देशभक्ति का जज्बा और आत्मनिर्भर बनने का मौका दोनों एक साथ मिले, इससे बेहतर और क्या हो सकता है. छत्तीसगढ़ के स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तिरंगा बनाकर न केवल अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं बल्कि देशभक्ति के रंग भी बिखेर रही हैं. अब तक 6000 से ज्यादा झंडे तैयार कर उन्होंने करीब दो लाख रुपये की आय अर्जित कर ली है.
छत्तीसगढ़ के ग्राम बघमरा की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सिलाई मशीनों पर लगातार काम कर रही हैं. स्वतंत्रता दिवस को लेकर दिन-रात चलने वाली इन मशीनों से तैयार हो रहे हर तिरंगे में महिलाओं की मेहनत और देशभक्ति झलकती है.
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पहले छोटे-मोटे कामों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब झंडा निर्माण से अच्छी आय कमा रही हैं. अब तक 6000 से ज्यादा झंडे तैयार कर लगभग दो लाख रुपये की कमाई हो चुकी है.
महिला समूहों द्वारा बनाए गए झंडे स्थानीय दुकानों, बाजारों और सरकारी दफ्तरों के स्टॉल पर उपलब्ध हैं. गांव से लेकर शहर तक इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है.
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महिलाओं का लक्ष्य है कि 15 अगस्त तक हर घर पर तिरंगा लहराए. उनका मानना है कि यह सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि देश के लिए योगदान का अवसर है.
बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने महिला समूहों की पहल की सराहना करते हुए लोगों से हर घर तिरंगा अभियान में शामिल होने की अपील की है. प्रशासन के सहयोग से महिलाएं और ज्यादा उत्पादन के लिए प्रेरित हो रही हैं.

