महापौर भार्गव ने समाज के प्रतिनिधियों को स्पष्ट की स्थिति।
नगर निगम का मालिकाना हक है कर्बला मैदान पर ।
इंदौर : कर्बला मैदान पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले मेले को लेकर अब नगर निगम की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि कर्बला मैदान नगर पालिक निगम इंदौर की मालिकाना जमीन है। इस पर किसी भी प्रकार का आयोजन नगर निगम की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।

महापौर ने बताया कि न्यायालय द्वारा ताजिए ठंडे करने की अनुमति दी गई है, अतः समाज को इस धार्मिक प्रक्रिया को करने की स्वतंत्रता है लेकिन यदि मेला लगाना है, तो उसके लिए आयोजकों को नगर निगम में विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, तभी उस पर विचार कर अनुमति दी जाएगी।
महापौर भार्गव ने कहा, “नगर निगम यह तय करेगा कि नगर निगम की भूमि पर कौन-सा आयोजन हो सकता है और कौन-सा नहीं। न्यायालय के आदेशानुसार धार्मिक परंपरा पूरी की जा सकती है, लेकिन मेले जैसे आयोजन बिना अनुमति के नहीं होंगे।”
इस विषय को लेकर विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों ने महापौर से भेंट की। महापौर ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वे मेला लगाना चाहते हैं, तो नगर निगम को आवेदन दें। निगम उस पर नियमों के तहत निर्णय करेगा।नगर निगम की ओर से यह कदम सार्वजनिक भूमि के सुव्यवस्थित उपयोग और कानूनी प्रक्रिया के पालन को सुनिश्चित करने हेतु उठाया गया है।
दौर में कर्बला मैदान की जमीन पर अदालत का बड़ा फैसला
इंदौर शहर के मध्य क्षेत्र में लालबाग के समीप स्थित कर्बला मैदान की जमीन के मालिकी हक को लेकर इंदौर नगर निगम के पक्ष में बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का मालिक वक्फ बोर्ड को नहीं मानते हुए इंदौर नगर निगम को माना है।
इंदौर निगम की ओर से दायर दीवानी अपील को स्वीकार करते हुए 15वे जिला न्यायाधीश नरसिंह बघेल की कोर्ट ने निगम के पक्ष में डिक्री पारित कर दी है। नगर निगम की ओर से दायर इस अपील में पंच मुसलमान कर्बला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था। अतिक्रमण करने का प्रयास इसके पहले निगम ने वाद दायर किया था जो व्यवहार न्यायाधीश की कोर्ट ने 13 मई 2019 को निरस्त कर दिया था जिसके विरुद्ध उक्त अपील की गई। नगर निगम का तर्क था कि इस जमीन का मालिक वह है। इस जमीन से लगी सरस्वती नदी के पास के मात्र 0.02 एकड़ भूमि तजिए ठंडे करने के उपयोग में आती है।
प्रतिवादी इस जमीन पर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रतिवादी गण का तर्क था कि 150 साल पहले इंदौर के श्रीमंत राजा ने वाद ग्रस्त स्थान को मुस्लिम समाज को मोहर्रम त्योहार और ताजिए ठंडे करने के लिए दिया था। 29 जनवरी 84 को इसे वक्फ संपत्ति के रूप में इसका रजिस्ट्रेशन किया गया। ऐसे में नगर निगम को वाद ग्रस्त जमीन पर कार्रवाई का अधिकार समाप्त हो चुका है।