स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं वंशजों की पहचान खत्म की जा रही
रीवा । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि देश की आजादी के 75 वर्ष पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार द्वारा घर-घर झंडा फहराए जाने का कार्यक्रम आयोजित है लेकिन यह काफी आपत्तिजनक बात है कि राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज सिर्फ खादी में नहीं बल्कि पॉलिस्टर में भी होगा । राष्ट्रीय ध्वज में पॉलिस्टर की छूट गांधीजी के खादी विचार दर्शन पर गहरा आघात है । श्री खरे ने बताया कि जुलाई की शुरुआत में भाजपा द्वारा स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव वर्ष मनाने राष्ट्रीय स्तर पर घर-घर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का कार्यक्रम बनाया गया लेकिन जब इनकी भूमिका को लेकर विरोध जताया गया तब मोदी सरकार ने इस कार्यक्रम को अपने हाथ ले लिया और अब 11 अगस्त से 17 अगस्त तक पूरे देश में घर-घर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम चलाया जाएगा । श्री खरे ने कहा कि स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के माध्यम से लंबे समय से कार्यक्रम होते हैं लेकिन अब घर-घर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का मतलब यह है कि देश के लोग आजादी के 75 साल में भी जागरूक नहीं हुए हैंं । खरे ने कहा कि सरकार को इस बात की पहल करना चाहिए कि स्वतंत्रता दिवस पर लोग अपने घरों पर खुद झंडा फहराएं । कायदे से यह कार्यक्रम 9 अगस्त से शुरू होना चाहिए क्योंकि देश की आजादी का राष्ट्रव्यापी अंतिम आंदोलन अंग्रेजों भारत छोड़ो इसी दिन शुरू हुआ था , जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर मुंबई के गोवालीया मैदान में युवा सत्याग्रही अरुणा ने तिरंगा ध्वजारोहण कर के आंदोलन को गति प्रदान की थी ।
श्री खरे ने बताया कि एक तरफ देश की आजादी का अमृत महोत्सव पर मनाया जा रहा है वहीं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके वंशजों की पहचान खत्म की जा रही है । शासन प्रशासन के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके वंशजों को उनकी पहचान का प्रमाण पत्र जारी न करना , अत्यंत आपत्तिजनक बात है । कहने को देश की आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष मनाया जा रहा है लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके वंशजों को चिन्हित न किया जाना इतिहास के साथ क्रूर खिलवाड़ एवं आपराधिक कृत्य है । आने वाली पीढ़ियां कैसे जानेगी कि देश की आजादी की लड़ाई किन लोगों ने लड़ी और उनके वंशज कौन हैं ?

