भोपाल। कोरोना महामारी के मृतको के परिजनो को मुआवजा देने का निर्णय तो सही है, मगर मात्र 50 हजार की राशि देकर सरकार दुखी परिजनों के जख्मों पर नमक ही छिड़केगी। राज्य सरकार यदि वास्तव में कोरोना से मृतकों के आश्रितों को राहत देना चाहती है तो मुआवजा राशि कम से कम पांच लाख रुपए होनी चाहिए।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि कोरोना की दोनो लहरों के दौरान मृत्यु का शिकार हुए परिजनो को राज्य सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा की है। निर्णय के अनुसार यदि मृत्यु प्रमाण पत्र पर मृत्यु का कारण दर्ज नहीं किया गया है तो भी मृतकों को मुआवजा राशि मिलने के प्राावधान किया गया है, मगर इसके लिए इलाज करने वाले दो डाक्टर का वैरीफिकेशन जरूरी है।
माकपा ने वैरीफिकेशेन की प्रक्रिया को भी और सरल बनाने की मांग करते हुए कहा है कि गरीब और असहाय ग्रामीण लोगों के लिए दो डाक्टरों का वैरीफिकेशन करवाना कठिन भी हो सकता है, इसलिए एक ही डाक्टर का वैरिफिकेशन मान्य होना चाहिए। मगर राहत राशि के नाम पर दुखी परिजनो से मजाक नहीं होना चाहिए। इसलिए न्यूनतम राहत राशि पांच लाख रुपए होना चाहिए।
निर्णय सही मगर मुआवजा राशि पांच लाख हो : माकपा

