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विदेशी निवेशकों की बिकवाली से शेयर बाजार में तबाही, इस साल उच्च स्तर से 10154 अंक लुढ़क चुका है Sensex

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का सिलसिला जारी है।  एफपीआई 2022 में अबतक भारतीय शेयर बाजारों से 1.99 लाख करोड़ रुपये अधिक की निकासी कर चुके हैं। बता दें सेंसेक्स इस साल अब तक 58310 के स्तर से 6949 अंक लुढ़क चुका है। शुक्रवार को यह 51,360 के स्तर पर बंद हुआ। अगर साल 2022 के उच्च स्तर 61475 से तुलना करें तो सेंसेक्स में यह गिरावट बढ़कर 10154 अंकों की हो जा रही है।

कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड के इक्विटी शोध प्रमुख (खुदरा) श्रीकांत चौहान ने कहा, जब तक विदेशी निवेशक बिकवाल रहेंगे, तब तक बाजारों के लिए बढ़त में आना मुश्किल है।   कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, ऊंची मुद्रास्फीति तथा सख्त मौद्रिक रुख के मद्देनजर अभी एफपीआई की बिकवाली जारी रह सकती है।

मई में 39,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी

मई में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों से करीब 39,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। अमेरिका में बांड पर यील्ड बढ़ने, डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और आक्रामक वृद्धि की संभावना के बीच एफपीआई भारतीय बाजार में बिकवाल बने हुए हैं।

जून में अबतक 31,430 करोड़ रुपये के शेयर बेचे

अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि, ऊंची मुद्रास्फीति तथा शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली जून में भी जारी है। इस महीने अबतक एफपीआई भारतीय शेयरों से 31,430 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। चालू साल यानी 2022 में एफपीआई अबतक 1.98 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं।

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, आगे चलकर भी एफपीआई का रुख उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक रुख को कड़ा किए जाने की वजह से एफपीआई उभरते बाजारों में बिकवाल बने हुए हैं।  आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने इस महीने 17 जून तक भारतीय शेयर बाजारों से शुद्ध रूप से 31,430 करोड़ रुपये की निकासी की है। अक्टूबर, 2021 से एफपीआई की बिकवाली का सिलसिला जारी है।

दुनियाभर में मंदी के बढ़ता  जोखिम 

वैश्विक निवेशक दुनियाभर में मंदी के बढ़ते जोखिम को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की वृद्धि की है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने आगे भी सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। यह कहना है जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का।

उन्होंने कहा कि डॉलर के मजबूत होने और अमेरिका में बांड पर प्रतिफल बढ़ने की वजह से एफपीआई मुख्य रूप से बिकवाली कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इसके चलते एफपीआई शेयरों से बांड की ओर रुख कर रहे हैं।

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