भोपाल
नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल (NLIU) के 11वें दीक्षांत समारोह में एक दंपती ऐसे थे, जिनके बेटे को डिग्री तो नहीं मिल रही थी, लेकिन उनके बेटे के नाम से दूसरे छात्रों को गोल्ड मेडल दिया जा रहा था। यह गोल्ड मेडल उनके इकलौते बेटे रिजवान शाद की मौत के बाद उनके द्वारा स्पांसर किया जा रहा है। रिजवान ने NLIU से ही साइबर लॉ एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में NLIU से मास्टर डिग्री टॉप किया था, लेकिन वर्ष 2013 में सड़क हादसे में मौत हो गई। रिजवान मास्टर डिग्री करने के बाद अमेरिका से पीएचडी करने की तैयारी में था। रिजवान के पिता डॉक्टर अनवर शाद से खास बातचीत…
बेटा रिजवान यहां साइबर लॉ एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में टॉपर था। उसकी वर्ष 2013 में कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। उस समय में रिजवान शाद की यादव में गोल्ड मेडल स्पांसर करने का निर्णय लिया था। वह साइबर लॉ में एमएस कर रहा था। वह शिक्षा के बारे में बहुत सोचता था। विशेष रूप से पीएचडी करना चाहता था। उस दौरान भारत में पीएचडी नहीं होती थी। सिर्फ यूएस में ही होती थी। अपने यहां साइबर लॉ था नहीं।
हर साल गोल्ड मेडल स्पांसर करता हूं। लोग आज भी बोलते हैं कि वह एक्सट्रा ऑर्डनरी था। वो मुझे भी पता था कि वह मैंने अपनी लाइफ के अंदर कम बच्चे ऐसे देखे होंगे। जब वह डिजिटल करेंसी उपयोग करता था, जब वह स्कूल में था। मुझे लगता था कि वह एक्सट्रा ऑर्डनरी है। जो हुआ, वह ईश्वर की मर्जी थी। वो जो हुआ, उसकी कोई उम्मीद नहीं कर सकता। सब बच्चों को मिल जाए। वही एक लेवल पर रहता है। उसने इस कॉलेज के लिए बहुत मेहनत की थी। उसने निजी तौर पर मेहनत की थी। उसकी अंग्रेजी बहुत अच्छी थी। वह जब बोलता था, तो लोगों को डिक्शनरी उठाना पड़ता था। वह दूसरे बच्चों को प्रेरित करता था कि इसे गंभीरता से पढ़ो। बहुत मजा आएगा।
वह इस शिक्षा को इंजॉय करता था। मेरा सपोर्ट रहता था। मेरी और उसकी अलग-अलग फील्ड थी। वह कहता था कि पापा ऑनलाइन किसी को ट्रीटमेंट लिखकर नहीं दिया करो। इसका हैक होने का डर रहता है। उस वक्त करीब 8 साल पहले बताता है। वह कहता था कि इस पर कभी भरोसा नहीं करना। उसने माइकल जैक्सन का भी उदाहरण दिया। उसने कहा कि इसे कोई भी हैक कर सकता है। उसका पता लगाना मुश्किल है। कोरोना के समय जब हम लोगों को ऑनलाइन ट्रीटमेंट दे रहे थे, तब उसकी बातें ध्यान आ रही थीं। उन यादों को ही बनाए रखने के लिए हम भी बच्चों को मोटिवेट करने का प्रयास कर रहे हैं।
रिजवान के नाम पर गोल्ड मेडल
NLIU में साइबर लॉ एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में टॉप करने वाले रिजवान शाद को यूनिवर्सिटी की तरफ से एक सम्मान दिया गया है। उसके नाम पर ही साइबर लॉ एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में गोल्ड मेडल दिया जाने लगा है। इस साल वर्ष 2018, 19 और 2020 के छात्रों को गोल्ड मेडल दिया गया।
रिजवान ने आरजीपीवी से इंजीनियरिंग की
डॉक्टर अनवर ने बताया कि वे मूलत: गुजरात के रहने वाले हैं। वह पत्नी के साथ उज्जैन में रहते हैं। रिजवान ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी से इंफोर्मेशन टेक्नीलॉजी में बीई की थी। उसके बाद उसने NLIU से सायबर लॉ में मास्टर की डिग्री की। वह NLIU से साइबर लॉ एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में मास्टर डिग्री करने वाला बोहरा समाज का पहला छात्र था।

