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कोरोना पर सरकार को SC की दो टूक, ‘अधिकारों का उल्लंघन हो तो कोर्ट मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती’

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में ज्यादातर लोगों के पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है। देश में 50 फीसदी से कम आवादी के पास वायरलेस डाटा सर्विस है। ऐसे में ये व्यवहारिक नहीं है कि देश की ज्यादातर जनसंख्या अपने दोस्त, एनजीओ और गांव के सोशल सर्विस सेंटर के जरिये वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं। कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये रजिस्ट्रेशन कराने के कारण वहां भीड़ ज्यादा इकट्ठी होगी। इससे पहले केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन के लिए कोविन ऐप के जरिये रजिस्ट्रेशन की जरूरत बताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान ऐसी परिकल्पना नहीं करता है कि अगर लोगों के अधिकारों का कार्यपालिका की नीतियों के कारण उल्लंघन हो रहा है तो कोर्ट मूक दर्शक बना रहे।

सवाल है कि जो हासिये पर हैं उनका स्लॉट कैसे मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा है कि हमारा सवाल था और चिंता थी कि जो लोग देश में हासिये पर हैं वह कैसे वैक्सीनेशन कराएंगे। उन्हें कैसे वैक्सीन लेने के लिए स्लॉट मिलेगा वह कैसे कोविन के जरिये रजिस्ट्रेशन कराएंगे क्योंकि वैक्सिनेशन का स्लॉट डिजिटल पोर्टल के जरिये ही मिलता है। तब केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कोविन एप के जरिये रजिस्ट्रेशन होता है और एक मोबाइल पर चार लोगों का रजिस्ट्रेशन हो सकता है। साथ ही सभी ग्राम पंचायत में कॉमन सर्विस सेंटरर है वहां गांव के लोग जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं ताकि उन्हें वैक्सीन मिले। जो लोग भी डिजिटल फॉर्मेट का इस्तेमाल नहीं करते वह गांव के कॉमन सर्विस सेंटर जाकर दूसरे की मदद से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं ताकि उन्हें वैक्सीन लगाए जाने के लिए स्लॉट मिल सके। साथ ही परिवार के अन्य लोग, एनजीओ और दोस्त की मद से वह वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। अभी सभी के लिए वाक इन सुविधा नहीं है क्योंकि वैक्सीन की उपलब्धता उतनी नहीं है और साथ ही सेंटर पर भीड़ हो सकती है। सरकार ने कहा कि रजिस्ट्रेशन इसलिए भी जरूरी है ताकि उम्र आदि का पता चले और दूसरे डोज के लिए डाटा तैयार हो और लोगों पर ट्रैक रखा जा सके। जब ज्यादा वैक्सीन की उपलब्धता होगी तब स्थिति में बदलाव हो सकता है।

देश में बहुसंख्यक के पास इंटरनेट नहीं….हमें लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाउसहोल्ड सोशल कंजप्शन एजुकेशन नामक सर्वे में कहा गया कि गांव में 4 फीसदी और शहर में 23 फीसदी आबादी के पास कंप्यूटर है। साथ ही 15 से 29 साल की आयु के 24 फीसदी गांव में और 56 फीसदी शहर के लोगों कंप्यूटर ऑपरेट कर सकते हैं। देश में 24 फीसदी के पास इंटरनेट की सुविधा घर में है। ट्राई की रिपोर्ट कहती है कि देश में वारयलेस डाटा सर्विस लेने वाले आधी से कम आबादी है। बिहार, यूपी और असम जैसे राज्यों में टेली घनत्व 75 फीसदी से कम है। गरीबी रेखा से नीचे आने वाले गांव के लोगों की आय 896 और शहर में प्रति व्यक्ति आय 1316 रुपये है। जबकि इंटरनेट डाटा 49 रुपये का है एक महीने के लिए और इस तरह 4 से 5 फीसदी इनकम इसी में चला जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में ये बात साफ है कि डिजिटल डिविजन है। देश में डिजिटल लिटरेसी कम है। वैक्सीनेशन स्लॉट की सुविधाएं डिजिटल पोर्टल पर है और कोर्ट को लोगों के समानता के अधिकार और हेल्थ के अधिकार की चिंता है। ऐसे में ये व्यवहारिक नहीं है कि ज्यादातर लोग अपने दोस्त और रिश्तेदारों और कॉमन सर्विस सेंटर जाकर वैक्सीेनेशन के लिए स्लॉट बुक करें। कॉमन सर्विस सेंटर अगर लोग स्लॉट के लिए जाएंगे तो वहां भी भारी भीड़ होगी।

वैक्सीनेशन के लिए बनाए गए ऐप ब्लाइंड के योग्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोविन और आरोग्य सेतु क्षेत्रिये भाषा में भी होनाचाहिए। कोविन उनके लिए सहूलियत नहीं देता तो ब्लाइंड हैं। उनके लिए ऑडियो टेक्स्ट कैप्चा नहीं है। साथ ही उम्र ग्रुप, वैक्सीन का नाम और फ्री है या नहीं इन बातों की जानकारी कोविन एप पर नहीं है। जिनकी आखों की रौशनी नहीं है उनके लिए तारीख का स्लॉट पता करना मुश्किल है। ऐसे में हम निर्देश देते हैं कि इन असुविधाओं को देखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अप्रैल को कोरोना मामले में संज्ञान लिया था और इसके बाद से कई आदेश पारित किए। इसके तहत नैशनल टास्क फोर्स का गठन कर ऑक्सीन की उपलब्धता, जरूरत और सप्लाई के बारे में सिफारिश करने को कहा था। साथ ही केंद्र सरकार से वैक्सीन पॉलिसी पर सवाल किए थे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया कि देश भर में दिसंबर 2021 तक वैक्सीनेशन पूरा हो जजाएगा। इसके लिए वैक्सीन बनाने वाली विदेशी कंपनियों से बातचीत चल रही है। 16 जनवरी से वैक्सीेनेशन शुरू हुआ है। पहले हेल्थ केयर वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर को दिया गया फिर 60 साल से ऊपर और उसके बाद 45 से ऊपर के लोगों को वैक्सीन दिया गया। अब 18 से 44 के लोगों को भी दिया जा रहा है।

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