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सरकार की पेशकश नामंजूर:किसान कानून रद्द करने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं;किसान संसद और ट्रैक्टर मार्च का कार्यक्रम यथावत, देशभर में किसान आंदोलन ने जोर पकड़ा

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किसानों ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक टालने की सरकार की पेशकश खारिज कर दी है। टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की गुरुवार को हुई बैठक में ये फैसला लिया गया। मोर्चा की फुल जनरल बॉडी मीटिंग में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी जामा पहनाने की मांग दोहराई गई।

बैठक के बाद किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा, ‘सरकार जब तक कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, उसका कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कल हम सरकार को कहेंगे कि इन कानूनों को वापस कराना और MSP पर कानूनी अधिकार लेना ही हमारा लक्ष्य है। हमने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है।’ सरकार ने बुधवार को किसानों के साथ 11वें दौर की बातचीत में नए कानून डेढ़ साल तक लागू न करने की पेशकश की थी।

आज सरकार के साथ मीटिंग में अहम वार्ता हुई। सरकार ने किसानों के समक्ष एक प्रस्ताव  रखा कि एक साल या ज्यादा समय के लिए कृषि कानूनों को निलंबित  कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र  दे दिया जाएगा। किसानों ने रिपील( रद्द) की मांग पर ज़ोर दिया और अगली बैठक तक विचार विमर्श कर निर्णय लेने की बात कही। एम एस पी  के मुद्दे पर सरकार ने कमेटी की पेशकश की परंतु किसानों ने इसे अस्वीकार किया। इस पर 22 जनवरी की अगली मीटिंग में विस्तारपूर्वक चर्चा होगी।
आज की मीटिंग में सरकार द्वारा एन आई ए  जांच और गिरफ्तारियों पर भी चर्चा हुई और सरकार ने एन आई ए  को नाजायज केस न करने के निर्देश देने का भरोसा दिया।

26 जनवरी की किसान परेड से संबधी दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश पुलिस से बैठक हुई जिसमें किसान ने आउटर रिंग रोड पर परेड करने की मांग पर अडिग रहे वहीं पुलिस ने दूसरे रास्ते देने का और परेड ना करने का आह्वान किया। इसके बारे मे कल भी एक बैठक होगी।
इस राष्ट्रव्यापी और जनांदोलन में देशभर से किसान दिल्ली बोर्डर्स पर पहुंच रहे है। उत्तराखंड के लखीमपुर और बिजनौर से हज़ारों की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली पहुंचने वाले है।
मध्यप्रदेश के रीवा, ग्वालियर,  समेत कई जगहों पर किसानों के पक्के मोर्चे लगे हुए है। इंदौर ,मुलतापी ( बैतूल ) सहित 30 से अधिक जिलों में लगातार धरना आंदोलन कार्यक्रम किये जा रहे है।अलग अलग जगह पर प्रशासन को ज्ञापन दिए जा रहे है। महिला किसान दिवस भी पूरी ऊर्जा और उत्साह से मनाया गया। अब किसान गाँव गाँव जाकर जागरूक कर रहे है और आगामी कार्यक्रमो की रूपरेखा तैयार कर रहे है। मध्यप्रदेश के ही बडवानी में एक विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला गया।
नवनिर्माण संगठन की ओडिशा से दिल्ली की यात्रा में लोगो के मिल रहे समर्थन को देखकर उतर प्रदेश सरकार ने परेशान किया और रुट भी बदला गया। इसके विरोध में यात्रा के सयोंजक 26 जनवरी तक उपवास रखेंगे। 
पंजाब व हरियाणा में जनांदोलन व्यापक रूप ले रहा है। न सिर्फ किसान-मजदूर बल्कि समाज के हर वर्ग से लोग इस आंदोलन में भागीदारी दिखा रहे है। उत्तरी राजस्थान मे रोजाना ट्रैक्टर मार्च, बाइक रैली और धरना प्रदर्शन कर किसान दिल्ली बोर्डर्स पर आने की तैयारी कर रहे है।
इस आंदोलन में अब तक 138 किसान शहीद हो चुके है। सयुंक्त किसान मोर्चा की समूची लीडरशिप इन शहीदों को श्रंद्धाजलि अर्पित करती है। हम सभी भरोसा देते है कि इन किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम शहीदों के परिवारों को उचित क्षतिपूर्ति की मांग करते है।जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के नेतृत्व में किसान ज्योति यात्रा उदयपुर पर कर चुकी है। महाराष्ट्र के यवतमाल से विधवा किसान या आत्महत्या कर चुके किसान के परिवार के 30  सदस्य दिल्ली के किसान आंदोलन में अपनी भागीदारी देने के लिए 23 जनवरी को पहुंच  रहे है। कोलकाता में अन्नदातार साथे बांग्ला के नाम से चल रहे पक्के मोर्चे में आज एक विशाल रैली आयोजित की गई।
बिहार में लगातार किसान आंदोलन कर रहे है। सरकार जिस तरह से इस आंदोलन को एक खास तबके से जोड़ कर पेश कर रही है, बिहार के किसानो ने इस तर्क का जवाब भी अपने संघर्ष से दिया है। बिहार में एक तरफ किसान गावों और जिला हेडक्वॉर्टर पर प्रदर्शन हो रहे है वहीं पटना में आज अखिल भारतीय पीपुल्स फोरम ने विरोध प्रदर्शन किया। 
डॉ दर्शन पालसयुंक्त किसान मोर्चा9417269294

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