देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट की तरफ से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और इसमें अमर उजाला की रिपोर्ट का जिक्र किया जाना सबसे बड़ी खबर रही। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से घोषित 175 बिलियन डॉलर की गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड परियोजना भी सुर्खियों में है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबरों में पाकिस्तान में आतंकी संगठन के सह-संस्थापक हमजा पर जानलेवा हमले और उसकी हालत नाजुक होने की खबर भी चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज का रिटायर होने से केवल 13 दिन पहले पद छोड़ना और विदाई समारोह में ‘गलत इरादे से तबादला’ किए जाने का बयान भी चर्चा में है। तकनीक की दुनिया में गूगल की सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस और इसमें सीईओ सुंदर पिचाई की तरफ से किए गए बड़े एलान सुर्खियों में रहे। खेल जगत में आईपीएल में जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स की विदाई की खबर चर्चा में रही, जबकि मनोरंजन और सिनेमा जगत में अभिनेता आमिर खान की पत्नी रहीं निर्माता किरन राव को शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बतौर जूरी चुने जाने की खबर सर्वाधिक चर्चा में रही। इसके अलावा व्यापार जगत में भारत में गेहूं के बंपर उत्पादन के कारण महंगाई के मोर्चे पर राहत के आसार की खबर सुर्खियों में रही।
मुर्शिदाबाद जिले में हिंदुओं को निशाना बनाया, पुलिस मूकदर्शक
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पिछले महीने भड़की हिंसा में राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का एक नेता शामिल था। हिंसा के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया। इस दौरान पुलिस कहीं मूकदर्शक बनी रही, तो कहीं मौके पर नहीं पहुंची। हिंसा की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में ये बातें कही हैं। वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में यह हिंसा भड़की थी।

उच्च न्यायालय की जांच समिति में क्या है?
कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायाधीश सौमेन सेन और राजाबसु चौधरी की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को पेश रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हैं। बताया गया कि मुख्य हमला शुक्रवार, 11 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे के बाद हुआ, जिसका नेतृत्व स्थानीय पार्षद महबूब आलम कर रहा था। उसके साथ हजारों लोग थे। बेदवना गांव में 113 घरों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया, जो रहने लायक नहीं रह गए हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को समिति गठित की थी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण और न्यायिक सेवा के सदस्यों वाली समिति ने रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि हिंसा का निशाना हिंदू समुदाय था। बेदवना गांव में तृणमूल विधायक अमीरुल इस्लाम भी आए और देखा कि किन घरों पर हमला नहीं हुआ है, फिर हमलावरों ने उन घरों में आग लगा दी। यह सब विधायक के सामने हुआ, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया और मौके से चले गए। पीड़ितों ने मदद के लिए पुलिस को फोन किया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने हिंसा के पीड़ितों की पहचान और पुनर्वास के लिए 17 अप्रैल को समिति गठित की थी।
मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान वाहन में लगाई आग
साजिश: पानी के कनेक्शन तक काटे ताकि आग न बुझा पाएं
रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में बड़े पैमाने पर आगजनी, लूटपाट हुई और दुकानों व मॉल को नष्ट किया गया। हमलावर शमशेरगंज, हिजालताला, शिउलिताला, डिगरी के ही रहने वाले थे और अपना चेहरा ढंककर आए थे। हमलावरों ने पानी के कनेक्शन भी काट दिए, ताकि आग बुझाई न जा सके। हमले से गांव की महिलाओं में दहशत व्याप्त हो गई थी और उन्होंने दूसरी जगहों पर अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली।
मुर्शिदाबाद में सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ जनाक्रोश (फाइल)
मंदिरों को भी नुकसान
जांच समिति ने कहा कि हिंसा के दौरान हमलावरों ने जमकर उत्पात मचाया। किराना, हार्डवेयर, बिजली और कपड़े की दुकानों के साथ ही मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। यह सब पुलिस थाने के 300 मीटर के दायरे में ही हुआ। अकेले घोषपाड़ा इलाके में ही 29 दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। समिति ने यह रिपोर्ट प्रभावित गांवों का दौरा करने और पीड़ितों से बातचीत करने के बाद तैयार की है।
पीड़ितों को राहत के लिए अदालत की सख्ती (सांकेतिक तस्वीर
हाईकोर्ट ने कहा-पीड़ितों को पुनर्वास पैकेज मिले
पीठ ने कहा कि समिति ने रिपोर्ट में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों को पुनर्वास पैकेज देने की जरूरत बताई है। इसका मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की सलाह भी दी है। यह भी कहा कि नागरिकों के एक वर्ग को सुरक्षा देने में नाकाम रही राज्य सरकार की ओर से अपनी विफलता की भरपाई करने का यही एकमात्र उपाय है।
ममता बनर्जी
ममता सरकार ने भी सौंपी रिपोर्ट… दावा, पुलिस ने काबू किए हालात
हाईकोर्ट की तरफ से गठित समिति से इतर पश्चिम बंगाल सरकार ने भी हाईकोर्ट की खंडपीठ को एक रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है, पुलिस और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सुती, धुलियान, शमशेरगंज और जंगीपुर में स्थिति नियंत्रण में आई। रिपोर्ट के अनुसार, वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ 4 अप्रैल से ही मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। 12 अप्रैल को शमशेरगंज में भीड़ ने हरगोविंद दास और उनके पुत्र चंदन दास की हत्या कर दी। शमशेरगंज में 11 अप्रैल को ही केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर 12 अप्रैल को तैनाती बढ़ाई गई थी।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर बनें फील्ड मार्शल
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को देश के सर्वोच्च सैन्य पद फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है। सीओएएस जनरल असीम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास में दूसरे फील्ड मार्शल बन गए हैं। इससे पहले अयूब खान 1959-1967 के बीच इस पद पर थे। जनरल मुनीर को यह पद भारतीय सेना के हाथों करारी हार के बाद दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि शहबाज सरकार ने सेना का टूटा हुआ हौसला बनाने के लिए मुनीर को सम्मानित करने का फैसला किया है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को देश के सर्वोच्च सैन्य पद फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है। सीओएएस जनरल असीम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास में दूसरे फील्ड मार्शल बन गए हैं। इससे पहले अयूब खान 1959-1967 के बीच इस पद पर थे। जनरल मुनीर को यह पद भारतीय सेना के हाथों करारी हार के बाद दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि शहबाज सरकार ने सेना का टूटा हुआ हौसला बनाने के लिए मुनीर को सम्मानित करने का फैसला किया है।
पाकिस्तान ने वायुसेना प्रमुख का कार्यकाल भी बढ़ाया
पाकिस्तान सरकार ने इसके अलावा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू की सेवा अवधि भारत के साथ संघर्ष के दौरान उनके योगदान के लिए सर्वसम्मति से बढ़ा दी गई है। भारत के साथ हाल के झड़पों में सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तानी वायुसेना को ही हुआ है। भारत ने पाकिस्तान के 11 वायुसेना अड्डों पर सटीक हमले किए थे। इन हमलों में पाकिस्तानी वायुसेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
माना जा रहा है कि शहबाज शरीफ फील्ड मार्शल का पद देकर आसिम मुनीर के पुराने अहसानों की भरपाई कर रहे हैं। दरअसल, आसिम मुनीर ने ही इस साल फरवरी में हुए आम चुनावों में शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज को जीत दिलवाई थी। पाकिस्तान के चुनावों में सेना के हस्तक्षेप पर बड़े पैमाने पर सवाल भी उठे थे। इतना ही नहीं, आसिम मुनीर ने ही शहबाज के रास्ते का सबसे बड़ा कांटा इमरान खान को हटाया था।
आसिम मुनीर के साथ पाकिस्तान सरकार
आसिम मुनीर भारत के हमलों को रोकने में नाकाम रहने के कारण विरोधियों के निशाने पर हैं। पूरे पाकिस्तान में आसिम मुनीर के खिलाफ एक विरोध की लहर है। पाकिस्तान के आम लोग आसिम मुनीर को सेना प्रमुख के पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में शहबाज शरीफ ने फील्ड मार्शल का पद देकर यह दिखा दिया है कि पाकिस्तान सरकार आसिम मुनीर के साथ मजबूती से खड़ी है।
आसिम-शहबाज का पंजाबी कनेक्शन
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ दोनों पंजाब से आते हैं। पाकिस्तान के हर सरकारी क्षेत्र में इसी सूबे के लोगों का दबदबा है। इस कारण कई बार पाकिस्तान में विद्रोह जैसे हालात भी बने हैं। इसके बावजूद पंजाब सूबे के लोग सरकारी क्षेत्र में वर्चस्व जमाए हुए हैं।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद के बीच तालिबान का उमड़ा भारत पर प्यार
जब अगस्त 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो भारत ने तुरंत काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कमजोर हो गए। पाकिस्तान में तो इस बात का जश्न मनाया गया। पाकिस्तान ने बड़े फक्र के साथ इस बात का प्रचार किया था कि उसने अफगानिस्तान में भारत के निवेश को डूबा दिया है। पर किसको पता था कि पाकिस्तान का अफगानिस्तान में जीत का जश्न मातम में बदलने वाला है।
जब अगस्त 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो भारत ने तुरंत काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कमजोर हो गए। पाकिस्तान में तो इस बात का जश्न मनाया गया। पाकिस्तान ने बड़े फक्र के साथ इस बात का प्रचार किया था कि उसने अफगानिस्तान में भारत के निवेश को डूबा दिया है। पर किसको पता था कि पाकिस्तान का अफगानिस्तान में जीत का जश्न मातम में बदलने वाला है। आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं। इस बीच संकेत मिल रहे हैं कि भारत और अफगानिस्तान चुपचाप अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से स्थापित कर सकते हैं।
विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत
15 मई को विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के साथ तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद पहली बार बातचीत की। इस बातचीत को कूटनीतिक संबंधों को फिर से जीवंत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया। कॉल के दौरान, मुत्ताकी ने पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले की निंदा की, जिसके लिए जयशंकर ने “गहरी सराहना” की। जयशंकर ने अफगान लोगों के साथ भारत की पारंपरिक मित्रता की पुष्टि की और भविष्य में सहयोग के लिए, विशेष रूप से विकास के क्षेत्र में, अवसरों की तलाश करने की आवश्यकता पर बल दिया।अटारी-वाघा सीमा पर भारत का “विशेष इशारा“
भारत ने पिछले सप्ताह अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से अफगानिस्तान से 160 ट्रकों को प्रवेश की अनुमति दी। ये ट्रक सूखे मेवे और दूसरे सामानों से भरे हुए थे, जो अफगानिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात है। हालांकि भारत तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता है, लेकिन वह जून 2022 से काबुल में एक तकनीकी मिशन संचालित कर रहा है। इतना ही नहीं, भारत ने अफगानिस्तान की मदद को भी जारी रखा है। इसमें अनाज और दवाइयां शामिल हैं।
भारत में मौजूदगी बढ़ाएगी तालिबान सरकार
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में, तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और विदेशी निवेश को आमंत्रित करने की अफगानिस्तान की इच्छा को व्यक्त किया था। उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान के भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। इसे नवीनीकृत करने की आवश्यकता है।” ऐसा माना जा रहा है कि भारत जल्द ही तालिबान सरकार द्वारा नियुक्त राजनयिकों को दिल्ली में तैनात करने की आधिकारिक मंजूरी दे सकता है। हालांकि, तालिबान के राजनयिक पहले से ही नई दिल्ली और मुंबई में अफगान दूतावास और वाणिज्य दूतावास में तैनात हैं।
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच देश में सियासी घमासान
भारत-पाकिस्तान टेंशन के बीच देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों पार्टियों के बीच जबरदस्त पोस्टर वॉर छिड़ गया है। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर साल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर बीजेपी की ओर से शेयर की गई है। वहीं जवाब में कांग्रेस की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की फोटो शेयर की गई।
भारत-पाकिस्तान टेंशन के बीच देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों पार्टियों के बीच जबरदस्त पोस्टर वॉर छिड़ गया है। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर साल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर बीजेपी की ओर से शेयर की गई है। वहीं जवाब में कांग्रेस की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की फोटो शेयर की गई।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस लगातार प्रश्न उठा रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विदेश मंत्री एस जयशंकर की टिप्पणी को आधार बनाकर सवाल दाग रहे हैं तो कई नेता सबूत की तलाश कर रहे हैं। बीजेपी ने मुख्य विपक्षी दल के इस रवैए पर तंज कसा है।
असम सरकार के मंत्री अशोक सिंघल के विवादित पोस्ट के बाद पार्टी की मीडिया सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने भी कुछ सवाल पूछे हैं। अशोक सिंघल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने राहुल गांधी की तस्वीर को पाक आर्मी चीफ की तस्वीर के साथ जोड़कर शेयर किया। इस तस्वीर के आधे हिस्से में राहुल गांधी का चेहरा और आधे में पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर का चेहरा लगाया गया है। अशोक सिंघल ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘सीमाओं से अलग एजेंडे पर एक।’
वहीं, बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी मंगलवार को सिलसिलेवार तरीके से एक्स पर कुछ पोस्ट डाले। एक कार्टून पोस्ट किया जिसमें पाक जनरल की पीठ पर खड़े होकर एक शख्स सरहद के पार देख गिराए गए रफेल की जानकारी मांग रहा है। इसके साथ ही मालवीय ने एक दूसरी पोस्ट में सिंघल वाली तस्वीर साझा कर लिखा- यह आश्चर्य की बात नहीं है कि राहुल गांधी पाकिस्तान और उसके हितैषियों की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए बधाई नहीं दी, जो स्पष्ट रूप से भारत के प्रभुत्व को दर्शाता है। इसके बजाय, वे बार-बार पूछते हैं कि हमने कितने जेट खो दिए- एक सवाल जिसका जवाब पहले ही डीजीएमओ ब्रीफिंग में दे चुके हैं।
पोस्टर वॉर की जंग में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की फोटो शेयर की गई। इस मामले को लेकर भी कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोंकझोक चल रही है।
भारत के पड़ोसी मुस्लिम देश का दौरा कर सकती हैं इटली की PM मेलोनी
इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अगस्त के आखिरी सप्ताह में बांग्लादेश का आधिकारिक दौरा कर सकती हैं। उनका यह दौरा तब होगा, जब कुछ दिनों पहले ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बांग्लादेश की सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मिलने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश और इटली संबंधों को मजबूत करने के लिए मुख्य क्षेत्रों में अधिक सहयोग पर विचार कर रहे हैं। मेलोनी की यात्रा की तैयारियों को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों की बीच उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं।
इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अगस्त के आखिरी सप्ताह में बांग्लादेश का आधिकारिक दौरा कर सकती हैं। उनका यह दौरा तब होगा, जब कुछ दिनों पहले ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बांग्लादेश की सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मिलने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश और इटली संबंधों को मजबूत करने के लिए मुख्य क्षेत्रों में अधिक सहयोग पर विचार कर रहे हैं। मेलोनी की यात्रा की तैयारियों को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों की बीच उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं।
मेलोनी की बांग्लादेश यात्रा की तैयारियां जारी
यूएनबी की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के अधिकारी अब यात्रा को सफल बनाने के लिए चीजों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश का दौरा करने वाले इटली के गृह मंत्री मैटेओ पियांटेडोसी ने मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को बताया कि इटली बांग्लादेश से और अधिक लोगों को काम पर रखने के लिए तैयार है और देश से सुरक्षित प्रवास सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा।
इटली के गृह मंत्री ने की दौरे की पुष्टि
अधिकारियों ने बताया कि मैटेओ ने मुख्य सलाहकार को बताया कि इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सितंबर से पहले किसी समय बांग्लादेश का दौरा कर सकती हैं, क्योंकि रोम ढाका के साथ अपने द्विपक्षीय सहयोग को ‘नवीनीकृत’ और ‘रीस्टार्ट’ करने के लिए उत्सुक है। मुख्य सलाहकार ने कहा कि बांग्लादेश अवैध प्रवास और मानव तस्करी को रोकने के लिए इटली के साथ काम करने के लिए उत्सुक है। मोहम्मद यूनुस ने कहा, “इटली में रहने वाले बांग्लादेशी मेजबान देश के बहुत आभारी हैं और इटली में उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया जाता है, उसकी वे सराहना करते हैं।”
सितंबर 2024 में मिले थे मेलोनी और यूनुस
पिछले साल सितंबर में 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान मेलोनी ने बांग्लादेश में सुधार प्रक्रिया और आबादी की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में सुधार के मुख्य लक्ष्य के लिए इटली के समर्थन को व्यक्त किया। बैठक में प्रवासन पर चर्चा भी हुई थी, जिसमें इस मुद्दे पर सहयोग को मजबूत करने का इरादा जताया गया था।
14 साल के वैभव सूर्यवंशी के तूफान में उड़ी सीएसके की टीम
वैभव सूर्यवंशी की दमदार अर्धशतकीय पारी की मदद से राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 6 विकेट से हरा दिया। इस राजस्थान की टीम आईपीएल 2025 में अपने सफर का अंत जीत के साथ किया। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतने के बाद सीएसके को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया था। सीएसके की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर के खेल में 8 विकेट के नुकसान पर 187 रन का स्कोर कड़ा किया था। इसके जवाब में राजस्थान ने 17 गेंद रहते ही मैच को अपने नाम कर लिया।
वैभव सूर्यवंशी की दमदार अर्धशतकीय पारी की मदद से राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 6 विकेट से हरा दिया। इस राजस्थान की टीम आईपीएल 2025 में अपने सफर का अंत जीत के साथ किया। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतने के बाद सीएसके को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया था। सीएसके की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर के खेल में 8 विकेट के नुकसान पर 187 रन का स्कोर कड़ा किया था। इसके जवाब में राजस्थान ने 17 गेंद रहते ही मैच को अपने नाम कर लिया।
राजस्थान के लिए लक्ष्य का पीछा करने उतरे यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर टीम को सधी हुई शुरुआत दिलाई। यशस्वी ने शुरू में राजस्थान के लिए मोर्चा संभालते हुए धुआंधार बैटिंग की। हालांकि, तेज तर्रार पारी की कोशिश में यशस्वी अंशुल कंबोज की गेंद पर बोल्ड हो गए। यशस्वी ने 19 गेंद में 5 चौके और 2 छक्के की मदद से 36 रनों की पारी खेली। वहीं दूसरी तरफ वैभव की शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन क्रीज पर सेट होने के बाद उन्होंने ने भी अपना गियर बदल लिया।
वैभव ने 27 गेंद में लगाई राजस्थान के लिए फिफ्टी
धीमी शुरुआत के बाद वैभव को कप्तान संजू सैमसन का भी बेहतरीन साथ मिला। वैभव ने इस दौरान 27 गेंद में सिक्स के साथ अपनी फिफ्टी पूरी की। वैभव की फिफ्टी पूरी होने के बाद कप्तान संजू सैमसन 31 गेंद में 41 रन बनाकर आउट हो गए। संजू के आउट होते ही वैभव भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं टिक सके और 33 गेंद में 57 रनों की पारी खेल आउट हो गए। वैभव ने अपनी इस पारी में 4 चौके और 4 छक्के भी लगाए।
वैभव के आउट होने के बाद रियान पराग और ध्रुव जुरेल पर जिम्मेदारी थी कि वह टीम को एक आसान जीत की तरफ ले जाए, लेकिन नूर अहमद ने रियान पराग को अपनी फिरकी में फंसा उन्हें आउट कर दिया। रियान के बाद ऐसा लगा कि सीएसके की टीम ने मैच में वापसी कर ली है, लेकिन उसके गेंदबाज दिशाहीन रहे और मौके का फायदा नहीं उठा सके। ऐसे में ध्रुव जुरेल के साथ शिमरन हेटमायर ने कोई गलती नहीं की टीम को 17 गेंद रहते ही टीम को जीत दिला दी। राजस्थान के लिए ध्रुव जुरेल ने 12 गेंद में 31 रनों की पारी खेली, जबकि हेटमायर ने 5 गेंद में 12 रनों का योगदान दिया।
सीएसके की बल्लेबाजी नहीं कुछ खास
राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इस मुकाबले में सीएसके की बल्लेबाजी कुछ खास नहीं रही। सीएसके लिए पारी की शुरुआत करने उतरे डेवोन कॉन्वे और आयुष म्हात्रे जल्दी आउट हो गए। हालात ऐसी थी कि सीएसके ने 100 रन के भीतर 5 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन डेवाल्ड ब्रेविस और शिवम दुबे ने मिलकर टीम के स्कोर को किसी तरह 150 रन के पार पहुंचाया।
IPL इतिहास के 5 सबसे लंबे छक्के, लिस्ट में दूसरे नंबर पर एक गेंदबाज का नाम
एल्बी मोर्कल ने आईपीएल के इतिहास में सबसे लंबा छक्का मारा है। उन्होंने 2008 में डेक्कन चार्जर्स के स्पिनर प्रज्ञान ओझा को 125 मीटर का छक्का लगाया था। 18 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन यह रिकॉर्ड अभी तक नहीं टूटा है। प्रज्ञान ओझा की गेंद मोर्कल के पैड की तरफ थी। मोर्कल ने उसे मिडविकेट के ऊपर से स्टेडियम के बाहर मार दिया। आज तक यह आईपीएल का सबसे लंबा छक्का है। पूर्व तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार का नाम सबसे लंबे छक्के मारने वालों की लिस्ट में चौंकाने वाला है। गेल, कोहली और एबी डी विलियर्स जैसे बड़े नामों के बावजूद, बैंगलोर टीम के लिए सबसे लंबा छक्का प्रवीण कुमार ने मारा है। 2008 के सीजन में कुमार ने यूसुफ पठान की गेंद को लॉन्ग-ऑन के ऊपर से मारा। गेंद छत से बाल-बाल बची। उन्होंने 124 मीटर का छक्का मारा। धर्मशाला के खूबसूरत स्टेडियम में एडम गिलक्रिस्ट ने आरसीबी के खिलाफ एक मैच में चार्ल्स लेंगेवेल्ट की धीमी गेंद को भांप लिया। उन्होंने उसे मिडविकेट के ऊपर से मारा। गेंद मैदान से बाहर चली गई और कहीं दूसरे मैदान में जाकर गिरी। यह छक्का 122 मीटर का था। पिछले 15 सालों से ड्वेन ब्रावो इंडियन टी20 लीग में सबसे अच्छे डेथ-ओवर गेंदबाज रहे हैं। लेकिन एक बार उन्हें टूर्नामेंट के सबसे बड़े छक्कों में से एक का सामना करना पड़ा। रॉबिन उथप्पा ने एक लेंथ बॉल को जल्दी भांप लिया। उन्होंने गेंद को इतनी जोर से मारा कि वह वानखेड़े स्टेडियम में भीड़ में गायब हो गई। साल 2010 में उन्होंने 120 मीटर का छक्का लगाया था। आरसीबी के लिए खेलते हुए पुणे वॉरियर्स के खिलाफ क्रिस गेल ने 66 गेंदों में 175 रन बनाए। उन्होंने 17 छक्के मारे। उनमें से सबसे लंबा 119 मीटर का था। अली मुर्तजा ने एक गेंद स्लॉट में डाली। गेल ने उसे लॉन्ग-ऑन के ऊपर से चिन्नास्वामी स्टेडियम की छत पर मार दिया।
डेवाल्ड ब्रेविस सीएसके के लिए 25 गेंद में 42 रनों की पारी खेली। इसके अलावा शिवम दुबे ने 32 गेंद में 39 रनों का योगदान दिया। वहीं पारी की शुरुआत करने उतरे आयुष म्हात्रे भी 20 गेंद में 43 रनों की पारी खेली। इसके अलावा गेंदबाजी की बात करें तो राजस्थान की तरफ से आकाश मधवाल और युद्धवीर सिंह ने तीन-तीन विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा तुषार देशपांडे और वानिंदु हसरंगा ने एक-एक विकेट हासिल किए।
विदेशी मिसाइल हमलों के खिलाफ अमेरिकी कवच ‘गोल्डन डोम’; राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने देश के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का जिक्र करते हुए कहा, मिसाइल हमले से बचाव के लिए ये तकनीक पहले उपलब्ध नहीं थी, लेकिन वे यह ऐतिहासिक घोषणा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड की मदद से विदेशी मिसाइल हमलों से बचाव करेगा। इसकी लागत 175 बिलियन डॉलर आएगी।
विदेशी मिसाइल हमले के खतरे से बचाने के लिए अमेरिका में अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस शील्ड
गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड से जुड़ी घोषणा को लेकर व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक वीडियो संदेश में ट्रंप ने कहा, ‘यह कुछ ऐसा है जो हमारे पास होगा। हम इसे उच्चतम स्तर पर रखने जा रहे हैं… चुनाव प्रचार के दौरान, मैंने अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि मैं अपने देश को विदेशी मिसाइल हमले के खतरे से बचाने के लिए अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस शील्ड बनाऊंगा। हम आज यही कर रहे हैं।’ प्रशासन के मुताबिक डोम की लागत 175 बिलियन डॉलर आएगी।
पाकिस्तान में लश्कर के आतंकी हमजा पर जानलेवा हमला
पाकिस्तान में एक और आतंकवादी पर जानलेवा हमला हुआ है। हाफिज सईद के साथ मिलकर आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की स्थापना करने वाले हमजा पर लाहौर में कुछ अज्ञात लोगों ने फायरिंग की। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत बेहद ही गंभीर बताई गई है। दो दिन पहले ही हाफिज के ही करीबी अबु सैफुल्ला खालिद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हालांकि, आधिकारिक स्रोत से हमजा पर हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
पहले लाहौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर सेना के बेस अस्पताल में भेजा गया
जानकारी के अनुसार, मंगलवार की शाम कुछ लोग हमजा को लाहौर के अस्पताल में लेकर पहुंचे। उसके शरीर पर चोट के कई निशान पाए गए। उसके नामक, सिर और शरीर के कई अन्य जगहों से खून बह रहा था। बताया जा रहा है कि उसकी गंभीर हालात को देखते हुए उसे सेना के बेस अस्पताल भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हमजा पर हमला किया गया है। हालांकि, यह भी दावा किया जा रहा है कि वह अपने घर में किसी दुर्घटना का शिकार हो गया और उसमें चोटें लग गईं।
मुंबई हमले का मोस्ट वांटेड
घोषित आतंकी हाफिज सईद का करीबी नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले का मोस्ट वांटेड अपराधी है। अमेरिका ने उसे 2012 में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था। वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला का रहने वाला है। बताया जाता है कि हाफिज सईद कोई भी काम हमजा से पूछे बिना नहीं करता था। हमजा लश्कर के मुखौटा संगठन जमात-उत-दावा का भी प्रमुख था, जो मुख्य तौर पर लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग उगाने का काम करता है। वह आतंक के रास्ते पर चलने के लिए युवाओं का ब्रेन-वॉश भी करता है।
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जस्टिस डीवी रमण ने कहा, मैंने 19 जुलाई, 2024 को और फिर 28 अगस्त, 2024 को सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किए, जिसमें अपनी पत्नी की चिकित्सा स्थिति की गंभीरता को दोहराया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, लेकिन इन अभ्यावेदनों पर न तो विचार किया गया और न ही इसे अस्वीकार किया गया। पिछले मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल के दौरान की गई एक अन्य अपील भी अनुत्तरित रही।
अपने आखिरी कार्यदिवस मंगलवार को अपने विदाई समारोह में स्थिर लेकिन दर्द से भरी हुई आवाज में जस्टिस रमण ने कहा, यह मेरे जीवन का एक उल्लेखनीय दौर था। मुझे बिना किसी स्पष्टीकरण के आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। अपनी पत्नी की पैरोक्सिस्मल नॉन-एपिलेप्टिक सीजर्स (पीएनईएस) से लड़ाई और कोविड-19 महामारी के बाद गंभीर मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, मुझसे विकल्प पूछे गए थे। मैंने कर्नाटक को चुना, ताकि मेरी पत्नी को बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन एक पति की करुणा से उपजी ईमानदार विनती अनसुनी कर दी गई।
मेरे अभ्यावेदनों पर न तो विचार किया गया, न अस्वीकार
जस्टिस रमण ने कहा, मैंने 19 जुलाई, 2024 को और फिर 28 अगस्त, 2024 को सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किए, जिसमें अपनी पत्नी की चिकित्सा स्थिति की गंभीरता को दोहराया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, लेकिन इन अभ्यावेदनों पर न तो विचार किया गया और न ही इसे अस्वीकार किया गया। पिछले मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल के दौरान की गई एक अन्य अपील भी अनुत्तरित रही। उन्होंने कहा, मुझे कोई जवाब नहीं मिला। मेरे जैसे न्यायाधीश को कम से कम मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा होती है। मैं निराश और बहुत दुखी हूं।
तबादला करने वाले भी किसी तरह से पीड़ित होंगे
उन्होंने माना कि वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई शायद अधिक सहानुभूतिपूर्ण होते – लेकिन यह बहुत देर से हुआ क्योंकि मैं पद छोड़ रहा हूं। न्यायमूर्ति रमण ने कहा, तबादला मुझे परेशान करने के गलत इरादे से किया गया था। मुझे पीड़ा हुई क्योंकि स्पष्ट कारणों से मेरे गृह राज्य से मुझे स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने अदृश्य शक्तियों का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा। मैं उनके अहंकार को संतुष्ट करके खुश हूं। अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ईश्वर न तो माफ करते हैं और न ही भूलते हैं। वे भी किसी और तरीके से पीड़ित होंगे।
हर उपलब्धि कठिनाइयों के बाद ही मिली
जस्टिस रमण ने कहा कि न्यायिक सेवा में शामिल होने के क्षण से ही, उन्हें षड्यंत्रकारी जांच का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, मेरे परिवार ने चुपचाप सहा है, लेकिन अंततः सत्य की जीत होती है। उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के शब्दों का हवाला दिया, किसी व्यक्ति को आंकने का पैमाना यह नहीं है कि वह आराम और सुविधा के क्षणों में कहां खड़ा है, बल्कि यह है कि वह चुनौती और विवाद के समय कहां खड़ा है। जस्टिस रमण ने जोर देकर कहा कि उनके जीवन में हर उपलब्धि असफलताओं और कठिनाइयों को सहने के बाद मिली है।
नौ दिन में रक्त कैंसर खत्म.. भारत के डॉक्टरों ने हासिल की बड़ी कामयाबी
भारत के डॉक्टरों ने नौ दिन में रक्त कैंसर खत्म करने का दावा किया है। कैंसर के इलाज में यह बड़ी कामयाबी है। तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर के डॉक्टरों ने आईसीएमआर के साथ मिलकर परीक्षण किया है। इसे वेलकारटी (VELCART Trial) नाम दिया गया है। पहली बार कार-टी सेल्स को अस्पताल में ही बनाकर दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि 80% मरीजों में 15 माह बाद भी कैंसर नहीं मिला।
आईसीएमआर के मुताबिक, यह ट्रायल दिखाता है कि कैंसर का इलाज सस्ता, तेज, और मरीजों के करीब कैसे किया जा सकता है। भारत अब स्वदेशी बायो थेरेपी को विकसित करने में अग्रणी बन रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भी अहम है। यह सफलता आईसीएमआर और सीएमसी वेल्लोर के एक क्लिनिकल ट्रायल में हासिल हुई है, जिसे वेलकारटी नाम दिया है। इस परीक्षण के परिणाम मोलिक्यूलर थेरेपी ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
जर्नल में प्रकाशित विवरणों के मुताबिक डॉक्टरों ने कार-टी थेरेपी के जरिये एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल) और लार्ज बी-सेल लिम्फोमा (एलबीसीएल) के मरीजों पर परीक्षण किया। यह दोनों ही रक्त कैंसर के प्रकार हैं। इस प्रक्रिया में मरीज के अपने टी-सेल्स (प्रतिरक्षा कोशिकाओं) को कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया। हालांकि भारत में कार-टी थेरेपी का यह पहला अध्ययन नहीं है। इम्यूनो एक्ट और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई ने मिलकर पहली स्वदेशी थेरेपी विकसित की जिसे 2023 में केंद्र से अनुमति भी मिली है।
कैंसर (प्रतीकात्मक)
पहले ट्रायल में ऐसे मिले परिणाम
आईसीएमआर ने ट्रायल परिणाम जारी करते हुए बताया कि एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल) कैंसर से प्रभावित सभी मरीज ठीक हो गए, जबकि लार्ज बी-सेल लिम्फोमा (एलबीसीएल) रोगियों में से 50% रोग मुक्त हुए। दोनों तरह के मरीजों पर लंबे समय तक निगरानी रखी गई जिसमें 80% मरीज 15 महीने बाद भी रोग-मुक्त रहे। हालांकि, इस बीच रोगियों में थेरेपी के हल्के दुष्प्रभाव देखने को मिले हैं, पर न्यूरो टॉक्सिसिटी यानि तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव नहीं पाया गया।
वैश्विक स्तर पर 40 दिन का रिकॉर्ड
सीएमसी वेल्लोर के डॉक्टरों ने बताया कि यह प्रक्रिया अस्पताल में ही स्वचालित मशीनों के जरिये की गई जिसमें करीब नौ दिन का समय लगा। जबकि वैश्विक स्तर पर कार-टी थेरेपी में कम से कम पांच सप्ताह यानी 40 दिन का समय लगता है। भारतीय परीक्षण में मरीज की ताजा कोशिकाओं का उपयोग किया गया, जिससे उनकी तेजी से रिकवरी हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने 90 फीसदी से भी अधिक सस्ती प्रक्रिया को जन्म दिया है।
इलाज का 90 फीसदी खर्च बचेगा
भारत में जहां कैंसर का इलाज महंगा है और ज्यादातर लोगों के पास बीमा नहीं है। यह थेरेपी लागत को 90% तक कम करती है। वैश्विक स्तर पर कार-टी थेरेपी की लागत 3,80,000-5,26,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 3-4 करोड़ रुपये) है, लेकिन वेलकारटी मॉडल ने अब इसे बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराने का रास्ता खोल दिया है। ईसीएमआर का कहना है कि भारत में हर साल 50 हजार नए ल्यूकेमिया मरीज सामने आ रहे हैं।