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रेवड़ी नहीं रोजगार, फ्रेट कॉरिडोर पर रिफॉर्म एक्सप्रेस की रफ्तार है बजट का सार

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निर्मला सीतारमण ने 2026–27 बजट में रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर पर फोकस किया. जीरामजी, PLI, डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से नौकरियों के नए मौके बनेंगे. भारत में डेटा सेंटर लगाने वाली ग्लोबल कंपनियों के लिए गजब की छूट दी गई है. उन्हें टैक्स होलीडे दिया जाएगा. अगर बजट की बातें अमल में आईं तो बेरोजगारी दर घटाने में काफी मदद मिलेगी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 -27 का बजट पेश कर्तव्य पर फोकस करते हुए पेश किया. तीन बातें खास रहीं. रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर. कहीं न कहीं तीनों बातें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. युवा शक्ति को समर्पित इस बजट से रोजगार के बड़े मौके पैदा होंगे. निर्मला ने शिक्षा को रोजगार के ज्यादा करीब लाने की कोशिश की. इसीलिए एजुकेशनलब हब्स को रोजगार देने वाले इंडस्ट्री के आस-पास बसाने की बात बजट में की गई. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल से ही सरकार पर रोजगार को चौपट करने के आरोप लगते रहे हैं. नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत थी. ये 15 साल की उम्र से ज्यादा टोटल लेबर फोर्स में कितने बेरोजगार हैं, इसे दर्शाता है. पिछले साल बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत के आस-पास ही थी. इसे घटाकर तीन प्रतिशत के आस-पास लाने के लिए हर साल एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां देनी होंगी. उम्मीद है कोलकाता से सूरत तक के लिए ऐलान नए फ्रेट कॉरिडोर पर रिफॉर्म एक्सप्रेस के रफ्तार पकड़ने से सरकार इस चुनौती से निपट पाएगी.

मोदी सरकार ने रोजगार केंद्रित तीनों पॉइंट्स पर फोकस खर्च के पैटर्न में भी दिखाया है. 2026–27 के लिए कुल बजट साइज 53.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है. पूंजी खर्च के लिए 12.21 लाख करोड़ रुपए है. वैसे उम्मीद थी कि ये 14 लाख करोड़ हो जाएगा लेकिन पिछले दो साल से सरकार इसे लगातार बढ़ा रही है. लिहाजा बेस लेवल भी बड़ा हो गया है. इसलिए नौ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कम नहीं कही जा सकती. बजट के ठीक बाद अरविंद सुब्रमण्यम ने भी इस ओर इशारा किया. यह साफ इशारा है कि सरकार सड़क, रेल, बिजली, मेट्रो और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के ज़रिए सीधे और परोक्ष दोनों तरह के रोजगार बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है.

पिछले साल बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत के आस-पास ही थी. इसे घटाकर तीन प्रतिशत के आस-पास लाने के लिए हर साल एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां देनी होंगी. उम्मीद है कोलकाता से सूरत तक के लिए ऐलान नए फ्रेट कॉरिडोर पर रिफॉर्म एक्सप्रेस के रफ्तार पकड़ने से सरकार इस चुनौती से निपट पाएगी.

कैपेक्स बढ़ने का सीधा असर कंस्ट्रक्शन, स्टील, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में नौकरी की मांग पर पड़ता है. 2017–18 के बाद से कैपिटल एक्सपेंडिचर का हिस्सा लगातार बढ़ा है और अब कुल खर्च का लगभग पांचवां से ज़्यादा हिस्सा पूंजीगत कामों पर जा रहा है, जबकि राजस्व खर्च का हिस्सा घटकर करीब 68 प्रतिशत पर आ गया है. सैलरी और पेंशन जैसे अनप्रोडक्टिव मदों पर खर्च का घटना एक पॉजिटिव संकेत है. अगर हम इन्फ्रा या मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर खर्च बढ़ाते हैं तो इससे न सिर्फ लगातार रोजगार पैदा होता है बल्कि विकास दर यानी जीडीपी भी बढ़ती है.
जीरामजी के साथ आए महात्मा
हाल ही में जब मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम बदल विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (जीरामजी) कर दिया तो कांग्रेस कुपित हो गई. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जानबूझकर महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है क्योंकि सरकार उनसे नफरत करती है. बजट ने राहुल को तगड़ा जवाब दिया है. मोदी सरकार एक नई योजना ला रही है जिसका नाम है महात्मा गांधी ग्राम स्वराज अभियान. इसके तहत खादी जैसे हैंडीक्राफ्ट को मार्केट से कनेक्ट किया जाएगा. इसका मकसद भी मनरेगा की तरह रोजगार के मौके उपलब्ध कराना है.

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