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*जीएसटी में बदलाव के फैसले का शेयर बाजार पर आज दिख सकता है असर; 1.98 लाख करोड़ की खपत बढ़ने का अनुमान*

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जीएसटी काउंसिल ने अप्रत्यक्ष करों की दरों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए चार की जगह अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब को मंजूरी दे दी। काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने आम सहमति से जीएसटी की सिर्फ दो दरों, 5 और 18 फीसदी को मंजूरी दी। जीएसटी के इस बड़े फैसले से शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को तेजी दिख सकती है। वहीं जीएसटी 2.0 के तहत सरकारी खजाने को सालाना औसतन 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 

शेयर बाजार पर दिखेगा सकारात्मक असर
जीएसटी बदलावों को लेकर विश्लेषकों का मानना है, लंबे समय से तय दायरे में कारोबार कर रहा बाजार अभी से दिवाली तक तेजी में रह सकता है। जो तेजी अक्तूबर में आनी थी, वह अब सितंबर से शुरू हो सकती है। घरेलू शेयर बाजारों ने इस साल निवेशकों को निराश किया है, अभी तक सिर्फ दो फीसदी का फायदा दिया है।

1.98 लाख करोड़ की बढ़ेगी खपत
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, जीएसटी 2.0 के तहत सरकारी खजाने को सालाना औसतन 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। पर, इससे खपत में 1.98 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। वहीं, जेफरीज व माॅर्गन स्टैनली का आकलन है कि 2.4 लाख करोड़ की अतिरिक्त मांग बढ़ सकती है।

48,000 करोड़ में से 43,000 करोड़ की रिकवरी
अनुमान है कि स्लैब घटने से 2023-24 के आधार पर 48,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि, लग्जरी व तंबाकू जैसे पदार्थों पर 40 फीसदी के टैक्स से 43,000 करोड़ रुपये की कमाई बढ़ेगी। शुद्ध घाटा 5,000 करोड़ रुपये ही होगा।

सात दिन में पूरी होगी रिफंड की प्रक्रिया
जीएसटी परिषद ने महत्वपूर्ण फैसले में सात दिन में रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने को मंजूरी दी है।  निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा,  इससे निर्यातकों पर नकदी का दबाव बेहद कम हो जाएगा। समय पर और पूर्वानुमानित रिफंड भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। खासकर जब वैश्विक मांग अनिश्चित है।  n1,000 रुपये से कम के जीएसटी रिफंड से ई-कॉमर्स निर्यातकों को काफी लाभ होगा।

मौजूदा ई-वे बिल वैध
सरकार ने स्पष्ट किया कि सीजीएसटी एक्ट-2017 के नियम 138 के मुताबिक, नई दरें लागू होने पर ई-वे बिल रद्द करने और नए सिरे से तैयार करने की अनिवार्यता नहीं है। मौजूदा ई-वे बिल वैध बने रहेंगे।

वाहन, इलेक्ट्रॉनिक व एफएमसीजी की होगी भारी बिक्री
विश्लेषक मानते हैं कि जिन लोगों ने जीएसटी सुधार के कारण खरीदी टाल दी थी, वे अब इस महीने के अंत से दिवाली तक जमकर खरीदी करेंगे। इसमें ज्यादातर दोपहिया वाहन, चार पहिया वाहन, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और एफएमसीजी के खास उत्पाद हो सकते हैं। अक्तूबर व नवंबर में इनकी बिक्री से दिसंबर में भी जीएसटी संग्रह मजबूत रहेगा। अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और तीसरी तिमाही के जब जीडीपी के आंकड़े आएंगे, तो इनका योगदान दिखेगा। एफएमसीजी कंपनियाें ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 22 सितंबर के बाद जो भी उत्पाद बाजार में आएंगे, वे सस्ते मिलेंगे।

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