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सातवें सोमवार पर उज्जैन में खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट

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21 अगस्त को सावन महीने का सातवां सोमवार है। इसी दिन नागपंचमी भी मनाई जाएगी। सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारी तो निकाली ही जाएगी, साल भर में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी खुलेंगे। ऐसे में यहां रिकॉर्ड 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट सालभर में एक बार नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट सोमवार रात 12 बजे से खुल जाएंगे, जो मंगलवार रात 12 बजे यानी 24 घंटे तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे। इस मौके पर मंदिर समिति ने भी विशेष व्यवस्था की है। 1500 प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों के साथ एक हजार पुलिसकर्मी यहां तैनात रहेंगे।

समिति ने 200 क्विंटल लड्डू प्रसादी का स्टॉक बनवाया है। श्रद्धालुओं को लाइन में ही पानी की बोतल देने की व्यवस्था की गई है। भजन मंडलियां भी मौजूद रहेंगी। कई जगह एलईडी लगाकर सीधा प्रसारण किया जाएगा। शाम को बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए निकलेंगे।

गर्भगृह के ऊपर है नागचंद्रेश्वर मंदिर

महाकाल मंदिर के गर्भगृह के ऊपरी हिस्से में ओंकारेश्‍वर मंदिर है। ओंकारेश्‍वर मंदिर के शीर्ष पर नागचंद्रेश्वर मंदिर बना है। इसमें 11वीं शताब्‍दी की प्रतिमा स्‍थापित है। शिव-पार्वती के दोनों वाहन नंदी और सिंह भी विराजित हैं। मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी। उज्‍जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। इसके दर्शन के बाद अंदर प्रवेश करने पर श्री नागचंद्रेश्वर की मुख्‍य प्रतिमा (शिवलिंग) के दर्शन होते हैं।

भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला से प्रवेश कर करेंगे। यहां से गंगा गार्डन के पास चारधाम मंदिर, पार्किंग स्थल जिगजैग, हरसिद्धि चौराहा, रूद्रसागर के पास, बड़ा गणेश मंदिर, गेट नंबर 4 या 5, विश्राम धाम, एरोब्रिज से होकर भगवान नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन किए जा सकेंगे। इसके बाद भक्त एरोब्रिज के द्वितीय ओर से रैम्प, मार्बल गलियारा, नवनिर्मित मार्ग, प्रीपेड बूथ चौराहा पहुंचेंगे। यहां से द्वार नंबर 4 या 5 के सामने से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा, नृसिंह घाट तिराहा होते हुए दोबारा भील समाज धर्मशाला पहुंचेंगे।

700 सीसीटीवी कैमरे से सर्विलांस

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