होगा. 6 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट की स्थापना होगी. इस प्लांट में वेस्ट कपड़ों से धागा बनाने के साथ ही रुई भी बनाई जाएगी. इसके अलावा इन कपड़ों के माध्यम से कलाकृति का निर्माण करने का कार्य भी किया जाएगा.

20 साल के लिए मिला कंपनी का मिल काम

इस प्लांट के संचालन में कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा. इंदौर नगर निगम इस कंपनी को 20 साल के लिए प्लांट के संचालन व संधारण का काम सौंपा जा रहा है. फिलहाल जिस तरह से इंदौर नगर निगम वेस्ट कपड़ों के माध्यम से धागा और रुई बनाएगा, तो निश्चित तौर पर एक नवाचार इंदौर शहर में एक बार फिर नगर निगम द्वारा किया जाएगा जो काफी सुर्खियां बटोरेगा.

रअसल हर साल नगर निगम के पास कपड़ों का ढेर इकट्ठा हो जाता है. नगर निगम के आरआर सेंटर्स और नेकी की दीवार पर लोग अपने इस्तेमाल किए हुए कपड़े छोड़कर चले जाते हैं. इसमें से कुछ जरूरतमंद लोगों के काम आ जाते हैं लेकिन बाकी के कपड़े कचरे में आ जाते हैं. इसी तरह से हर साल लाखों कपड़े एकत्रित हो जाते हैं, जो देवगुराड़िया के ट्रंचिंग ग्राउंड में बड़ी समस्या बनते जा रहे थे. इसी के निपटान को देखते हुए यह योजना तैयार की गई है.‌

कैसे बनेगा धागा?
लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए निगम जमीन और बिजली उपलब्ध कराएगा जबकि निजी कंपनी मशीनरी और संचालन का जिम्मा संभालेगी. नगर निगम की गाड़ियां घर-घर और कलेक्शन पॉइंट्स से पुराने कपड़े इकट्ठा करेंगी. प्लांट में इन कपड़ों को उनके फैब्रिक और रंग के आधार पर अलग किया जाएगा. खराब कपड़ों को मशीनों के जरिए छोटे-छोटे रेशों में बदला जाएगा और फिर इन रेशों को प्रोसेस कर उनसे औद्योगिक ग्रेड का धागा तैयार किया जाएगा.

कहां होगा इस्तेमाल?
इस प्लांट से निकलने वाले धागे का उपयोग दरी, पायदान, मोटे कपड़े और औद्योगिक उपयोग के कपड़े बनाने में किया जाएगा. साथ ही पोंछे समेत अन्य थर्ड ग्रेड के काम में भी इस धागे का इस्तेमाल हो सकेगा. इससे न केवल पर्यावरण बचेगा बल्कि निगम को हर महीने लगभग 1.75 लाख रुपये का राजस्व भी मिलेगा.‌ इसकी मदद से आसपास अन्य शहरों में कचरा ढेर में पड़े लाखों टन कपड़े के कचरे को प्रोसेस कर उससे भी धागा बनाया जा सकेगा.

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