अग्नि आलोक

 अमेरिका की बिंघम घाटी में सबसे गहरी खदान, जिसमें समा सकते हैं फुटबॉल के 1436 मैदान

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नई दिल्‍ली: इंसान ने अपने हाथों से कई बेमिसाल चीजें गढ़ी हैं। फिर चाहे वह चमचमाता ताजमहल हो या मिस्र के पि‍रामिड। तकनीक ने इंसानी हाथों को और ताकत दी। वह धरती का सीना चीर आदिकाल से दबा खजाना निकालने में लग गया। सबसे आसानी से मिलता था तांबा। अंग्रेजी में Copper कहे जाने वाले तांबे से खनन का इतिहास गुंथा हुआ है। इंसान ने धरती में दफन धातुओं को निकालने की खातिर उसमें कई सुराख किए गए हैं। कुछ तो इतने बड़े हैं कि अंतरिक्ष से नजर आते हैं। मानव निर्मित दुनिया की सबसे बड़ी खदान उनमें से एक है। अमेरिका की बिंघम घाटी दुनिया की सबसे गहरी ओपन-पिट माइन है। 1.2 किलोमीटर से गहरी इस खान के आगे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा (830 मीटर) बौनी है। खोदते-खोदते इंसान ने 4 किलोमीटर चौड़ा ऐसा गड्ढा बना दिया है जिसमें 1,400 से ज्यादा फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं। बिंघम घाटी की खान से तांबा निकलता है। 170 साल से ज्यादा के इतिहास में यहां से 19 मिलियन टन से ज्यादा तांबा निकाला जा चुका है। इतिहास में इससे ज्यादा तांबा किसी और खदान से नहीं मिला है।

बिंघम कॉपर माइन का इतिहास
बिंघम घाटी में कच्‍चा तांबा पहली बार दो भाईयों ने 1848 में खोजा। उनके नाम थे- सैनफोर्ड और थॉमस बिंघम। जी हां, उन्हीं के नाम पर अब घाटी का नाम है। दोनों भाई यहां अपने मवेशी चराने आते थे। तांबा मिलने के बावजूद इन भाइयों ने दावा नहीं किया और वहां से वेबर काउंटी चले गए। दशक ऐसे ही बीत गया। 1863 में यहां से तांबा अयस्क निकालने की शुरुआत हुई। इस खान से सोना, लेड-चांदी और तांबा-सोना निकलता था। खास तरह के Porphyry कॉपर को प्रोसेसिंग और रेल की जरूरत थी, जो 1873 में बनाई गई।

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आज की तारीख में बिंघम कॉपर माइन का मालिकाना हक ब्रिटिश-अमेरिकन मल्‍टीनैशनल कॉर्पोरेशन, रियो टिंटो ग्रुप के पास है। खनन का मैनेजमेंट केनेकॉट ऊटा कॉपर कॉर्पोरेशन करता है। 1906 से लगातार इस खान से उत्पादन जारी है। अबतक की खुदाई से यहां 1,210 मीटर गहरा गड्ढा बन गया है जिसकी चौड़ाई 4 किलोमीटर से ज्यादा है। 1966 में इस जगह को अमेरिका ने ऐतिहासिक लैंडमार्क घोषित किया।

बिंघम कॉपर माइन की खासियत

माइनिंग का इतिहास
आज से 40,000 से 20,000 साल पहले दक्षिणी अफ्रीका में कोयले के खनन के सबूत मिलते हैं। बड़े पैमाने पर खनन की शुरुआत एडवांस्‍ड सभ्यताओं के साथ हुई, कुछ 10,000 से 7,000 साल पहले। शुरू में प्राकृतिक रूप से धातु अवस्‍था में मिलने वाली धातुओं का ही खनन होता था। तांबा की बहुतायत थी पर सोना, चांदी और पारा भी निकलता था। क्रांतिकारी बदलाव तब आया जब इंसान ने खनिजों को आग में तपाना शुरू किया। अब इंसान धातु को कोई भी आकार दे सकता था। इससे बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलाव आए।

20वीं सदी के मध्य तक अधिकतर खनन इंसान ही करते थे। इससे जिंदगी को बड़ा खतरा था। मुनाफे के चक्कर में अक्सर सुरक्षा दरकिनार होती थी। नतीजा, खनन हादसों में लाखों जानें गईं। अब बड़ी-बड़ी मशीनें आ गई हैं जो धरती का सीना चीरती हैं। फिर भी प्राकृतिक संसाधनों में धनी लेकिन गरीब देशों में खनन के कारोबार में इंसानों का शोषण आज भी जारी है।

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