भोपाल। )। मध्यप्रदेश के आम जन के साथ-साथ भाजपा के नारे के अनुसार अंतिम छोर के व्यक्ति के अनुसार यह जानकारी होगी कि हमारे सरकार के मुखिया जन-जन के हितैषी लोकप्रिय और भांजियों के मामा जिन पर अत्याचार होने की घटनाओं को लेकर मध्यप्रदेश सुर्खियों में बना हुआ है, उन्हीं शिवराज सिंह चौहान के मुखाग्रबिन्द से इस प्रदेश के आमजन के कानों तक यह भनक पहुंची ही होगी जिसको लेकर उन्होंने एक बार नहीं अनेकों बार यह ढिंढोरा पीटा है कि उनके राज्य में भ्रष्ट नेताओ व अधिकारियों के साथ-साथ किसी भी प्रकार के माफियाओं के लिये कोई जगह नहीं है ऐसे लोग इस प्रदेश को छोड़ दें, नहीं तो वह उन्हें जमीन में गाढ़ देंगे? शिवराज सिंह के मुखाग्रबिन्द से इस प्रकार के शब्दों को सुनकर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के शासनकाल के दौरान उनके द्वारा कहे गये उन शब्दों का स्मरण हो आता है जिसमें वह भ्रष्टाचारियों को खंभे पर टांगने की बात किया करते थे लेकिन क्या कोई आमजन या कांग्रेसी यह दावा कर सकता है कि यह घटना बता सकता है कि जिसके चलते नेहरु जी के कार्यकाल में किसी भी भ्रष्टाचारी को खंभे पर टांगा गया हो?
ठीक उसी तरह का जुमला शिवराज सिंह के चौथी बार सत्ता पर काबिज होते ही इस प्रदेश के जनमानस को शिवराज के मुखाग्रबिन्द से सुनने को कई बार मिला लेकिन कांग्रेस के कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अपने पुत्र मोह से उपेक्षित ज्योतिरादित्य सिंधिया के विद्रोह के बाद चौथी बार शिवराज सिंह सत्ता पर जरूर काबिज हो गये लेकिन मध्यप्रदेश की जनता को कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा है कि उनकी उस कार्यशैली में जिसके चलते वह भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने और नर्मदा को अपनी बुढ़ापे की काशी बताने का ढिंढोरा पीटने के बाद उसी नर्मदा में रेत का इस तरह से अवैध उत्खनन चल रह है कि नर्मदा में रेत के अभाव के चलते कई जगह उतना पानी तक नहीं दिखाई देता जो शिवराज के कार्यकाल के पहले नर्मदा में दिखाई देता था। जहां तक अवैध माफियाओं को दस फुट नीचे जमीन में गाढऩे के शिवराज के ढिंढोरे की बात करें तो उनकी बुढ़ापे की काशी नर्मदा में जिस प्रकार का अवैध उत्खनन चल रहा है उन रेत के कारोबारियों के ऊपर आज तक कोई ऐसी कार्यवाही नहीं हुई कि उसे देखकर इस प्रदेश की जनता को यह लगा हो कि शिवराज सरकार माफियाओं के खिलाफ सख्त नजर आ रही है बल्कि इस प्रदेश की जनता ने इसी नर्मदा के अवैध उत्खनन के कारोबार में उनके परिजनों के अवैध रेत से भरे डम्परों को पकड़े जाने की घटनाएं भी सुनने में आई अवैध रेत खनन के इन माफियाओं की यह स्थिति है कि उसे रोकने के लिए शिवराज से लेकर भाजपा नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के मुखाग्र बिन्द से ऐसी-ऐसी घोषणाएं सुनने को मिलती हैं जिन्हें सुनकर लगने लगता है कि अब प्रदेश में माफिया राज खत्म होकर ही रहेगा लेकिन शिवराज का राज हो या कमलनाथ का ऐसा कोई भी नेता की कार्यशैली दिखाई दी जिसमें माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही होते लोगों को दिखाई दी हो, फिर चाहे वह रेत माफिया हो या वनों की अवैध कटाई करने वाला माफिया या फिर अवैध शराब के कारोबार करने वाला माफिया हो या कालाबाजारी ही नहीं बल्कि उन गरीबों के जिनके नाम पर प्रदेश की आबादी के लगभग इस प्रदेश के गरीबों को खाद्यान्न का वितरण किये जाने का दावा किया जाता है उन गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाला भी माफिया जमकर अपने कारोबार को दिन दूना रात चौगना फैलाने में लगा हुआ हो,
माफियाओं को दस फीट जमीन के अंदर गाडऩे का ढिंढोरा पीटने वाले शिवराज के शासनकाल में अवैध शराब के कारोबारियों को जिस तरह से बढ़ावा दिया जा रहा है उसे देखकर तो यही लगता है कि प्रदेश के आमजन को अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिये रात दस बजे के बाद दूध उपलब्ध नहीं होगा लेकिन शराब रात साढ़े ग्यारह बजे तक ही नहीं बल्कि २४ घंटे सुरा पे्रमियों को उपलब्ध हो जाती है, इससे तो यही लगता है कि शराब को अब घर पहुंच सेवा बनाने का काम इस सरकार में जोरों से चलरहा है यह अलग बात है कि सरकार जाने के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्र रमनसिंह व भाजपा के नेता छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाये जा रहे शराब के कारोबार को लेकर विरोध करते नजर आ रहे हैं लेकिन उन्हीं भाजपाई नेताओं की पार्टी की सरकार जो मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह के नेतृत्व में चल रही है उसमें तो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कथनानुसार जिसमें उन्होंने शराक कारोबारी सोम डिस्टलरी के संचालकों के एक आयोजन में अपने उद्बोधन में कहा था कि सोम डिस्टलरी के संचालक अरोरा बंधुओं की तिजोरी पर लक्ष्मी जी की कृपा हमेशा बनी रहे, यह बात जब दिग्विजय सिंह ने कही थी उस समय भाजपा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह के गुरु सुुंदरलाल पटवा भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे और उन्होंने भी अपने उद्बोधन में दिग्विजय सिंह की कामना में सुर में सुर मिलाया था? आज वही इस प्रदेश की जनता को देखने को मिल रहा है कि शिवराज सरकार भी शराब के कारोबारियों की तिजोरी पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहे की कामना किस प्रकार से कर रहे हैं, इस प्रकार की कामना के चलते इस प्रदेश में हाल ही में दो उदाहरण शराब कारोबारियों को किस प्रकार से यह सरकार बढ़ावा दे रही है यह स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में सड़क से लेकर सदन तक हमेशा अपने शराब के कारोबार के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार को बढ़ावा देने को लेकर चर्चित सोम डिस्टलरी के संचालकों पर पिछले दिनों शासन पर सख्ती दिखाने के नाम पर उनका लायसेंस निलंबित किया इस तरह के सोम के खिलाफ की गई कार्यवाही के बाद जो सवाल खड़े हुए हैं वह भी इस प्रदेश की सरकार ही नहीं बल्कि आबकारी विभाग के उन अधिकारियों की जिनकी अनुशंसा पर हमेशा सोम ही नहीं बल्कि शराब उत्पादन करने वाली डिस्टलरियों के संचालकों को लायसेंस रिन्युवल होते रहे, आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव के यहां से जारी आदेश में सोम के संचालकों की तिजोरी पर लक्ष्मी की कृपा की कामना करने की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है, उस आदेश में जिन बिन्दुओं को लेकर सोम डिस्टलरी के लायसेंस रिनुअल को लेकर सवाल खड़े किये गये हैं उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि एक मई १९९८ को विधानसभा के पटल पर रखी जाने वाली याचिका समिति का तीसवां प्रतिवेदन (भाग-दो) में सोम डिस्टलरी के संचालकों को लेकर जो बात कही गई थी वह आज स्पष्टत: अक्षरश: इस शासन की कार्यशैली पर नजर आ रही है,
एक मई १९९८ को विधानसभा में प्रस्तुत प्रतिवेदन में सोम डिस्टलरी के संचालाकें के बारे में कहा गया था कि फैक्ट्री प्रबंधन पर शासन द्वारा कोई कार्यवाही की गई हो इसमें शक है क्योंकि किसी अग्रिम कार्यवाही से समिति को अवगत नहीं कराया गया, साथ ही इसी प्रतिवेदन में समिति ने यह भी कहा था कि आसवनी के प्रबंधक निश्चित ही राजनैतिक, प्रशासनिक रूप से सक्षम हैं और मंडल से लेकर जिला प्रशासन उनके सामने असहाय सिद्ध होता है, इस तरह की टिप्पणी भले ही एक मई १९९८ को विधानसभा पटल पर रखे गए प्रतिवेदन में कही गई हो लेकिन आज भी शिवराज सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली को देखते हुए यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि शिवराज सरकार और उनके प्रशासनिक अधिकारी दिग्विजय सिंह की अरोरा बंधुओं की तिजोरी पर लक्ष्मी की कृपा की कामना के अनुरूप ही कार्य कर रहे हैं। शराब कारोबारी से जुड़ा दूसरा उदाहरण इस प्रदेश में धार जिले की दो शराब उत्पादन फैक्ट्रियों पर आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव के दिशा-निर्देश पर की गई कार्यवाही में भी स्पष्ट दिखा जिसमें उन्होंने अपने ही विभाग के अधिकारियों पर भरोसा न करते हुए इन्दौर के आयुक्त के नेतृत्व में इन शराब फैक्ट्रियों पर कार्यवाही करवाई गई, कार्यवाही के दौरान आयुक्त इन्दौर को शराब फैक्ट्री में पांच ट्रक शराब से लदे गुजरात भेजे जाने की खबरें सुर्खियों में रहीं, यह सभी जानते हैं कि इन्दौर से लेकर झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी के जिलों से शराब गुजरात के लिये शराब की अवैध तस्करी का कारोबार जोर-शोर से फल-फूल रहा है यह सब खेल प्रशासनिक आबकारी विभाग के अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत के साथ-साथ सत्ताधीशों के संरक्षण में फलता-फूलता रहा लेकिन इसे कोई आज तक प्रमाणित नहीं कर पाया लेकिन वह काम आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव की सूझबूझ से धार जिले की दो फैक्ट्रियों में की गई कार्यवाही से उजागर हुआ लेकिन शराब के कारोबारियों पर की गई इस तरह की कार्यवाही के बाद भी शराब के अवैध कारोबार पर विराम न लगना भी यह दर्शाता है कि यह सब खेल उस शासन में जमकर चल रहा है जिस सरकार के मुखिया माफियाओं को दस फीट नीचे जमीन के अंदर गाडऩे की बात अपने मुखाग्रबिन्द से कहते नजर आते हैं? इन शराब निर्माताओं पर की गई कार्यवाही के बाद जो स्थिति सामने आई वह भी अजब-गजब है और उस कार्यवाही में आयुक्त द्वारा की गई कार्यवाही की जांच नॉन-आईएएस से कराना भी तमाम सवाल खड़े करते हैं साथ ही यह भी संकेत देते हैं कि यदि शिवराज सिंह के कार्यकाल की यही कार्यशैली चलती रही तो आने वाले दिनों में आईएएस की जांच करने के लिये एक अदना सा क्लर्क भी नियुक्त किया जा सकता है।
मजे की बात तो यह है कि धार जिले की इन शराब फैक्ट्रियों पर की गई कार्यवाही के बाद शराब के कारोबारियों को कुछ ऐसा लगा कि अब प्रदेश में शराब के कारोबार पर सरकार की नजरें इनायतें खत्म होने वाली हैं लेकिन इस घटना के कुछ ही दिनों बाद जब उसी धार जिले की एक शराब फैक्ट्री ग्रेड गैलन वेंचर्स लिमिटेड जिला धार से शहडोल शासकीय वेयर हाउस ले जाई जा रही शराब से भरा एक ट्रक जबलपुर के आधारताल थाने के प्रभारी शैलेष मिश्रा द्वारा शराब से लदे ट्रक की जांच की गई तो वह अवैध पाया गया जिसमें ५८ लाख रुपये कीमत की ६५३७९ पाव अंग्रेजी एवं १५८ पाव देशी शराब जप्त की गई यह घटना यह उजागर करती है कि सरकार के मुखिया शिवराज सिंह माफियाओं को दस फीट नीचे जमीन में गाडऩे का ढिंढोरा भले ही पीटें लेकिन प्रशासन में बैठे अधिकारी जिनमें खासकर प्रमुख सचिव आबकारी की सूझबूझ से शराब के अवैध कारोबार को खत्म करने की दिशा में भले ही दिखावा किया जा रहा हो लेकिन हकीकत तो यही है कि उनके द्वारा जिस शराब फैक्ट्री पर कार्यवाही करवाई गई थी उन्हीं में से एक शराब फैक्ट्री द्वारा शासकीय वेयर हाउस में पूर्ति करने के नाम पर अवैध शराब के कारोबार को अंजाम दिये जाने में कोई हिचक महसूस नहीं की जा रही है और वह भी उस शराब उत्पादन डिस्टरलरी से जिसमें इंदौर आयुक्त की कार्यवाही के दौरान पांच ट्रक शराब से लदे गुजरात जाने के लिये खड़े होने की खबरें सुर्खियों में हैं। यह शराब कारोबारियों के खिलाफ सरकार द्वारा की गई दो घटनायें इस बात को उजागर करती हैं कि प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिये शासन केवल दिखावे का ही काम करती नजर आ रहा है लेकिन शासन द्वारा की गई कार्यवाही की हकीकत की बानगी तो इसी बात से उजागर होती है कि जिस शराब निर्माता कम्पनी में पांच ट्रक गुजरात ले जाने के लिये खड़े पाये गये हों उस घटना के बाद धार से शहडोल सरकारी वेयर हाउस को पहुंचाई जाने वाली ८५ लाख रुपये की कीमती शराब आखिर १३०० पेटी अंग्रेजी शराब की इस फैक्ट्री से कैसे निकल गई, हालांकि आबकारी विभाग के वर्तमान आयुक्त के चहेतों के बारे में यह चर्चा है कि कोई अधिकारी अपने आपको आयुक्त का दत्तक पुत्र बताता है तो कुछ बताकर अपना रुतबा बताने में कसर नहीं छोड़ रहा है।
कुल मिलाकर जिस सरकार के मुखिया द्वारा माफियाओं को दस फीट नीचे जमीन में गाडऩे कस ढिंढोरा अपने मुखाग्रबिन्द से किया जा रहा हो उसी सरकार में बैठे प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली के चलते अवैध शराब पर रोक लगने की बजाये उसे फलने-फूलने देने की मौन स्वीकृति भी कई सवाल खड़े करती है और इसका जीता-जागता उदाहरण सोम डिस्टलरी और धार जिले की वह शराब डिस्टलरियां हैं जिन पर हाल ही में कार्रवाई की गई लेकिन उसके बाद भी पर्दे के पीछे की क्या राजनीति है यह भी जबलपुर के थाने आधारताल के प्रभरी द्वारा धार जिले से शहडोल जा रहे शराब से लदे ट्रक के खिलाफ की गई कार्यवाही ने उजागर कर दिया तो वहीं सोम डिस्टलरी को लेकर प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश में भी उन दोषी आबकारी विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं जिनकी रिपोर्ट पर सोम डिस्टलरी का लायसेंस प्रतिवर्ष नवीनीकरण होता रहा, पता नहीं अब धार जिले की इस शराब फैक्ट्री से पकड़े गये अवैध शराब से लदे ट्रकों की कहानी क्या सामने आती है इसके लिये अभी प्रतीक्षा करनी होगी। उसके बाद ही इस सरकार की कार्यशैली की कुछ झलक सामने आ सकेगी?
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