समता, न्याय और बंधुत्व के रास्ते से ही समावेशी एवं सतत विकास को साकार किया जा सकता है। भारत द्वारा दिए गए पंचशील के सिद्धांत के पांच सूत्र आज भी विश्व शांति की स्थापना के प्रमुख आधार हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ को स्वतंत्र रूप से निष्पक्षता के साथ विश्व शांति की दिशा में काम करना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि इसकी संरचना में परिवर्तन कर सभी राष्ट्रों को सामान महत्व दिया जाए एवं वीटो अधिकार ख़त्म किये जाएं। ये विचार जनवादी लेखक एवं कवी सुरेश उपाध्याय ने स्कूली विद्यार्थियों के लिए “विश्व शांति में भारत की भूमिका” विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किये। प्रतियोगिता का आयोजन अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन तथा एमजीएन पब्लिक स्कूल, इंदौर के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।
महासचिव अरविन्द पोरवाल ने संगठन की भूमिका एवं कार्यों का उल्लेख करते हुआ कहा कि आज विश्व शांति को सबसे बड़ा ख़तरा साम्राज्यवादी आर्थिक और राजनीतिक प्रवृत्तियों से है। विकसित देश दुनिया में भय, आतंक और युद्ध की स्थिति उत्पन्न करते हैं, ताकि उनके सैन्य साजो-समान और हथियार बिक सकें। अखिल भारतीय शांति और एकजुटता संगठन लगातार इन प्रवृत्तियों के खिलाफ एवं विश्व शांति के पक्ष में जन चेतना का कार्य कर रहा है ताकि युद्ध और हथियारों पर होने वाला खर्च मानव विकास के लिए किया जा सके। आज दक्षिण एशिया में शांति कायम रहे , इसमें भारत को नेतृत्वकारी भूमिका निभाना होगी।
प्रतियोगिता में एमएबीएफ़एम अकादमी के हसन खान, ज़ेनिथ पब्लिक स्कूल के ज़ैद असजद और लेडीबर्ड स्कूल की ज़ोया अकरम खान को श्रेष्ठ वक्ता घोषित किया गया। निर्णायक मंडल में प्रोफ़ेसर असद खान , विवेक मेहता एवं विजय दलाल थे। इस दौरान श्री मुकुंद कुलकर्णी, केशरीसिंह चिड़ार एवं योगेंद्र महावर विशेष रूप से उपस्थित थे। सञ्चालन संगठन के सह सचिव शफ़ी शेख ने किया एवं स्वागत एवं आभार प्रदर्शन एमजीएन पब्लिक स्कूल की प्राचार्या नसीम फ़ातेमा ने किया।
अरविन्द पोरवाल
महासचिव
अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन
9425314405

